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14 जनवरी को मकर संक्रांति और 16 मार्च को शीतलाष्टमी का सरकारी अवकाश घोषित, असमंजस में लोग आखिर कब मनाए

Makar Sankranti 2020: मकर संक्रांति ( Makar Sankranti ) का पर्व इस बार 15 जनवरी को मनाया जाएगा, लेकिन सरकारी अवकाश 14 जनवरी को ही रहेगा। अवकाश 14 जनवरी को होने के कारण लोग असमंजस में हैं कि वे 15 को त्योहार कैसे मनाएंगे? जिला कलेक्टर डॉ. जोगाराम ने 14 जनवरी को मकर संक्रांति और 16 मार्च को शीतलाष्टमी (मेला चाकसू) का अवकाश घोषित किया है...

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जयपुर

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Dinesh Saini

Jan 07, 2020

Makar Sankranti

मकर संक्रांति ( Makar Sankranti ) का पर्व इस बार 15 जनवरी को मनाया जाएगा

जयपुर। मकर संक्रांति ( Makar Sankranti 2020 ) का पर्व इस बार 15 जनवरी को मनाया जाएगा, लेकिन सरकारी अवकाश 14 जनवरी को ही रहेगा। ज्योतिषियों के मुताबिक 14 जनवरी को मध्यरात्रि के बाद संक्रांति की शुरुआत होगी। इस कारण से 15 जनवरी को दिनभर संक्रांति का पुण्यकाल रहेगा। अवकाश 14 जनवरी को होने के कारण लोग असमंजस में हैं कि वे 15 को त्योहार कैसे मनाएंगे? जिला कलेक्टर डॉ. जोगाराम ने 14 जनवरी को मकर संक्रांति और 16 मार्च को शीतलाष्टमी (मेला चाकसू) का अवकाश घोषित किया है। शीतलाष्टमी ( sheetala ashtami 2020 ) पर घरों में बासी पकवानों का शीतला माता को भोग लगाया जाता है और चाकसू में शील की डूंगरी स्थित शीतला माता के मंदिर में मेला भरता है।

संक्रांति 14 की बजाय 15 को क्यों ?
दान पुण्य और पतंगबाजी का पर्व मकर सक्रांति इस बार 14 जनवरी के साथ माघ कृष्ण पंचमी 15 जनवरी, बुधवार को मनाया जाएगा। ज्योतिषविदों के मुताबिक 14 जनवरी को मध्यरात्रि के बाद रात 2.08 बजे सक्रांति की शुरुआत होगी। इस कारण से 15 जनवरी को दिनभर सक्रांति का पुण्यकाल रहेगा। शास्त्रानुसार मकर सक्रांति का पुण्यकाल का समय सक्रांति लगने के समय से 6 घंटे 24 मिनट पहले और सक्रांति लगने के 16 घंटे बाद तक माना गया है। पुण्यकाल के समय दिन का समय होना जरूरी बताया है जो इस बार 15 जनवरी को रहेगा। अत: शास्त्रानुसार यह पर्व 15 जनवरी को मनाया जाना शास्त्रसम्मत है। राजधानी में 14 और 15 जनवरी को पतंगबाजी में शहरवासी मशगूल रहेंगे। 15 जनवरी को पुण्यकाल का होना सभी राशि के जातकों के लिए विशेष फलदायी रहेगा। वहीं इस दिन उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र, सौभन योग के साथ सिंह और कन्याराशि का चंद्रमा रहेगा। इस दिन पवित्र नदी में स्नान व दान का विशेष महत्व है।

इसलिए बदलती हैं संक्रांति की तारीखें
शर्मा ने बताया कि 16वीं, 17 वीं शताब्दी में 9, 10 जनवरी को 17वीं, 18 वीं शताब्दी में 11, 12 जनवरी को, 19वीं, 20 वीं शताब्दी में 13, 14 जनवरी को 20वीं, 21 वीं शताब्दी में 14 और 15 जनवरी को सक्रांति का पर्व मनाया जाने लगा। पृथ्वी सूर्य के चारों ओर घूमते हुए 4 विकला पीछे होती है। इसे अयनांश भी कहते हैं। अयनांश धीरे-धीरे बढ़ता है। वर्तमान में यह 23 डिग्री 56 विकला है। सूर्य के देरी से मकर में प्रवेश करने के कारण ही संक्रांति की तारीखें भी परिवर्तित होती रहती हैं। इसलिए संक्रांति कभी 14 तो कभी 15 जनवरी को आती है। 2021 में संक्रांति फिर से 14 जनवरी को आएगी। सन् 2086 के बाद पूर्ण रूप से मकर संक्रांति 15 जनवरी को मनाई जाएगी।