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सांसद हनुमान बेनीवाल का ‘सवाल’, केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत का ‘जवाब’, और हो गया नया और बड़ा ‘खुलासा’!

Mangarh Dham Controversy : मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने पर संसद से जयपुर तक गरमाई राजनीति, नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल के सवाल पर केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत के जवाब के बाद कांग्रेस नेता नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली का भाजपा पर बड़ा हमला।
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Hanuman Beniwal and Gajendra Singh Shekhawat - File PIC

राजस्थान के बांसवाड़ा स्थित मानगढ़ धाम एक बार फिर चर्चा में है। इस बार भी चर्चा का विषय बना है मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने का मुद्दा। दरअसल, इसी मुद्दे के संबंध में राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) से नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल ने लोकसभा में एक सवाल लगाया था, जिसके जवाब में राजस्थान से ही आने वाले केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने केंद्र सरकार की स्थिति साफ़ कर दी है। शेखावत ने साफ़ किया कि मानगढ़ धाम 'प्राचीन स्मारक एवं पुरातात्विक स्थल एवं अवशेष अधिनियम, 1958' के तहत राष्ट्रीय महत्व का स्मारक घोषित करने के योग्य नहीं है। इधर, केंद्र सरकार के इस जवाब और खुलासे के बाद RLP और कांग्रेस ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) तथा केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।

संसद में सवाल-जवाब से बड़ा खुलासा

संसद के मानसून सत्र के दौरान सोमवार को RLP सांसद हनुमान बेनीवाल ने लोकसभा में मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक का दर्जा देने और इसके विकास को लेकर लिखित प्रश्न पूछा था।

केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने अपने लिखित जवाब में दो प्रमुख बातें साफ कीं-

मानकों पर खरा नहीं: मानगढ़ धाम वर्तमान पुरातात्विक और स्मारक अधिनियम के तय मानकों के अनुसार राष्ट्रीय महत्व का स्मारक घोषित किए जाने योग्य नहीं पाया गया है।

कोई प्रस्ताव विचारधीन नहीं: फिलहाल केंद्र सरकार के पास मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने का ऐसा कोई प्रस्ताव लंबित या विचाराधीन नहीं है।

'इमारतों से नहीं, बलिदान से तय हो ऐतिहासिक महत्व'

केंद्र सरकार के जवाब पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए सांसद हनुमान बेनीवाल ने सरकार पर जनजातीय समाज के सबसे बड़े बलिदान स्थल की उपेक्षा करने का आरोप लगाया।

बेनीवाल ने कहा, "मानगढ़ धाम कोई साधारण पत्थरों या इमारतों का पुरातात्विक स्थल नहीं है, बल्कि यह राजस्थान, गुजरात और मध्य प्रदेश सहित पूरे देश के भील-आदिवासी समाज की अस्मिता, स्वतंत्रता चेतना और सर्वोच्च बलिदान का प्रतीक है। सन 1913 में जलियांवाला बाग से भी पहले अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ लड़ते हुए हजारों आदिवासी यहां शहीद हुए थे। इतिहास का मूल्यांकन केवल पुरानी इमारतों से नहीं, बल्कि उस माटी पर बहे लहू से होना चाहिए।"

बेनीवाल ने मांग की कि केंद्र सरकार मानगढ़ धाम के लिए विशेष 'राष्ट्रीय स्मृति एवं जनजातीय गौरव संरक्षण योजना' बनाए और इस पवित्र स्थल को राष्ट्रीय स्मारक का दर्जा दे।

कांग्रेस आक्रामक, दागे 3 तीखे सवाल

केंद्र के इस खुलासे के बाद राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता टीकाराम जूली ने भाजपा सरकार पर आदिवासियों के साथ 'विश्वासघात' का आरोप लगाते हुए तीखा हमला बोला।

टीकाराम जूली ने कहा, आदिवासी समाज के साथ भाजपा का सबसे बड़ा विश्वासघात सामने आ गया है। केंद्र सरकार ने संसद में कह दिया कि मानगढ़ धाम राष्ट्रीय स्मारक बनने के योग्य ही नहीं है। जबकि यह वही मानगढ़ है जहां 1913 में गोविंद गुरु के नेतृत्व में जुटे सैकड़ों आदिवासियों ने अंग्रेजी गोलियों के सामने सीना तान दिया था, यह आदिवासियों का जलियांवाला बाग है। प्रधानमंत्री जी यहां आकर बड़े-बड़े वादे कर गए, भाजपा ने संकल्प पत्र में इसे भव्य ट्राइबल डेस्टिनेशन बनाने का वादा किया, और नतीजा यह निकला कि इसे स्मारक की पात्रता से ही बाहर कर दिया गया।''

नेता प्रतिपक्ष ने कहा, 'सबसे बड़ा सवाल यह है कि यह इनकार उस पर्यटन मंत्रालय से आया है जिसके मंत्री राजस्थान के ही गजेंद्र सिंह शेखावत हैं। जबकि 2022 में राष्ट्रीय स्मारक प्राधिकरण के तत्कालीन अध्यक्ष तरुण विजय ने स्वयं यह सिफारिश की थी और रिपोर्ट अर्जुन राम मेघवाल को सौंपी थी। यानी भाजपा के अपने लोगों ने सिफारिश की और भाजपा की ही सरकार ने ठुकरा दी।''

टीकाराम जूली ने अपनी प्रतिक्रिया में राजस्थान के केंद्रीय मंत्री और सभी भाजपा सांसदों से तीन सवाल पूछे-

  1. आपने आदिवासी समाज की भावनाओं के लिए केंद्र में एक शब्द भी क्यों नहीं कहा?
  2. जब सिफारिश आपके अपने प्राधिकरण अध्यक्ष ने की थी, तो चार साल फाइल क्यों दबी रही?
  3. संकल्प पत्र का ट्राइबल डेस्टिनेशन वाला वादा कब पूरा होगा?

आगामी स्थानीय चुनावों में उठेगा मुद्दा!

राजस्थान में आगामी पंचायती राज और नगरीय निकाय चुनावों से ठीक पहले मानगढ़ धाम पर केंद्र सरकार के इस रुख ने विपक्ष को एक बड़ा राजनीतिक हथियार दे दिया है। विशेषकर दक्षिणी राजस्थान के वागड़ और मेवाड़ अंचल (बांसवाड़ा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़, उदयपुर) में जहां जनजातीय आबादी का बाहुल्य है, वहां इस मुद्दे पर सियासत गर्माना तय है।