
ई-मित्र केंद्र पर जांच करते तहसीलदार। फोटो: पत्रिका
जयपुर। जयपुर के चौमूं में संचालित एक ई-मित्र केंद्र संचालक की ओर से फर्जी मतदाता पहचान पत्र बनाने को लेकर फर्जी तरीके से दस्तावेज तैयार कर लोगों से मोटी रकम वसूलने का मामला सामने आया है। इस संबंध में चौमूं तहसीलदार डॉ. विजयपाल विश्नोई ने चौमूं थाने में ई-मित्र संचालक सहित अन्य लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने को लेकर रिपोर्ट दी है, लेकिन देर रात तक मामला दर्ज नहीं हुआ है।
तहसीलदार डॉ. विश्नोई ने बताया कि गौरी कॉलोनी निवासी अब्दुल सलाम और मदीना कॉलोनी निवासी सबिया यास्मीन ने मूल निवास प्रमाण पत्र के लिए आवेदन किया था। इन आवेदनों के साथ संलग्न मतदाता पहचान पत्रों पर संदेह होने पर जब 2008 की विधानसभा मतदाता सूची में नाम खोजे गए तो दोनों के नाम सूची में नहीं मिले। जांच में स्पष्ट हुआ कि प्रस्तुत किए गए मतदाता पहचान पत्र फर्जी हैं। तहसीलदार ने बताया कि उक्त ई-मित्र मदीना कॉलोनी में जिक्र ए इलाही नाम से संचालित है।
दस्तावेजों की जांच में आवेदनों में दो राजपत्रित अधिकारियों डॉ. टीकमचंद आनंद, उप निदेशक पशुपालन विभाग और प्रवीण कुमार अतिरिक्त निदेशक पशुपालन विभाग के हस्ताक्षर और मुहर भी संलग्न थे। जब व्हाट्सएप पर हस्ताक्षरों की फोटो भेजकर सत्यापन किया गया तो दोनों अधिकारियों ने साफ कहा कि ये हस्ताक्षर और मुहर फर्जी है।
जांच के दौरान सामने आया कि ई-मित्र संचालक अमजद ने आवेदकों से प्रति आवेदन 50 रुपए की निर्धारित फीस के बजाय 3000 रुपए वसूले। सबिया यास्मीन ने बताया कि अमजद ने कहा था कि यहां-वहां पैसे डालने होंगे, इसलिए अधिक राशि देनी होगी। आवेदकों ने यह भी स्वीकार किया कि अमजद ने कई अन्य लोगों से भी इसी तरह रकम लेकर दस्तावेज तैयार किए हैं।
तहसीलदार विश्नोई ने बताया कि 19 जनवरी 2026 को जब संचालक से पूछताछ के लिए संपर्क किया गया तो उसने फोन बंद कर लिया और कार्यालय आने से भी बचता रहा। तहसीलदार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस थाना चौमूं को पत्र लिखकर आरोपी ई-मित्र संचालक अमजद के खिलाफ जालसाजी, सरकारी दस्तावेजों से छेड़छाड़ और कूटरचना की धाराओं में एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई करने को लेकर रिपोर्ट दी है। चौमूं थाना प्रभारी हरबेन्द्र सिंह ने कहा कि शिकायत मिली है। मामला प्रक्रियाधीन में है।
Updated on:
03 Apr 2026 03:46 pm
Published on:
25 Jan 2026 08:18 am
