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मनचलों और मनमानी से हुईं परेशान, चालू करो लो फ्लोर बसें

- पखवाड़ेभर से सिटी बसें बन्द, गुस्साईं कॉलेज छात्राएं सड़कों पर उतरीं, कर्मचारी आज बांधेंगे काली पट्टी

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जयपुर

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Harshit Jain

Oct 01, 2018

jaipur

मनचलों और मनमानी से हुईं परेशान, चालू करो लो फ्लोर बसें

जयपुर. जयपुर में सिटी बसों (लो फ्लोर) से जुड़े कर्मचारी और राज्यभर में रोडवेजकर्मी सोमवार को भी हड़ताल पर रहे। पखवाड़ेभर से चल रही हड़ताल खत्म कराने पर सरकार ने सोमवार को भी कोई ध्यान नहीं दिया। ऐसे में अब लोगों में गुस्सा बढ़ रहा है। राजधानी में शहरी परिवहन का बड़ा साधन लो फ्लोर बसें बंद होने से गुस्साईं कॉलेज छात्राएं सोमवार को सड़कों पर उतर आईं।

दोपहर 12.15 बजे महारानी कॉलेज की छात्राओं ने कॉलेज के बाहर टोंक रोड अजमेरी गेट पर प्रदर्शन किया। छात्राओं ने कहा, कॉलेज और कोचिंग तक आने-जाने के लिए लो-फ्लोर बसें उनके लिए सबसे बेहतर साधन हैं। ये बसें बंद रहने से आवागमन में काफी समय बर्बाद हो रहा है, परेशानियां भी झेलनी पड़ रही हैं। मिनी बसों में मनचले धक्का-मुक्की करते हैं, मनमाना किराया वसूला जा रहा है। लगभग आधे घंटे बाद पुलिस की समझाइश पर छात्राएं सड़क से हटीं। छात्राओं ने सीएम के नाम पुलिस को दिए ज्ञापन में चेताया कि ५ दिन में बसें चालू नहीं हुईं तो अन्य कॉलेजों की छात्राओं के साथ सड़कों पर उतरेंगी। उधर, रामबाग स्थित सुबोध कॉलेज की छात्राओं ने भी विरोध प्रदर्शन किया।


छात्राओं ने कहा

- ऋतिका मीणा, सोडाला : मैं सोडाला से कॉलेज आती हूं। लो-फ्लोर से समय पर कॉलेज पहुंच जाती थी लेकिन अभी निजी वाहन या कैब से आना पड़ रहा है।
- राजेश चौधरी, रामबाग : कई दिन से मिनी बसों में सफर करने को मजबूर हो रहे हैं। परेशान हो गए हैं। सरकार को हड़ताल खत्म करानी चाहिए।

- शीतल उमरवाला, सांगानेर : पन्द्रह दिन हो गए, निजी बसों में कॉलेज आने-जाने के कारण पढ़ाई छूट रही है। हड़ताल खत्म होनी चाहिए।

कर्मचारी आज बांधेंगे काली पट्टी
दूसरी ओर, जेसीटीएसएल कर्मियों का आरोप है कि उनकी २४ सूत्री मांगों पर सरकार ध्यान नहीं दे रही है। गांधी जयंती पर मंगलवार सुबह ९.३० बजे जेएलएन मार्ग स्थित गांधी सर्किल पर सरकार के इस रवैये के खिलाफ आंख-कान-मुंह पर काली पट्टी बांधकर प्रदर्शन करेंगे।


पत्रिका तत्काल : निजी वाहनों में लुट रही जेब

राजस्थान पत्रिका ने पड़ताल की तो छात्र-छात्राओं और कामकाजी लोगों ही नहीं बल्कि महिलाओं-बुजुर्गों ने भी सरकारी सिटी बसों को शहर में आवागमन का बेहतर साधन बताया। लोगों ने कहा, निजी वाहनों या मिनी बसों में आना-जाना बहुत महंगा पड़ता है, समय भी अधिक लगता है। जबकि सिटी बसें बेहतर और आरामदायक हैं।
थोड़े किराए में लम्बा सफर
बस रूट संख्या-3 : सांगानेर से महारानी कॉलेज

दूरी : 14 किलोमीटर
किराया सामान्य : 14 रुपए

स्टूडेंट किराया : 7 रुपए
दोपहिया से खर्च : 50 रुपए

कैब, टैक्सी का किराया : 185 से 215 रुपए
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बस रूट संख्या-7 : ट्रांसपोर्टनगर से खिरणी फाटक
दूरी : 21 किलोमीटर

किराया सामान्य : 27 रुपए
स्टूडेंट किराया : 7 रुपए

दोपहिया से खर्च : 100 रुपए
कैब, टैक्सी का किराया : 250 से 300 रुपए

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बस रूट संख्या-9 ए : अग्रवाल फार्म से दादी का फाटक

दूरी : 28 किलोमीटर
किराया सामान्य : 23 रुपए

स्टूडेंट किराया : 10 रुपए
दोपहिया से खर्च : 110 रुपए

कैब, टैक्सी का किराया : 300 से 350 रुपए
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बस रूट संख्या-14 : चौमू पुलिया से बस्सी
दूरी : 46 किलोमीटर

किराया सामान्य : 35 रुपए
स्टूडेंट किराया : 17 रुपए

दोपहिया से खर्च : 150 रुपए
कैब, टैक्सी का किराया : 500 से 550 रुपए

(महिलाओं, वरिष्ठ नागरिकों के लिए 30 प्रतिशत छूट, 70 वर्ष से ज्याद उम्र वालों व नि:शक्तजन के लिए नि:शुल्क)