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जीवन जन्म और मृत्यु के बीच की यात्रा- डॉ. चिन्मय पंड्या

-देव संस्कृति विश्वविद्यालय के प्रति कुलपति एवं प्रखर वक्ता पंड्या ने जीवन के गूढ़ रहस्यों से आमजन को करवाया आत्मसात

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Life Journey Between Birth and Death - Dr. Chinmoy Pandya

जयपुर. मनुष्य को मानव जीवन सौभाग्य और संभावनाओं के रूप में मिलता है। ईश्वर ने मनुष्य को अपने प्रतिनिधि के रूप में धरती पर भेजा है। मनुष्य को ईश्वर ने कई अवसर दिए हैं। बस उन्हें संभावनाएं तलाशने की आवश्यकता है। मानव जीवन को वरदान बनाने के लिए जीवन में सही उदेश्य और संकल्प बहुत ही महत्वपूर्ण है। गायत्री परिवार के वरिष्ठ संचालक और देव संस्कृति विश्वविद्यालय शांतिकुंज, हरिद्वार के प्रति कुलपति डॉ. चिन्मय पंड्या ने बिड़ला सभागार में मानव जीवन वरदान या अभिशाप विषय पर व्याख्यान देते हुए कही। अखिल विश्व गायत्री परिवार की अगुवाई में हुए कार्यक्रम में समाज के हर तबके और वर्ग के लोगों ने शिरकत की।

गायत्री मंत्र की महत्ता क्या है
पंडया ने कहा कि मनुष्य में दिव्यता को जगाने का मंत्र गायत्री मंत्र है। जीवन जन्म और मृत्यु के बीच की यात्रा है, जिसके बीच में आता है चुनाव यानि पसंद। मनुष्य तकनीक का सही इस्तेमाल करें। मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास, लालचंद कटारिया, मुख्य आयोजक आलोक अग्रवाल, संजय गुप्ता और राजू मंगोडीवाला ने गुरू मंत्र के साथ दीप प्रज्जवलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। विवि. की डॉक्यूमेंट्री भी प्रदर्शित की गई। समापन युगऋषि पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य की शिक्षाओं की पुस्तक के विमोचन से हुआ। आमजन को कई संकल्प भी दिलवाए।

यज्ञीय जीवन शैली अपनाएं
मानसरोवर किरण पथ स्थित गायत्री निवेदना निवारण केंद्र में कार्यक्रम में पंडया ने अखंड दीप और वंदनीय माता भगवती देवी शर्मा की जन्म शताब्दी के तहत होने वाले कार्यक्रम में शिरकत की। उन्होंने कहा कि स्कूल, कॉलेज, अस्पताल या अन्य जनोपयोगी भवन भी एक तरह से मंदिर है। यहां लोगों की पीड़ा का निवारण होता है। जो सोने के मंदिर बनाने की सोच रहे हो उन्हें इनका निर्माण करवाना चाहिए। यह विचार आज यज्ञीय जीवन शैली को अपनाने की आवश्यकता है। संतोष, सद्भावना ही असली संपदा है। अखिल विश्व गायत्री परिवार शांतिकुंज हरिद्वार राजस्थान जोन के समन्वयक ओम प्रकाश अग्रवाल, जयपुर उप जोन के समन्वयक सुशील कुमार शर्मा मौजूद रहै। इस पूर्व पंडया का राजस्थानी अंदाज में स्वागत किया। कार्यक्रम में प्रज्ञागीतों की प्रस्तुतियां भी दी।