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मिलिए जयपुर की रूपाली सक्सेना से, कशीदाकारी को बनाया पैशन, सैकड़ों महिलाओं को बनाया हुनरमंद

तीन सालों में 5000 महिला उद्यमी तैयार करना ही लक्ष्य

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जयपुर

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Savita Vyas

Feb 23, 2023

मिलिए जयपुर की रूपाली सक्सेना से, कशीदाकारी को बनाया पैशन, सैकड़ों महिलाओं को बनाया हुनरमंद

मिलिए जयपुर की रूपाली सक्सेना से, कशीदाकारी को बनाया पैशन, सैकड़ों महिलाओं को बनाया हुनरमंद

सविता व्यास

जयपुर। हर एक महिला में स्किल होती है, बस उसे पहचानने की जरूरत है। जिन महिलाओं ने अपनी स्किल को विजनेस में बदला, उन्हें ऊंचाइयां भी मिली। ऐसी ही कहानी है जयपुर की रहने वाली रूपाली सक्सैना की, जो पिछले 17 सालों से महिलाओं को हस्तकला में प्रशिक्षित कर आत्मनिर्भर बनाने में जुटी हैं। रूपाली को कशीदाकारी का हुनर विरासत में मिला है। रूपाली महिला सशक्तिकरण की जीती जागती मिसाल हैं। अब तक वो 1500 से अधिक महिलाओं को स्वरोजगार की राह दिखा चुकी हैं।


दादी का जज्बा देखकर मिली प्रेरणा
रूपाली बताती है कि उनकी दादी और मां से सिलाई-बुनाई-कशीदा सीखा है। 1971 में जब भारत-पाक युद्ध हुआ तो उनकी दादी ने अपने हाथों से वुलन बनाकर बोर्डर पर सैनिकों के लिए भेजे थे। बचपन से ही मन में दूसरों के लिए कुछ करने का जज्बा था। इसकी शुरुआत ग्वालियर में गरीब लड़कियों को कशीदाकारी सीखा कर की। जयपुर में शादी के बाद भी यह सिलसिला जारी रहा। इसमें ससुराल वालों ने खासकर पति ने पूरा सहयोग किया। कच्ची बस्तियों में जाकर महिलाओं को कढ़ाई-बुनाई-सिलाई सिखने को प्रेरित करती थीं। हालांकि इस दौरान उनके परिवार वालों के विरोध का सामना भी करना पड़ा, लेकिन हिम्मत नहीं हारी। 12 महिलाओं के साथ मिलकर महिला स्वयं सहायता समूह साची क्रिएशंस की नींव रखी। काम में पारंगत होने के बाद महिलाओं को बुटिक से काम दिलाना शुरू किया। इसके अलावा मेले और प्रदर्शनियों में निशुल्क स्टॉल उपलब्ध कराकर महिला समूह के उत्पादों को बेचा। वर्तमान में रूपाली महिलाओं को जूट पर कशीदाकारी का प्रशिक्षण दे रही हैं। इससे बाजार में प्लास्टिक की जगह पर्यावरण अनुकूल कैरी बैग सस्ते दामों में उपलब्ध हो सकेंगे। रुपाली का कहना है कि सिलाई-बुनाई-सिलाई को सीखना यंगस्टर्स पसंद नहीं करते हैं। मेरा लक्ष्य अगले तीन सालों में 5000 महिला उद्यमी तैयार करना है, ताकि इस हुनर को बढ़ावा मिल सके।