
वैज्ञानिकों ने विस्फोट कर जाना पानी में अधिकतम कितनी आवाज हो सकती है
जयपुर.
अमरीका की स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने अब तक की संभवत: सबसे तेज ध्वनि का पता लगाया है। इसके लिए किए प्रयोग में 270 डेसीबल की आवाज रेकॉर्ड की गई जो ध्वनि का उच्चतम मानक बताया जा रहा है। वैज्ञानिकों ने एक्सरे लेजर तकनीक का उपयोग कर पता लगाया है कि पानी और हवा में ध्वनि की गति कैसे प्रभावित होती है। पानी में ध्वनि की आवाज कैसे तेज हो जाती है। शोधकर्ताओं ने ध्वनि का स्तर 270 डेसीबल तक करने के लिए पानी के छोटे से जेट में विस्फोट किया। ये काफी तेज आवाज थी। लेकिन इतनी तेज ध्वनि कैसे हुई? ये सवाल इसलिए है क्योंकि यह अब तक सुना गया अधिकतम ध्वनि स्तर है। वैज्ञानिकों का मानना है कि हवा में ध्वनि की तीव्रता 194 डेसीबल और पानी में 270 डेसीबल से अधिक नहीं हो सकती हैं क्योंकि ध्वनि भी दबाव के आधार पर काम करती है। अधिक दबाव पडऩे पर उसके दोनों छोर आपस से अलग हो जाते हैं। टूट जाते हैं जिस कारण आवाज आती है। टीम ने पाया कि जब ध्वनि की तीव्रता एक निश्चित सीमा से ऊपर चली जाती है तो पानी छोटे वाष्प से भरे बुलबुलों में परिवर्तित होकर कैविटेशन नामक प्रक्रिया में खत्म हो जाते हैं जिसके कारण ही तेज ध्वनि होती है। इसका अर्थ ये भी है कि एक्सरे तरंगों से उत्पन्न ध्वनि का दबाव पानी की सतह से उतनी ही आवाज आती है, जितनी पानी के नीचे से। दूसरी तरफ तापमान के संबंध में ध्वनि की तीव्रता को समझें तो निरपेक्ष शून्य यानी सबसे कम तापमान (माइनस से ऊपर) में भी ध्वति की तीव्रता खत्म हो जाती है क्योंकि वहां ध्वनि के अणु चलना बंद कर देते हैं। वहीं जब किसी चीज को लाखों डिग्री तक गर्म करते हैं तो उसके परमाणु टूटते हैं और तेज ध्वनि निकलती है।
बातचीत में 25 डेसीबल की ध्वनि
हमारी सामान्य बातचीत में 55 डेसीबल की ध्वनि होती है। मनुष्य के लिए 85 डेसीबल से अधिक की ध्वनि नुकसानदायक है। अलार्म घड़ी से 80 डेसीबल जबकि 100 मीटर की दूरी से जेट के उड़ान भरने के दौरान 130 डेसीबल आवाज होती है। रॉक कॉन्सर्ट में 150 डेसीबल तक का शोर होता है।
Published on:
25 May 2019 08:48 pm
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