
जयपुर। फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी के मौके पर 21 फरवरी को भोलेनाथ की आराधना का पर्व ‘महाशिवरात्रि’ ( Maha Shivaratri 2020 ) मनाई जाएगी। ताडक़ेश्वर मंदिर, वैशाली क्वींस रोड स्थित झाडख़ंड महादेव मंदिर तथा मोतीडूंगरी स्थित एकलिंगेश्वर महादेव सहित अन्य मंदिरों में चार प्रहर की पूजा के साथ ही अभिषेक सहित अन्य धार्मिक कार्यक्रम होंगे। वहीं, शाम को भक्ति संगीत की सरिता बहेगी। इसके अलावा इस बार यह पर्व कई विशेष संयोगों के बीच मनाया जाएगा।
ज्योतिषविदों के मुताबिक करीब 59 साल बाद महाशिवरात्रि ( Mahashivaratri 2020 ) के दिन मकर राशि में चंद्र और शनि का संयोग इस पर्व की महत्ता को बढ़ाएगा। साथ ही इस दिन सर्वार्थसिद्धि, उत्तराषाढ़ा, श्रवण नक्षत्र के कई योग भी बनेंगे।
ज्योतिषाचार्य पं.दामोदर प्रसाद शर्मा ने बताया कि 21 फरवरी को शनि-चंद्र की मकर राशि में युति के साथ ही बृहस्पति धनु राशि में, बुध कुंभ राशि में और शुक्र अपनी उच्च राशि मीन में रहेगा। पांच ग्रहों की राशि पुनरावृत्ति विशेष शुभफलदायी रहेगी। इसके अलावा चंद्रमा मन और शनि ऊर्जा का कारक ग्रह है। इसके चलते महाशिवरात्रि पर इस योग का साधना की सिद्धि के लिए विशेष महत्व रहेगा। वहीं झाडख़ंड महादेव मंदिर में चार प्रहर की पूजा में जलाभिषेक के अलावा शृंगार के लिए विदेश से भी फूल मंगवाए हैं। ट्रस्ट के अध्यक्ष जयप्रकाश सोमानी ने यह जानकारी दी। गैटेश्वर, जंगलेश्वर, चमत्कारेश्वर, धूलेश्वर, गलता गेट गीता गायत्री स्थित द्वादश ज्योर्तिलिंगेश्वर, भूतेश्वर, अंबिकेश्वर, सिटी पैलेस स्थित राजराजेश्वर मंदिर में महाशिवरात्रि से पूर्व विशेष झांकी व भजन संध्या सहित अन्य आयोजन होंगे।
पूजा का समय
पहले प्रहर की पूजा 21 फरवरी को शाम 6.18 से रात 9.28
दूसरे प्रहर की पूजा रात 9.29 से 12.39
तीसरे प्रहर की पूजा मध्यरात्रि 12.40 से 3.50 बजे
अंतिम प्रहर की पूजा मध्यरात्रि बाद 3.51 से सुबह 7.02 बजे तक
अनुष्ठान के लिए कराई बुकिंग
सदाशिव ज्योर्तिलिंगेश्वर मंदिर ट्रस्ट के संस्थापक विष्णु नाटाणी ने बताया कि अमरीका, रोमानिया, दिल्ली तथा मुंबई के भक्तों ने अनुष्ठानों के लिए बुकिंग करवाई है। साथ ही फूलों सहित अन्य चढऩे वाले प्रसाद से मंदिर में ही गोकाष्ठ तैयार की जाएगी।
रंगरोगन सजावट शुरू
उधर, महाशिवरात्रि में कुछ ही दिन बचे हैं। ऐसे में शिवालयों में रंग रोगन तथा सजावट के साथ ही अन्य व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है। मंदिरों की वेबसाइट को भी अनुष्ठानों के मुताबिक अपडेट किया जा रहा है।
Updated on:
18 Feb 2020 07:50 am
Published on:
18 Feb 2020 07:48 am
