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15 से मलमास शुरू, मांगलिक कार्यों पर लगेगा विराम

कोराना काल के मध्यनजर गत देवउठनी एकादशी के अबूझ सावे पर पिछले वर्षो के की तुलना में सबसे ज्यादा शादी समारोह हुए तथा इस बीच चारो तरफ बैड-बाजों और शहनाई से इलाका गूंजायमान रहा। इस दौरान सौहार्द वातावरण के साथ कई जोड़े परिणय सुत्र में बंधे। इस साल का आखिरी सावा 13 दिसंबर को है। सूर्य के धनु राशि में प्रवेश करने के साथ ही 15 दिसंबर से मलमास शुरू हंंो जाएगा। इसके कारण मांगलिक कार्यों पर विराम लग जाएगा। मलमास 14 जनवरी 2022 तक रहेगा।

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15 से मलमास शुरू, मांगलिक कार्यों पर लगेगा विराम

15 से मलमास शुरू, मांगलिक कार्यों पर लगेगा विराम

जयपुर। कोराना काल के मध्यनजर गत देवउठनी एकादशी के अबूझ सावे पर पिछले वर्षो के की तुलना में सबसे ज्यादा शादी समारोह हुए तथा इस बीच चारो तरफ बैड-बाजों और शहनाई से इलाका गूंजायमान रहा। इस दौरान सौहार्द वातावरण के साथ कई जोड़े परिणय सुत्र में बंधे। इस साल का आखिरी सावा 13 दिसंबर को है। सूर्य के धनु राशि में प्रवेश करने के साथ ही 15 दिसंबर से मलमास शुरू हंंो जाएगा। इसके कारण मांगलिक कार्यों पर विराम लग जाएगा। मलमास 14 जनवरी 2022 तक रहेगा। ऐसे में अब आगामी 14 जनवरी 2022 के बाद से ही मांगलिक कार्य शुरू होंगे।

पंडित सत्यनाराण पटेल ने बताया कि सूर्य जब धनु राशि में प्रवेश करते हैं, उस मास को धनु मलमास कहा जाता है। मलमास में शुभ मांगलिक कार्य वर्जित रहते हैं। मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि से 15 दिसंबर से मलमास प्रारंभ हो जाएगा। ये पौष शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि 14 जनवरी 2022 तक रहेगा। इस दौरान गृह प्रवेश, यज्ञोपवीत, शादी, सगाई आदि कार्य करना वर्जित है। हालांकि इस दौरान आध्यामिक अनुष्ठान कर्म बढ़ जाता है और दान-पुण्य, धार्मिक स्थलों पर तीर्थ स्नान, ग्रह दोष उपाय आदि अनुष्ठान कर सकते है। बता दे कि वर्ष 2021 का अंतिम सावा 13 दिसम्बर सोमवार को है। मार्गशीर्ष र्शुक्ल पक्ष की द्वाद्वशी बुधवार से मलमास प्रारम्भ हो जाएगा। जो आगामी एक माह तक पौष शुक्ल पक्ष द्वाद्वशी 14 जनवरी 2022 तक रहेगा। पंडित सत्यनारायण के अनुसार इस बीच सभी मांगलिक कार्य वर्जित रहेंगे। पौराणिक धार्मिक मान्यता के अनुसार खरमास में सूर्य धीमी गति से चलता है। इसलिए इस दौरान किए गए किसी भी मांगलिक कार्य का शुभ फल नहीं मिलती है।

गुरु की आराधना फलदायी
जानकारों के अनुसार सूर्य जब धनु राशि में प्रवेश करता है तथा गुरु की राशि में प्रवेश करता है तब वह भी अपने गुरु की आराधना में लग जाता है जैसे धनु व मीन राशि दोनों बृहस्पति की है और बृहस्पति ग्रह मण्डल में गुरु के पद पर विराजमान है और सूर्य तथा ग्रहों के राजा भी वर्ष में दो माह अपने गुरु की आराधना करते हैं। अत दिसंबर व 14 मार्च से 14 अप्रेल का समय परस्पर धनु अर्थात मल व मीन अर्थात खर मास से जाना जाता है। इन महिनों में केवल गुरु की आराधना व इष्ट की सेवा करना विशेष फलदायी सिद्ध होता है।

नये साल में 15 जनवरी से सावे फिर शुरू
एक माह बाद सूर्य मकर राशि में प्रवेश करेगा। इस दिन 14 जनवरी 2022 को मकर संक्रांति पर्व मनाया जाएगा है। इस दिन पवित्र नदियों और जलसा्रेतो में स्नान तथा मंदिरों में विग्रह की पूजा-अर्चना के बाद लोगों के दान पुण्य के साथ विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम आयोजित होंगे। इस दिन से सभी प्रकार के मांगलिक कार्य फिर से शुरू होंगे तथा नये साल में 15 जनवरी से फिर सावे शुरू हो जाएंगे।


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