
Bमुंबई.B श्रीआदिनाथ जैन श्वेताम्बर मूर्तिपूजक संघ ट्रस्ट के तत्वावधान में आयोजित चातुर्मास के अंतर्गत आदेश्वर भवन, श्रीपती ज्वेल्स ई-विंग में विराजित साध्वी भव्य गुणाश्री ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि जैन धर्म के प्रत्येक पर्व का मूल उद्देश्य आत्मशुद्धि, तप, संयम और अहिंसा का पालन है। उन्होंने कहा कि "जियो और जीने दो" तथा "अहिंसा परमो धर्म:" जैन धर्म के मूल सिद्धांत हैं। साध्वी ने कहा कि जैन तपस्याएं अत्यंत कठिन मानी जाती हैं। उपवास, चौविहार, तिविहार, एकासन, आयंबिल और पौषध जैसे व्रत केवल भोजन का त्याग नहीं, बल्कि इंद्रिय संयम, आत्मचिंतन और आध्यात्मिक साधना के माध्यम हैं। तप का उद्देश्य मन, वचन और कर्म की शुद्धि है। साध्वी शीतल गुणाश्री ने पर्व तिथियों पर हरी सब्जियां नहीं खाने की परंपरा का महत्व बताते हुए कहा कि यह जीवदया, संयम और स्वास्थ्य संरक्षण की भावना से जुड़ी है। जैन शास्त्रों में इन तिथियों पर हरी सब्जियों के त्याग का विशेष विधान है। भरत जैन ने बताया कि साध्वीवृंद के दर्शन के लिए रतलाम से श्रद्धालु पहुंचे। ललित जैन ने जानकारी दी कि साध्वीवृंद के सान्निध्य में 2 अगस्त से निगोद निवारण तप का शुभारंभ होगा, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के भाग लेने की उम्मीद है।
Updated on:
27 Jul 2026 06:01 am
Published on:
27 Jul 2026 06:01 am
