भारत सरकार और राजस्थान सरकार की गलत नीतियों के विरोध में राजस्थान खाद्य पदार्थ व्यापार संघ के आह्वान पर मंगलवार को चौथे दिन भी राज्य की 247 मंडियों में कारोबार ठप रहा। खाद्य पदार्थ व्यापार संघ के मुताबिक बन्द के कारण राज्य के व्यापारियों का 8000 करोड़ रुपए का व्यापार प्रभावित हुआ, वहीं राज्य सरकार का 300 करोड़ रुपए के करीब राजस्व प्रभावित होने की आशंका है और राज्य के व्यापारियों का 160 करोड़ रुपए के मुनाफे का नुकसान हुआ है। कल राजधानी मण्डी (कूकरखेड़ा), जयपुर में आयोजित धरने में राजस्थान खाद्य पदार्थ व्यापार संघ के अध्यक्ष बाबू लाल गुप्ता ने व्यापारियों को कहा कि बुधवार को राज्य सरकार की ओर से कृषि मंत्री प्रभुलाल सैनी ने व्यापारियों को वार्ता के लिए बुलाया है, जिसके बाद अगर वार्ता सफल नहीं होती है तो पांच सितम्बर को पुन: सभी व्यापारी जयपुर में एकत्रित होंगे और आगे के आन्दोलन की रूपरेखा तय की जाएगी और अनिश्चितकालीन व्यापार बन्द का निर्णय लिया जा सकेगा। राज्य और भारत सरकार आड़त और आड़तिया को बिल्कुल खत्म करना चाहती है, इसलिए हमें तब तक इनका सामना करना है, जब तक वे इस कानून को खत्म नहीं करती है और समर्थन मूल्य पर खरीद की जाने वाली सभी जिंसों पर आड़त नहीं देती है। गुप्ता ने बताया कि 5 दिन बन्द के कारण और बीच में जन्माष्टमी के कारण व्यापारियों को बहुत घाटा उठाना पड़ेगा। गुप्ता ने बताया कि मंडियों के बंद रहने से तकरीबन 70 हजार व्यापारी, 3.5 लाख मजदूर और पल्लेदार काम नहीं कर रहे हैं। हालांकि जानकारों का कहना है कि आज की वार्ता के बाद हड़ताल खत्म होने की संभावना है।