
विकास जैन
जयपुर। राज्य के निजी मेडिकल कॉलेजों की 50 प्रतिशत सीटों पर सरकारी मेडिकल कॉलेजों के बराबर फीस का नियम लागू करने में राजस्थान सरकार मध्यप्रदेश सहित अन्य राज्यों से पिछड़ गई है। मध्यप्रदेश ने पीजी पाठयक्रमों के लिए यह नियम लागू कर दिया है। जबकि
राज्य ने यह निर्णय फीस निधार्रण कमेटी पर छोड़ दिया है। इस समय पीजी के विभिन्न पाठयक्रमों की कुल 2094 सीटें हैं। जिनमें से 506 सीटें निजी कॉलेजों की है। राज्य में जल्द ही पीजी काउंसलिंग भी शुरू होने वाली है।
नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) की ओर से जारी गाइडलाइन के मुताबिक निजी मेडिकल कॉलेजों में 50 प्रतिशत सीटों पर सरकारी मेडिकल कॉलेजों के बराबर शुल्क होगा। 15 प्रतिशत मैनजमेंट या एनआरआई सीटों के बाद शेष 85 प्रतिशत सीटों में से 42.5 प्रतिशत सीटों पर यह नियम लागू होगा।
राजस्थान में अभी 20 सरकारी मेडिकल कॉलेज हैं, जिनमें से एसएमएस मेडिकल कॉलेज जयपुर, एसपीएमसी मेडिकल कॉलेज जोधपुर, आरएनटी मेडिकल कॉलेज उदयपुर, जेएमसी मेडिकल कॉलेज कोटा और झालावाड़ मेडिकल कॉलेज झालावाड़ में ही पीजी पाठयक्रम संचालित हैं। जिनकी सालाना फीस करीब 20 से 25 हजार रुपए है। राज्य में भी यह नियम लागू होगा तो निजी मेडिकल कॉलेजों को पीजी के लिए यही फीस लेनी होगी। अभी निजी कॉलेजों में इसके लिए लाखों रुपए वसूल किए जाते हैं।
शेष 50 प्रतिशत सीटों का क्या ?
निजी कॉलेजों की 50 प्रतिशत पीजी सीटों पर प्रवेश के मामले में निजी कॉलेजों का तर्क है कि फीस में कटौती का फैसला करने के साथ केन्द्र ने इसकी भरपाई या स ब्सिडी का कोई आदेश नहीं किया है। वहीं, आशंका है कि यह आदेश लागू होने के बाद भरपाई के लिए शेष 50 प्रतिशत सीटों पर निजी कॉलेज मनमाना शुल्क वसूल कर सकते हैं।
राजस्थान में पीजी मेडिकल सीटें
एमडी
सरकारी 969
निजी 300
एमएस
सरकारी 427
निजी 144
एमसीएच
सरकारी 96
निजी 30
डीएम
सरकारी 96
निजी 32
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राज्य में शुल्क तय करने के लिए फीस निधार्रण कमेटी बनी हुई है। जिसकी जल्द ही बैठक होने वाली है। इस बैठक में इसका निर्णय होगा।
वैभव गालरिया, प्रमुख शासन सचिव, चिकित्सा शिक्षा विभाग
Published on:
19 Sept 2022 12:59 pm
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