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देश की जीवन प्रत्याशा बढ़कर हुई 68.7 वर्ष

नेशनल हेल्थ प्रोफाइल-2019 रिपोर्ट  

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जयपुर

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Anoop Singh

Nov 01, 2019

देश की जीवन प्रत्याशा बढ़कर हुई 68.7 वर्ष

देश की जीवन प्रत्याशा बढ़कर हुई 68.7 वर्ष

नई दिल्ली ञ्च पत्रिका. भारत में पिछले कई दशकों के दौरान जीवन प्रत्याशा में काफी बढ़ोतरी देखने को मिली है। नेशनल हेल्थ प्रोफाइल-2019 की बुधवार को जारी रिपोर्ट के अनुसार, 1970-75 के समय भारत में जीवन प्रत्याशा जहां 49.7 वर्ष थी, वहीं 2012-16 में यह बढ़कर 68.7 वर्ष तक पहुंच चुकी है। इसी अवधि में महिलाओं के लिए जीवन प्रत्याशा 70.2 वर्ष और पुरुषों के लिए 67.4 वर्ष आंकी गई है।
अगर पिछले साल के सर्वे से तुलना की जाए तो जीवन प्रत्याशा 2011-15 में 68.3 वर्ष बताई गई थी। इसी अवधि में महिलाओं के लिए जीवन प्रत्याशा 70 वर्ष और पुरुषों के लिए 66.9 वर्ष आंकी गई। इस लिहाज से सामान्य रूप से और पुरुषों की जीवन प्रत्याशा में वृद्धि दर्ज की गई है।
गैर-संक्रामक रोगों के बारे में सर्वे में कहा गया है कि एनसीडी क्लीनिकों में आए 6.51 करोड़ रोगियों में से 4.75 फीसदी लोग मधुमेह से पीडि़त हैं। इसके अलावा 6.19 फीसदी लोग उच्च रक्तचाप से पीडि़त मिले जबकि 0.30 फीसदी कार्डियोवस्कुलर रोग से पीडि़त मिले। स्ट्रोक के 0.10 फीसदी जबकि सामान्य कैंसर के 0.26 फीसदी रोगी सामने आए।
सर्वे के अनुसार, दिल्ली के राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में प्रति वर्ग किलोमीटर 11,320 लोगों के साथ सबसे ज्यादा जनसंख्या घनत्व दर्ज किया गया। जबकि अरुणाचल प्रदेश में जनसंख्या घनत्व सबसे कम 17 है।
वर्ष 1991 से 2017 तक भारत में जन्मदर, मृत्युदर और प्राकृतिक विकास दर में लगातार कमी आई है। भारत में 2017 तक प्रति एक हजार जनसंख्या पर जन्मदर 20.2 जबकि मृत्युदर 6.3 दर्ज की गई है। जनसंख्या में हालांकि वृद्धि जारी है, क्योंकि जन्मदर में गिरावट मृत्युदर में गिरावट जितनी तेजी से नहीं हो रही है।
शिशु मृत्युदर में काफी गिरावट आई है। सर्वे में सामने आया है कि संक्रामक बीमारियों की बात करें तो 2018 में छत्तीसगढ़ में मलेरिया के कारण सबसे ज्यादा मौतें हुई हैं। यहां मलेरिया के 77,140 मामले सामने आए, जिसमें 26 लोगों की मौत हो गई। एडीज मच्छरों द्वारा फैलने वाला डेंगू और चिकनगुनिया भारत में सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए बहुत बड़ी चिंता का कारण बताया गया है।


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