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मजबूत होते बैक्टीरिया, कमजोर होती दवाएं,भारत में मरीजों पर बेअसर हो रहीं कई एंटीबायोटिक दवाएं

एंटीबायोटिक प्रतिरोधक क्षमता से महामारी का डर भारत में मरीजों पर बेअसर हो रहीं कई एंटीबायोटिक दवाएं कई बीमारियों के बढ़ने और महामारी की आशंका

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free treatment in government hospital

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जयपुर

एंटीबायोटिक दवाओं के धड़ल्ले से गलत इस्तेमाल की रिपोर्ट आने के बाद अब भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आइसीएमआर) ने चौंकाने वाला खुलासा किया है। परिषद के मुताबिक, दवा रोधी रोगाणु यानी पैथोजेन की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। इससे उपलब्ध दवाओं की मदद से कुछ संक्रमण का इलाज करना कठिन हो गया है। आइसीएमआर की वैज्ञानिक डॉ. कामिनी वालिया ने कहा कि यदि एंटीबायोटिक के इस्तेमाल में सुधारात्मक उपाय नहीं किए तो एंटीबायोटिक प्रतिरोधक क्षमता भविष्य में महामारी का रूप ले सकती है।

आइसीएमआर की रिपोर्ट के अनुसार भारत में बहुत सारे मरीजों पर ’कारबापेनेम’ दवा का असर नहीं होगा। इसका कारण यह है कि उन मरीजों के शरीर में इस दवा के प्रति सूक्ष्म जीवाणु रोधक (एंटीमाइक्रोबियल) क्षमता विकसित हो गई है।

शक्तिशाली एंटीबायोटिक दवा ’कारबापेनेम’ आइसीयू में भर्ती निमोनिया और सेप्टिसीमिया के मरीजों को दी जाती है। यह रिपोर्ट डॉ. वालिया की अगुवाई में एक जनवरी से 31 दिसंबर 2021 के बीच आंकड़ों के विश्लेषण के आधार पर तय की गई है। देश में सूक्ष्म जीवाणु रोधक क्षमता (एएमआर) पर आइसीएमआर ने यह पांचवीं विस्तृत रिपोर्ट जारी की है। विशिष्ट एंटीबायोटिक दवाओं के लिए वैक्टीरिया की संवेदनशीलता में कमी क्लेबसिएला न्यूमोनिया के साथ भी देखी गई। यह 2016 में 65 फीसदी से घटकर 2020 में 45 फीसदी जबकि 2021 में 43 फीसदी रह गई।

मजबूत होते बैक्टीरिया, कमजोर होती दवाएं

ई-कोलाई - इस बैक्टीरिया के संक्रमण में आईमिपेनम दवा दी जाती है। यह 2016 में 14 प्रतिशत मामलों में अनुपयोगी मिल रही थी, 2021 में ऐसे मामले 36% पहुंच गए।

क्लेबसियेला निमोनिया - 2016 में इस बैक्टीरिया के संक्रमण के 65 प्रतिशत मामलों में ही एंटीबायोटिक्स प्रभावशाली थे, 2020 में यह मामले 45 और 2021 में 43 प्रतिशत ही रह गए।

एसिनेटोबेक्टर बौमेनिआई - इस बैक्टीरिया से संक्रमित 87.5% मरीजों में कार्बापेनम दवा अनुपयोगी साबित हुई तो माइनोसाइक्लिन 50% मामलों में काम की नहीं रही। कोलिस्टिन के लिए यह रजिस्टेंस प्रतिशत 50 से अधिक था।

स्यूडोमोनास एरुजिनोसा - यह बैक्टीरिया खून, फेफड़ों (निमोनिया) व अन्य अंदरुनी अंगों में किसी सर्जरी के बाद संक्रमण करता है। इसमें लगभग सभी एंटीबायोटिक्स के प्रति प्रतिरोधक क्षमता बढ़ी।

स्टेफलोकोकस ऑरियस - त्वचा पर फोड़े-फुंसी से लेकर यह बैक्टीरिया निमोनिया, एंडोकार्डिटिस यानी हृदय की भीतरी परत में सूजन व ऑस्टियोमाइलाइटिस यानी हड्डियों में संक्रमण भी करता है।

एंटिरोकोकस - इस बैक्टीरिया ने भी दवाओं के प्रति तेजी से प्रतिरोध हासिल किया और बीते वर्षों में इसके संक्रमण का इलाज मुश्किल हुआ है।

एंटी फंगल रजिस्टेंस भी बढ़ा - रिपोर्ट ने एंटी-फंगल रजिस्टेंस की भी पुष्टि कर बताया कि कोविड-19 में इसके कई मामले मिले। इनमें सी पैराप्सिसलोसिस व सी ग्लाबर्टा प्रमुख हैं जो एंटी फंगल दवा फ्लूकोनाजोल के लिए प्रतिरोध हासिल कर रहे हैं। आने वाले वर्षों में इनकी गहन निगरानी की जरूरत रिपोर्ट ने बताई।