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कांग्रेस सरकार- केन्द्र सरकार के बीच रहे कई विवाद

- जल जीवन मिशन को लेकर रहा सबसे ज्यादा विवाद - जीएसटी के प्रदेश के हिस्से के तीन हजार करोड़ भी चल रहे बकाया

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जयपुर।

प्रदेश में कांग्रेस सरकार के गठन से लेकर अब तक चार साल के कार्यकाल में केन्द्र सरकार के साथ कई विवाद भी खड़े हुए। सबसे ज्यादा विवाद ईआरसीपी, जल जीवन मिशन, केन्द्रीय योजनाओं का हिस्सा बढ़ाने और जीएसटी की प्रदेश की हिस्सा राशि को लेकर हुआ। वहीं, कांग्रेस सरकार की ओर से प्रदेश में लागू की गई ओल्ड पेंशन स्कीम पर भी केन्द्र सरकार की राय खिलाफ ही आई। इसे लेकर काफी विवाद भी
हुआ।

राज्य में 2018 से पहले भाजपा सरकार ने पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना ( ईआरसीपी ) बनाकर उसे राष्ट्रीय दर्जा देने का प्रस्ताव केन्द्र को भेजा। कांग्रेस सरकार ने आते ही तेरह जिलों की इस परियोजना को लेकर लगातार केन्द्र पर निशाना साधा। इसे कांग्रेस ने राजनीति मुद्दा बना दिया। ईआरसीपी को लेकर चार साल से कांग्रेस सरकार केन्द्र पर लगातार निशाना साध रही है। केन्द्र सरकार ने अभी तक ईआरसीपी योजना को मंजूरी नहीं दी है। इसी तरह जल जीवन मिशन की हिस्सा राशि को लेकर भी विवाद बना रहा। केन्द्र ने जल जीवन मिशन की राशि आधी-आधी कर दी। इसे लेकर कांग्रेस सरकार मुखर रही और लगातार यह मांग करती रही कि रेगिस्तानी क्षेत्र होने की वजह से केन्द्र योजना का 90 प्रतिशत पैसा दे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
इसी तरह जीएसटी मुआवजे की राशि को लेकर भी राज्य सरकार कई बार केन्द्र के समक्ष मामला उठा चुकी है। सूत्रों के अनुसार राज्य की जीएसटी मुआवजे की 3 हजार 7 करोड़ रुपए की राशि बकाया चल रही है।

इसी तरह करीब पचास सड़कों को नेशनल हाइवे घोषित करने के प्रस्तावों को लेकर भी केन्द्र और राज्य के बीच रार चल रही है।वहीं, केन्द्र सरकार के कई मंत्री भी राज्य की कांग्रेस सरकार पर सहयोग नहीं करने के आरोप लगा चुके हैं। जल जीवन मिशन का मामला हो या आंतरिक सुरक्षा का। राज्य की कांग्रेस सरकार केन्द्र के निशाने पर ही रही है।
राज्य कोटे से मंत्री तीन, सबसे ज्यादा निशाने पर शेखावत
केन्द्र सरकार में राज्य कोटे से तीन मंत्री बने हुए हैं। इनमें एक केबिनेट मंत्री हैं, बाकी दो राज्यमंत्री। लेकिन, राज्य की कांग्रेस सरकार के निशाने पर सबसे ज्यादा केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ही रहे हैं। जल जीवन मिशन का मामला हो या फिर ईआरसीपी का। शेखावत लगातार सरकार के निशाने पर रहे हैं। इसी तरह फोन टेपिंग के मामले में भी शेखावत पर लगातार निशाना साधा गया।