
जयपुर. बेलगाम दौड़ती लो-फ्लोर बस ने एक बार फिर रविवार को दो जिंदगी को कुचल दिया। टोंक रोड पर भारतीय खाद्य निगम के गोदाम के सामने बाइक सवार दो युवकों को
लो-फ्लोर बस ने कुचल दिया। दुर्घटना में दोनों युवकों की मौके पर ही मौत हो गई। दुर्घटना के बाद बस का चालक और परिचालक बस को छोड़कर फरार हो गए। मौके पर पहुंची
दुर्घटना थाना पुलिस ने बस को टी-3 और बाइक को थाने में खड़ी करवाई। पुलिस ने समर्थ का पोस्टमार्टम करवाकर शव परिजनों के सुपुर्द कर दिया। दूसरे युवक के परिजनों को सूचित
कर दिया गया है। परिजनों के आने के बाद ही युवक का पोस्टमार्टम होगा।
पुलिस ने बताया कि मृतक समर्थ सिंह सिद्धू(24) हथरोई किला के पास विधायकपुरी और रौनक ठक्कर(22) जनता हाउस कॉलोनी, आदिपुर कच्छ गुजरात का रहने वाला था। दोनों
सी-स्कीम निवासी अपने दोस्त तपेश पंवार के घर से गोपालपुरा की तरफ जा रहे थे। बाइक समर्थ चला रहा था। भारतीय खाद्य निगम के सामने लो-फ्लोर बस ने टक्कर मार दी, जिससे
बाइक अनियंत्रित हो गई। करीब 30-35 फीट तक बस दोनों को घसीटते हुए ले गई। खलासी तरह का आगे का टायर दोनों युवकों के सिर से ऊपर गुजर गया। हादसे में दोनों युवकों की
मौत हो गई।
पौन घंटे यातायात जाम-
हादसे के बाद सड़क पर पड़े युवकों के शवों को देखकर लोगों ने स्पीड लगाने की मांग करते हुए बैरिकेट्स लगाकर सड़क पर यातायात जाम कर दिया। इससे टोंक फाटक पुलिया तक
वाहनों का लंबा जाम लग गया। एसीपी महेन्द्र शर्मा ने बताया कि विरोध में लोगों ने सड़क जाम कर दी थी। स्पेशल टास्क फॉर्स व थाना पुलिस की मदद से भीड़ को दूर किया गया।
सड़क पर एकत्रित भीड़ को पुलिस ने हटाकर 45 मिनट बाद रास्ता चालू करवाया। जाम के कारण एंबुलेंस के आधा घंटे देरी से पहुंचने पर शवों को पहले भंडारी अस्पताल फिर
जयपुरिया अस्पताल पहुंचाया गया।
खाना खा रहा था तभी...
समर्थ के पिता तारा सिंह सिद्धू कम्यूनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया के वरिष्ठ नेता और राष्ट्रीय किसान सभा के सचिव पद पर हैं। जयपुरिया अस्पताल में लोगों को बता रहे थे कि समर्थ अपने
दोस्त को कुछ सामान दिलाने जा रहा था। कुछ देर पहले ही उससे बात हुई थी। खाना खा रहा था तभी भंडारी अस्पताल पहुंचने का फोन आया। अस्पताल पहुंचे तब एक्सीडेंट का पता
चला। मां निशा सिद्धू नेशनल फैडरेशन इंडियन वीमन की महासचिव हैं। दोपहर को वह शहीद स्मारक पर सीएए के खिलाफ चल रहे धरने पर थीं। घटना के बारे में पता चलते ही वह
जयपुरिया अस्पताल पहुंची। समर्थ के माता-पिता ने आंखें दान कर दी।
पगड़ी पहनकर देता था धरोहर बचाने का संदेश
सी-स्कीम निवासी तपेश पंवार ने बताया कि समर्थ अधिकांश समय मेरे घर पर ही रहता था। दोपहर को घर से पगड़ी बांधकर रौनक को सामान दिलाने के लिए निकला था। 22 अप्रेल को एन्वायर्नमेंट डे पर प्रोग्राम करने वाले थे। समर्थ कहकर निकला था कि शाम चार बजे जवाहर कला केंद्र मिलते हैं, वहां प्रोग्राम के लिए मीटिंग करनी है। तपेश ने बताया कि वह हमेशा पगड़ी पहने रहता था और युवाओं को पगड़ी पहनकर धरोहर बचाने का संदेश देता था। 16 मार्च को तपेश का जन्मदिन है। समर्थ रात को बर्थडे पार्टी की तैयारी कर रहा था। उधर समर्थ के अन्य दोस्तों ने बताया कि रौनक तीन-चार दिन पहले ही गुजरात से आया था और सोमवार को वापस अपने घर जाने वाला था।
Published on:
16 Mar 2020 12:56 am
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