
low floor bus
low flor bus accident in jaipur : जयपुर। राजधानी की सड़कों पर बेलगाम होकर दौड़ रहीं लो-फ्लोर बसों ( low flor bus )का मौत का पहिया थमने का नाम नहीं ले रहा है। लो फ्लोर बस का कहर मौत के रूप में ही नहीं धीमे जहर के रूप में ढा रही है। शहर में चल रही लो फ्लोर बसे शहर के पॉल्यूशन को भी दूषित कर रही है। ( rajasthan news )
प्रशासन इनका संचालक बिना पॉल्यूशन जांच के करवा रहा है। राजधानी में पिछले छह साल के दौरान लो फ्लोर बसों की चपेट में ( road accident in jaipur )आने से ४४ लोगों की जान चली गई। वहीं, १३५ लोग घायल हुए हैं। नियमों की अवहेलना पर चार साल में सिर्फ २५ चालान इन बसों के बनाए गए। वहीं, प्रदूषण फैलाने का एक भी मामला दर्ज नहीं किया गया। ( Traffice Police )
।-राह चलता ही नहीं यात्री भी परेशानी में
लो फ्लोर बस राह चलते लोगों के लिए ही नहीं बल्कि उसमें सफर करने वाले यात्रियों के लिए भी हमेशा परेशानी उत्पन्न ( JCTL Bus )करती रहती है। आए दिन लो फ्लोर बस के चलते बीच सड़क थम जाते है और कभी वह आग का गोला बन जाती है। सड़कों पर तेज रफ्तार में दौड़ती लो फ्लोर बसों में आए दिन आग लगने की घटनाएं भी सामने आ रही है। इस साल की बात करें तो लो फ्लोर बसों में करीब आधा दर्जन बार आग लग चुकी है। किसी तरह यात्रियों ने कूद कर अपनी जान बचाई है। लेकिन इन सब बावजूद जिम्मेदार महकमा व सरकार सबक लेने को तैयार नहीं है।
- जयपुर में दौड चालीस प्रतिशत कडंम लो फ्लोर बसें
जयपुर में चलने वाली जेसीटीएसएल की 400 लो फ्लोर बसों में से करीब 1२0 से अधिक बसें खस्ता हालत में हैं। बसों को कंडम मानने के लिए यह फार्मूला तय किया गया है। बस 8 साल या 6 लाख किमी चलने पर कंडम घोषित करने का प्रावधान है।
जेसीटीएल की अधिकांश बसों को मार्च में आठ साल पूरा हो गया और ( traffice police ) वे छह लाख किमी से अधिक चल चुकी है। जब लो फ्लोर बसों के संचालन से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों से जानकारी ली तो पता चला की सात साल पुरानी इन बसों में से 20 बसें तो कंडम होकर डिपो में खड़ी हैं। जबकि 80 बसों को रिपेयर कर शहर में मौत बनकर घूमने को छोड़ दिया जाता है। जेसीटीएसएल सात वर्ष से किराए के वर्कशॉप में अपनी बसों की मेंटिनेंस करा रहा है। बसों के मेंटीनेंस के लिए जेडीए ने आगरा रोड पर बगराना और सीकर रोड पर टोडी के पास जमीन का आवंटन किया हुआ है, लेकिन अभी तक र्कशॉप तैयार नहीं हुआ। ( Rajasthan Police )
-आमजन ही नहीं चालक-खलासी के लिए भी खतरा बन गई बसें
23 जून 2016 को टोंक के अरनिया कांकड गांव निवासी ड्राइवर नंदकिशोर को जबरन खटारा लो फ्लोर बस थमा दी गई थी। नतीजा यह निकला की बस का एक्सीडेंट हो गया और ड्राइवर का दांया पैर टूट गया। नंदकिशोर ने बताया कि जो बस मुझे दी गई थी, उसके बारे में मैं कई बार शिकायत कर चुका था कि यह बस सही नहीं चलती है। इसको मेंटिनेंस की जरूरत है। इसके बावजूद मुझे जबरन यह बस दे दी गई। उस दिन न्यू सांगानेर रोड पर अरावली मार्ग के पास बीआरटीएस कोरिडोर में ब्रेक लगाते समय कंडक्टर साइड के ब्रेक फेल हो गए और बस एक तरफ खींच गई। इससे वह सामने से आ रही लो फ्लोर बस में घुस गई। वहीं इस साल पुरानी चुंगी के पास चलती बस का गियर ही निकल कर चालक के हाथ में आ गया। किसी तरह से चालक ने बस को रोका, लेकिन इसमें चालक चोटग्रस्त गया।
- लो फ्लोर की टक्कर से दम्पती की मौत
लो फ्लोर बस ने कल सुबह न्यू आतिश मार्केट में एक बाइक सवार बुजुर्ग दम्पती को टक्कर मार दी। हादसे में बुजुर्ग की दिन में मौत हो गई थी । जबकि देर रात हादसे में घायल उसकी पत्नी की भी मौत हो गई। हादसे में मांग्यावास मानसरोवर निवासी नाथू लाल व उसकी पत्नी नानगी देवी की मौत हो गई। इस साल की शुरूआत में सीकर रोड पर भी बस ने साइकिल सवार को कुचल दिया था।
Published on:
25 Nov 2019 11:31 am
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