15 फ़रवरी 2026,

रविवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

Mahavir Jayanti 2023: खुद चलकर आई थी भगवान महावीर की प्रतिमा

विश्व को अहिंसा परमो धर्म तथा जियो और जीने दो का संदेश देने वाले जैन धर्म के 24 वें तीर्थंकर भगवान महावीर के जयपुर सहित अन्य स्थानों पर बने मंदिरों का रोचक इतिहास है। शिल्प-स्थापत्य कला के बेजोड़ कारीगरी के साथ ही ये आस्था के भी प्रमुख केंद्र हैं। पत्रिका की ओर से जैन मंदिरों पर विशेष रिपोर्ट

less than 1 minute read
Google source verification
mahaveer_1.png

चौड़ा रास्ता, गोपाल जी का रास्ता स्थित दिगम्बर जैन मंदिर 200 साल पुराना है। यहां स्वत: ही भगवान महावीर की प्रतिमा बैलगाड़ी में मंदिर के बाहर आकर रूक गई। 200 वर्ष पहले संवत 1867 में भूमि खरीद कर मंदिर की नींव रखी। मंदिर अध्यक्ष एनके सेठी, मंत्री अशोक टकसाली के मुताबिक किवंदति है कि आमेर के एक मंदिर में दो मूर्तियां मिलीं। इन्हें अलग-अलग दो बैलगाड़ियों पर बिना सारथी के छोड़ने का निर्णय लिया। एक बैलगाड़ी आमेर की नसियां के दरवाजे पर खड़ी हो गई। दूसरी बैलगाड़ी, जिसमें भगवान महावीर स्वामी की खड़गासन मूर्ति विराजमान थी। स्वत:चलती हुई गोपाल जी का रास्ता स्थित मंदिर के सामने खड़ी हो गई।

मंदिर में दूसरी वेदी बनाकर प्रतिमा विराजित की। टकसाली ने बताया कि इसके अलावा पन्ने, माणक सहित अन्य दुर्लभ 24 तीर्थंकरों की करीब 32 प्रतिमाएं हैं। दीवारों पर सोने का कार्य हुआ है।

जयपुर में तैयार कराई प्रतिमा
आदर्श नगर, मुनि जयानंद मार्ग स्थित श्वेतांबर मंदिर मुलतान मंदिर जैन मंदिर भी खास है। 1947 में कई परिवार सहित 125 प्रतिमाएं मुलतान (पाकिस्तान) से लेकर यहां आए। मंदिर का स्थान तय नहीं होने के चलते प्रतिमाएं मुंबई स्थित भायखला मंदिर भेजी। मुनियों-वरिष्ठजनों ने प्रतिमाओं को जयपुर में विराजमान करने का निर्णय लिया। 35 इंच की मूलनायक भगवान महावीर स्वामी की प्रतिमा तैयार करवाई।

भगवान महावीर की माता के सोलह स्वप्न
युवा मंडल के सचिव विनोद बाकलीवाल ने बताया कि तीनों द्वार चांदी के बने हैं, जिन पर भगवान महावीर की माता के सोलह स्वप्न हैं। वेदी के दोनों ओर भगवान के पूर्व भव आठ भित्ती चित्रों में अंकित हैं। जैन तीर्थ सम्मेद शिखर का सोने की कलम का बारीकी से पूरा दर्शन विवरण दर्शाया है। जैन चिन्ह का विवरण, पुराने शास्त्रों की मान्यता, भित्ति चित्र स्वर्णमंडित हैं। सोमवार को भगवान महावीर के पंचामृत अभिषेक सहित अन्य कार्यक्रम होंगे।