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जिसे मरा मान चुके थे परिवार के लोग, वह सात साल बाद इस हालात में पहुंचा

जिसे मरा मान चुके थे परिवार के लोग, वह सात साल बाद इस हालात में पहुंचा

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wired News

जयपुर
यूपी में रहने वाले एक परिवार के लोग परिवार के जिस सदस्य को मृत समझ चुके थे जब वह जिंदा और स्वस्थ घर लौटा तो खुशी के मारे परिवार के सदस्य उसके गले लगकर घंटों रोते रहे। बहन ने भाई के राखियां बांधी और पिता ने भी बेटे को गले लगा लिया। घटना गंगानगर और यूपी से जुड़ी है। यूपी से सात साल पहले एक युवक घर छोड़कर भाग गया था और उसके बाद वह एनजीओ की मदद से अपने घर पहुंचा है। युवक का नाम इंदर है। वह गंगानगर में अचेत हालात में करीब दो साल पहले मिला था। जब वह पूरी तरह से स्वस्थ हो गया तब जाकर उसने अपने और अपने परिवार के बारे में जानकारी दी।

पिता की पिटाई से परेशान होकर भागा था इंदर
दरअसल सात साल पहले करीब पैंतीस वर्षीय इंदर अपने घर से भाग छूटा था। वह मुजफ्फरनगर के एक गांव तितरा का रहने वाला था। उसका कहना है कि उसके पिता उसकी पिटाई करते थे जिससे वह परेशान था। सात साल पहले जब उसके पिता उसे डांट रहे थे तो वह घर से भाग गया था। उसके बाद कुछ दिन यूपी रहा और उसके बाद वह राजस्थान में आ गया। जब खाने-पीने की समस्या होने लगी तो मांग कर खाने लगा। इंदर ने काफी साल तक खानबदोष जीवन जिया और करीब दो साल पहले अप्रैल, 2016 में बीकानेर के रानी बाजार क्षेत्र से इन्दर को बदहवास स्थिति में अपना घर आश्रम, बीकानेर में भर्ती किया गया था, जहाँ से इसे सितम्बर, 2017 में श्रीगंगानगर के अपना घर आश्रम में भेजा गया। वहां अपना घर आश्रम, श्रीगंगानगर के अध्यक्ष राजेन्द्र लोहिया, पी. नागपाल, भागीरथ ने करीब डेढ़ साल तक इंदर की देखभाल की। कुछ सप्ताह पहले जब वह पूरी तरह से स्वस्थ हो गया तो आश्रम के लोगों ने उससे उसके परिवार के बारे में जानकारी जुटाई।

रंग लाया लॉस्ट फाउंड पर्सन अभियान
अपना घर संस्था के संचालकों ने इंदर के परिवार के बारे में जानकारी जुटाने की कोशिश सोशल मीडिया के जरिए करने चाही। इस प्रयास में सोशल मीडिया पर चल रहे लॉस्ट फाउंड पर्सन अभियान के संचालक राहुल शर्मा से बातचीत हुई। बाद में अपना घर संस्था और लॉस्ट फाउंड पर्सन अभियान से जुड़े लोगों ने उत्तर प्रदेश समेत अन्य राज्यों में अभियान से जुड़े लोगों से इसकी चर्चा की। आखिर उत्तर प्रदेश निवासी मानव अंकुर प्रकाश के प्रयास रंग लाये। मानव अंकुर प्रकाश ने इंदर के परिवार की तलाश की। इंदर की बहन को इस बारे में जानकारी दी और बाद में दो दिन पहले इंदर की बहन गंगानगर स्थित अपना घर संस्था पहुंची।