एक ही दवा, खरीद रही तीन सरकारी ऐजेंसिया, सालाना एक हजार करोड़ की खरीद में चांदी निजी कंपनियों की

दवा खरीद के लिए अलग—अलग सरकारी ऐजेंसियां, सबमें तालमेल का अभाव और कंपनियों का मुनाफा

. आरएमएससीएल हर साल 600 करोड़ तो कानफेड खरीद रहा 200 करोड़ कीमत की दवाइयां, फि भी मरीजों को नहीं मिल रही पूरी दवाइयां
. सिर्फ दवा खरीद के लिए गठित आरएमएससीएल के बावजूद पेंशनर्स के लिए कानफेड को दवा खरीद का जिम्मा, वह हो रहा विफल
. इधर..आरडीपीएल चार साल से ठप

दवा खरीद के लिए सरकारी दवा खरीद के तंत्र को चाहिए 'मंत्र'

By: Vikas Jain

Published: 14 Oct 2021, 10:25 AM IST

विकास जैन

जयपुर. प्रदेश में मरीजों और बुजुर्गो की निशुल्क दवाओं के लिए खरीदी जा रही हजारों करोड़ रुपए की दवा खरीद प्रक्रिया को खुद सरकार ने ही निजी कंपनियों के फायदे का सौदा बना दिया है। एक ओर जहां सरकार सरकारी महकमों में सिंगल विंडो जैसे कदम उठा रही है, वहीं सरकारी दवा खरीद की प्रक्रिया को अलग अलग कई ऐजेंसियों के हवाले कर रखा है। एक ओर निशुल्क दवा योजना के लिए करीब 600 करोड़ रुपए सालाना की दवाएं राजस्थान मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन खरीद रहा है, जो कि सिर्फ दवा खरीद के लिए सरकार की एक मात्र सरकारी निगम है। लेकिन इसके बावजूद करीब 200 करोड़ सालाना दवा खरीद कानफेड के जरिये पेंशनरों के लिए की जा रही है। इससे यह पूरी प्रक्रिया मकड़जाल बनकर रह गई है। जिसका खमियाजा लाखों मरीजों को दवा के लिए परेशान होकर चुकाना पड़ रहा है।

इतना ही नहीं इतनी खरीद के बावजूद अस्पतालों को अपने स्तर पर भी दवाओं की अनुपलब्धता होने पर सीधे आपूर्तिकर्ताओं से लोकल खरीद के जरिये दवा खरीद की छूट दी हुई है। प्रदेश भर के अस्पतालों में इस तरह से भी करीब 200 करोड़ की दवाएं हर साल खरीदे जाने का अनुमान है। इस पूरे मकड़जाल से सरकारी राजस्व को तो नुकसान हो ही रहा है, वहीं मरीजों को भी हर समय पूरी दवाइयां नहीं मिल पा रही है।

लागत पर उपलब्धता और आत्मनिर्भरता के विकल्प को कर दिया ठप्

इन सबके बीच सभी वर्गों के लिए दवा उपलब्धता की एक बड़ी उम्मीद सरकारी क्षेत्र की एक मात्र दवा कंपनी राजस्थान ड्रग एवं फार्मास्यूटिकल लिमिटेड आरडीपील करीब चार साल से बंद है। केन्द्र व राज्य की संयुक्त साझेदारी के इस उपक्रम में केन्द्र की हिस्सेदारी 51 प्रतिशत है और यह जयपुर के वीकेआई औद्योगिक क्षेत्र में स्थित है। इस दवा कंपनी की इतनी दक्ष क्षमता है कि इसे शुरू किया जाए तो सरकार को करोड़ों रुपए की दवाएं लागत पर तो मिलेगी ही, साथ ही दवाओं के मामले में सरकार की आत्मनिर्भरता भी बढ़ जाएगी।
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सरकार ने खुद माना...कोरोना काल में आरडीपीएल की कमी महसूस हुई

प्रदेश में कोरोना काल के दौरान राजस्थान सरकार को सरकारी क्षेत्र की बंद पड़ी एक मात्र कंपनी राजस्थान ड्रग एंड फार्मास्यूटिकल लिमिटेड आरडीपीएल की कमी महसूस हुई। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत भी हाल ही प्रदेश के चार मेडिकल कॉलेजों के शिलान्यास कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मांग रखते हुए कह चुके हैं कि केन्द्र भारत सरकार व राज्य सरकार के इस संयुक्त उपक्रम को देनदारियों से मुक्त करे।

सरकारी शुरू हुई तो निजी कंपनियों को प्रतिस्पर्धा में झुकना पड़ेगा

जयपुर के वीकेआई क्षेत्र में स्थित आरडीपीएल दवा कंपनी आधुनिक मशीनों सहित कई तरह की दवाइयां बनाने के लिहाज से उपयोगी है। कोरोना काल में कई दवाइयों की कमी होने के दौरान इस कंपनी की कमी प्रदेश सरकार को महसूस हुई। उस दौरान भी कई जनप्रतिनिधियों ने इसे शुरू करने की मांग उठाई। इसके लिए राज्य सरकार के विभिन्न स्तर से केन्द्र को पत्र भी भेजे जा चुके हैं। यह कंपनी फिर से शुरू होती है तो राज्य सरकार की दवाओं में आत्मनिर्भरता बढ़ेगी। प्रदेश की निशुल्क दवा योजना की भी कई दवाइयां यह कंपनी उपलब्ध करवा सकती है।

अभी आरडीपीएल में 51 प्रतिशत शेयर भारत सरकार और 49 प्रतिशत राज्य सरकार का

इस कंपनी में भारत सरकार का 51 और राज्य सरकार का 49 प्रतिशत शेयर है। केन्द्र सरकार की कैबिनेट मीटिंग में इस कंपनी को 28 दिसंबर 2016 को बंद कर दिया गया था। इसके बाद 2017—18 व 2019 में केन्द्र सरकार के 51 प्रतिशत शेयर राज्य को हस्तांतरित करने का प्रस्ताव राज्य को दिया गया था।

आरडीपीएल के लिए सरकार की मंशा बड़ी

. राज्य सरकार पहले से केन्द्र को दे चुकी है आरडीपीएल को शुरू करने की पुनरुत्थान योजना
. केन्द्र से बंद पड़ी 300 करोड़ की प्रदेश की एक मात्र सरकारी दवा कंपनी की देनदारियों से मुक्त करने की रखी मांग
. पिछले दिनों ही मुख्यमंत्री निवास पहुंचे केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया से भी रखी आरडीपीएल को शुरू करने की मांग और पुनरुत्थान योजना को केन्द्र से स्वीकृति देने की मांग

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आरडीपीएल को राज्य सरकार शुरू करना चाहती है। इसे चार साल पहले केन्द्र सरकार ने ही बंद किया था। अब मुख्यमंत्री ने पीएम और केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री को भी इसे शुरू करने की स्वीकृति देने के लिए कहा है। राज्य सरकार ने इस कंपनी के पुनरुत्थान की योजना भी केन्द्र को दे दी है। यह शुरू होगी तो दवाओं पर राज्य सरकार की आत्मनिर्भरता बढ़ेगी, पेंशनर के लिए कानफेड से दवा खरीद की व्यवस्था आज से नहीं, बल्कि पुरानी है, जो सरकार का नीतिगत निर्णय है।
रघु शर्मा, चिकित्सा मंत्री

Vikas Jain Reporting
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