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Humanity Hero Rajasthan: लावारिस शवों की वारिस बनी माया देवी, अब तक 10,000 शवों का कर चुकी हैं अंतिम संस्कार

Maya Devi, Caretaker of Mokshadham: जयपुर। दुनिया में ऐसा कोई काम नहीं,की जो भारतीय नारी शक्ति नहीं कर सकती। इसका जीता जागता उदाहरण राजधानी जयपुर में माया देवी है।

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मोक्षधाम में अंत्येष्टि कार्य में व्यस्त माया देवी, पत्रिका फाइल फोटो

मोक्षधाम में अंत्येष्टि कार्य में व्यस्त माया देवी, पत्रिका फाइल फोटो

Maya Devi, Caretaker of Mokshadham: जयपुर। दुनिया में ऐसा कोई काम नहीं,की जो भारतीय नारी शक्ति नहीं कर सकती। इसका जीता जागता उदाहरण राजधानी जयपुर निवासी माया देवी है। सामान्यतया जो काम पुरुष करते आए हैं उसी काम को यदि कोई महिला करती ​​नजर आए तो आश्चर्य होता है लेकिन माया देवी ने कम उम्र में इस डराने वाले काम का जिम्मा जो संभाला तो आज तक यह सिलसिला अनवरत जारी है। जयपुर में गोपालपुरा बाइपास रोड स्थित त्रिवेणी नगर मोक्षधाम परिसर में माया देवी अपने परिवार संग रहकर जिम्मेदारी का बखुबी निर्वहन कर रही हैं। कई सामाजिक संस्थाओं ने उन्हे इस पुण्य कार्य के लिए सम्मानित भी किया है।

कोरोनाकाल में भी नहीं डिगा विश्वास

माया देवी बताती हैं कि बीते कोरोनाकाल में जब मृतकों के परिजनों ने दाह संस्कार करने से इनकार कर दिया तो उन्होने आगे बढ़कर कई शवों की अंत्येष्टि की। इस दौरान कई शव ऐसे भी आए ​जिनके परिजनों का कोई अता पता नहीं था और सरकारी रिकॉर्ड में जिन्हे लावारिस घोषित किया जा चुका था।

उन शवों की त्रिवेणी नगर मोक्षधाम में अंत्येष्टि पूरे रीति रिवाज के साथ संपन्न कराई गई। माया देवी के अनुसार अब तक वे करीब 10 हजार से ज्यादा शवों की अंत्येष्टि कर चुकी हैं। हालांकि इनमें कितने शव लावारिस थे इसकी तो गिनती भी उन्हे याद नहीं है।

कम उम्र में विवाह, विरासत में मिला काम

मोक्षधाम में शवों की अंत्येष्टि के इस काम को लेकर माया देवी कहती हैं कि वह जो काम कर रही हैं वह समाज सेवा हैं। जब माया देवी जब 6 वर्ष की थी, तब उनके पिताजी का देहांत हो गया था। उनके पिता से ही उन्हें ये काम विरासत में मिला। माया देवी ने अपने पिता के देहांत के बाद यह काम अपनी मां गुलाब देवी के साथ शुरू किया । कम उम्र में विवाह होने के बाद परिवार को भी संभाला।

दो बेटियों का किया विवाह, दो पढ़ रहीं

माया देवी का कहना है कि श्मशान घाट में लावारिस शवों की अंत्येष्टि नि:शुल्क की जाती है। अन्य शवों की अंत्येष्टि आदि से उपार्जित आय से ही उनका घर का खर्च चलता है। परिवार में चार बेटियां हैं जिनमें से दो का विवाह हो चुका है। शेष दो बेटियां कॉलेज स्तर की पढ़ाई कर रही हैं। बेटियों का कहना है कि मां ने जीवन में संघर्ष करके हमें पढ़ाया ​है,अब पढ़ाई पूरी करने के बाद उच्च पद पर अफसर बनने की इच्छा है।

बेटियां नहीं करेंगी यह काम

माया देवी का कहना है कि दोनों बेटियों की पढ़ाई लिखाई पर पूरा ध्यान है। मैंने जीवनभर यह काम किया लेकिन मेरी बेटियां पढ़ लिखकर नाम रोशन करें, बस यही इच्छा है। परिवार के अन्य लोगों से उन्हे कोई सहयोग नहीं मिला। आस पास के रहने वाले बाशिंदों ने जरूर माया देवी की वक्त बेवक्त पर बहुत मदद की है।