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MAHALAXMI – लक्ष्मी प्राप्ति का अचूक उपाय, खुद विष्णुजी ने खोला था यह राज

अर्थ यानि धन—संपत्ति प्राप्त करने के लिए सनातन धर्म में धन की देवी लक्ष्मी की पूजा का विधान है पर उन्हें प्रसन्न करना बहुत कठिन है। ऐेसे में हम आपको लक्ष्मी प्राप्ति का एक ऐसा सरल उपाय बता रहे हैं जिसे स्वयं भगवान विष्णु ने एक ब्राहृमण को सुझाया था।

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MAHALAXMI VRAT 2020 , MAHALAXMI VRAT KATHA GAJLAXMI VRAT

MAHALAXMI VRAT 2020 , MAHALAXMI VRAT KATHA GAJLAXMI VRAT

जयपुर. वर्तमान के भौतिक युग में बिना पैसों के कोई सुख नहीं मिल सकता। कहा भी जाता है— बिना अर्थ, सब व्यर्थ। अर्थ यानि धन—संपत्ति प्राप्त करने के लिए सनातन धर्म में धन की देवी लक्ष्मी की पूजा का विधान है पर उन्हें प्रसन्न करना बहुत कठिन है। ऐेसे में हम आपको लक्ष्मी प्राप्ति का एक ऐसा सरल उपाय बता रहे हैं जिसे स्वयं भगवान विष्णु ने एक ब्राहृमण को सुझाया था।

ज्योतिषाचार्य पंडित सोमेश परसाई बताते हैं कि आश्विन माह की कृष्ण पक्ष अष्टमी के द‍िन देवी लक्ष्मी की पूजा की जाती है। इसे महालक्ष्मी या गजलक्ष्‍मी पूजन कहा जाता है। इस दिन व्रत रखकर महालक्ष्मी व्रत कथा सुनी जाती है। इस कथा में लक्ष्मी प्राप्ति का यह भेद बताया गया है। कथा के अनुसार एक गरीब ब्राह्मण श्रीविष्णु की आराधना करता था जिससे प्रसन्न होकर विष्णुजी ने उसे दर्शन देकर वर मांगने को कहा। ब्राह्मण ने अपने घर में लक्ष्मीजी का निवास होने की कामना जाहिर की तो विष्णुजी ने उन्हें लक्ष्मीजी की प्राप्ति का उपाय बताया।

विष्णुजी ने ब्राहृमण को बताया क‍ि जो स्त्री मंदिर के सामने उपले थापती है, वह स्वयं लक्ष्‍मी हैं। आप उन्हें अपने घर आने का आमंत्रण देना। लक्ष्‍मीजी के घर पर आने से आप धनवान बन जाएंगे। ब्राह्मण ने ऐसा ही किया और जैसे ही वह स्त्री मंदिर के सामने आकर उपले थापने लगी, उन्हें घर आमंत्रित कर दिया. इस पर लक्ष्मीजी ने ब्राह्मण से कहा क‍ि यदि आप महालक्ष्मी व्रत करेंगे तो मैं आपके घर आउंगी। ब्राह्मण ने व्रत रखकर महालक्ष्मी की पूजा की तो देवी ने भी अपना वचन निभाया। माना जाता है क‍ि तभी से महालक्ष्मी व्रत की परंपरा शुरू हुई।