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जयपुर में प्रदूषण फैला रही लो-फ्लोर बसें, शहर में रोग के धुएं को देखकर भी नहीं जाग रही सरकार

काला धुआं छोड़ने के बाद भी परिवहन विभाग नहीं कर रहा लो-फ्लोर बसों पर कोई कार्रवाई, मौके पर जांच करने के अधिकार फिर भी सोए है जिम्मेदार

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जयपुर

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Rajesh

Apr 26, 2018

Low floor buses spread pollution in Jaipur Goverment silence on smoke of the disease

जयपुर। वाहनों के प्रदुषण को लेकर सरकार ने आम जनता पर जुर्माने का प्रावधान तो कर दिया लेकिन शहर में बीमारी बांट रही अपनी लो फ्लोर बसों पर सरकारी एजेंसिंया कार्रवाई ही नहीं कर रही है। ऐसे में बेलगाम बसें पूरे शहर में आंख, फेफड़ों और त्वचा के लिए घातक धुआं छोड़ती घूम रही है। सेंट्रल मोटर व्हीकल एक्ट के नियमों और राजस्थान मोटरयान प्रदूषण जांच केन्द्र योजना-2017 के तहत प्रादेशिक परिवहन कार्यालय और पुलिस को इन बसों को रोककर मौके पर ही प्रदूषण की जांच करने के अधिकार है। लेकिन सड़क पर इन बसों का धुआं आंखों से दिखने के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों ने कभी सख्ती नहीं दिखाई। नेत्र रोग विशेषज्ञ वैभव त्रिपाठी के अनुसार इतना गहरा धुआं व्यक्ति की आंखों में जलन और गंभीर एलर्जी कर सकता है। लगातार सम्पर्क में रहने से अस्थमा भी हो सकता है।

जनता पर जुर्माना -

एक ओर से सरकार ने राज्य में सभी वाहनों के लिए प्रदुषण नियंत्रण प्रमाण पत्र अनिवार्य कर जुर्माने तक का प्रावधान कर दिया है। दूसरी ओर भारी प्रदूषण फैला रही लो फ्लोर बसों के प्रति सरकारी विभाग आंख मूंदे हुए है।

ऐसे कसी जा सकती है लगाम -

सेंट्रल मोटर व्हीकल एक्ट के नियम 1989 की धारा 116 में परिवहन और पुलिस अधिकारियों को अधिकार है कि सड़क पर चलते किसी भी वाहन पर शक होने पर मौके पर ही प्रदूषण जांच कराएं। प्रदूषण स्तर मानकों से अधिक है तो संबंधित वाहन का वैद्य प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण पत्र रद्द किया जा सकता है। जुर्माने का भी प्रावधान है। यही नियम राजस्थान मोटरयान प्रदूषण जांच केन्द्र योजना 2017 में भी है।

आपको बता दें कि मेंटिनेंस और पॉल्यूशन सर्टिफिकेट मिलने के बाद भी ये लो फ्लोर बसें प्रदूषण फैला रही है। गौरतलब है कि शहरवासियों के स्वास्थ्य व शहर को प्रदूषण मुक्त रखना निगम व जेडीए का पहला दायित्व है, वहीं शहर में पब्लिक ट्रांसपोर्ट व्यावस्था में भी सुधार किया जाना चाहिए जिससें शहर वासियों को आने-जाने में परेशानी का सामना न करना पड़े।