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लीगल नोटिस- व्यवस्था पर सवाल, पशुपालन विभाग बेहाल

देश में पशुधन की गणना में राजस्थान भले ही पहले स्थान पर हो लेकिन इस पशुधन के स्वास्थ्य की देखरेख में लगे कार्मिकों के प्रति उन्हीं का विभाग लगातार लापरवाही बरत रहा है, नतीजा कार्मिकों ने अब अपने ही विभाग को लीगल नोटिस भेज दिया। दरअसल पूरा मामला केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना नेशनल आर्टिफिशियल इनसेमिनेशन प्रोग्राम से जुड़ा हुआ है।

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जयपुर

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Rakhi Hajela

May 26, 2022

पशुपालन विभाग को लीगल नोटिस
राजस्थान पशु चिकित्सा कर्मचारी संघ की ओर से दिया नोटिस
नेशनल आर्टिफिशियल इनसेमिनेशन प्रोग्राम- कार्मिकों को ना तो दिए गए सेफ्टी मेजर्स ना ही दिया गया काम के बदले मानदेय का भुगतान
विभाग को भेजा लीगल नोटिस

जयपुर।
देश में पशुधन की गणना में राजस्थान भले ही पहले स्थान पर हो लेकिन इस पशुधन के स्वास्थ्य की देखरेख में लगे कार्मिकों के प्रति उन्हीं का विभाग लगातार लापरवाही बरत रहा है, नतीजा कार्मिकों ने अब अपने ही विभाग को लीगल नोटिस भेज दिया। दरअसल पूरा मामला केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना नेशनल आर्टिफिशियल इनसेमिनेशन प्रोग्राम से जुड़ा हुआ है। इस योजना में कार्मिकों के निजी मोबाइल का उपयोग करवाए जाने और पैसों के अनियमित भुगतान को लेकर राजस्थान पशु चिकित्सा कर्मचारी संघ ने पशु पालन विभाग को लीगल नोटिस भेजा है। इस संबंध में एक निजी लॉ फर्म माइंडस्प्राइट की ओर से नोटिस जारी कर तमाम वाकये की जानकारी दी गई है। साथ ही मामले में तुरंत प्रभाव से एक्शन लेने का आग्रह किया गया है। नोटिस में तामम पशु उपनिदेशकों को पाबंद करने और उनकी ओर से कार्यक्रम के संबंध में जारी नोटिस या ऑर्डर को रोकने का भी आग्रह किया गया है। ऐसा नहीं होने पर विभागीय अधिकारियों के खिलाफ कानून कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।
नहीं किया काम का भुगतान
दरअसल केंद्र सरकार की योजना के तहत प्रदेश में राष्ट्रीय कृत्रिम गर्भाधान कार्यक्रम शुरू किया गया था जिसे सरकार को अपनी मशीनरी से चलाना था और डेटा मैनेजमेंट करना था। विभागीय लापरवाही के कारण प्रदेश में इसका 50 फीसदी लक्ष्य भी प्राप्त नहीं हुआ, इसके बाद केंद्र की ओर से फेज तीन की प्रशासनिक अनुमति 13 अगस्त 2021 में जारी की गई। कार्यक्रम के तहत इनाफ पोर्टल पर डेटा अपलोड करने का काम कार्मिकों को पशु संजीवनी स्कीम के तहत दिए गए टेबलेट या फिर मोबाइल के जरिए करना था। इस डेटा के मैनेजमेंट का काम राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड को दिया गया। राज्य सरकार को यह टेबलेट अपने एआई टेक्नीशियनस को उपलब्ध कराने थे। साथ ही सभी जिला पशु अधिकारी को ये डेटा अपलोड करने के लिए डेटा एंट्री ऑपरेटर को शॉर्ट टर्म बेसेस पर रखना थाा, जिन्हें मासिक 18 हजार रुपए दिए जाने थे, लेकिन विभाग में इसकी अनदेखी की गई। कुछ ही एआई टेक्नीशियंस को टेबलेट उपलब्ध कराए गए, लेकिन उन्हें डेटा अपलोड करने पर दी जाने राशि नहीं दी गई, ना ही डेटा के यूज का भुगतान किया गया।
सेफ्टी मेजर्स को लेकर बरती लापरवाही
केंद्र के निर्देश के बाद भी कार्मिक नहीं लगाए गए और जो लगाए गए उन्हें भी किसी भी प्रकार के सेफ्टी मेजर्स जैसे दस्ताने, सेनेटाइजर, प्रोटेक्टिंग ग्लास नहीं दिए गए। जबकि कोविड के कारण वह इन्फेक्शन का शिकार हो सकते थे।
कार्मिकों को दी गई धमकी
झुंझुनूं और कुचामन सिटी सहित विभाग में कार्यरत विभिन्न जिलों के उपनिदेशकों ने एआई टे क्नीशियंस को टेबलेट देने के स्थान पर निजी मोबाइल का उपयोग काम में लेने के लिए बाध्य किया। जब उनकी शिकायत की गई तो कार्मिकों को धमकाया गया। डेटा एंट्री ऑपरेटर को लगाने और कार्य की राशि का भुगतान करने के संबंध में अलग से फंड दिए जाने के बाद भी यह तमाम कार्य जबरन करवाए गए। यहीं नही निजी मोबाइल फोन पर विभागीय काम के एप डाउनलोग करवाकर उपनिदेशकों ने सुरक्षा को भी ध्यान नहीं रखा है। ऑफिस के कार्य में निजी फोन का उपयोग व्यक्ति की निजता का भी हनन है। उपनिदेशक ने अपने मातहत काम करने वालों के साथ जबरन यह कार्रवाई की है।

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