
साधारण परिवार के इस व्यक्ति ने कड़ी मेहनत से रोशन किया देश का नाम
इस व्यक्ति का जन्म 1963 में न्यूयॉर्क के ब्रुकलिन में हुआ था। परिवार आर्थिक रूप से मजबूत नहीं था। माता-पिता बहुत ही मेहनती और अनुशासन से घर को चलाया करते थे। जब ये छोटे थे, तभी माता-पिता ब्रुकलिन से नॉर्थ कैरोलीना आ गए थे। पिता ने यही सीखाया कि हर चीज हासिल की जा सकती है, बस कड़ी मेहनत की जरूरत है। पिता ने इनकी रुचि खेल की तरफ बढ़ाई और घर में एक छोटी सी जगह बनाई जहां वे खेलों का अभ्यास किया करते थे। इन्होंने शुरुआती शिक्षा विम्लिंगटन के एम्सली ए लैनी नामक स्कूल से की। यहां उन्होंने बेसबॉल, फूटबॉल खेलों में भाग लिया। इनके खेलों में बेहतर प्रदर्शन को देखते हुए पिता ने प्रेरित किया वे अपनी एक बास्केटबॉल टीम बनाएं। पिता की सलाह पर स्कूल की वर्सिटी बास्केटबॉल टीम में जगह बनाने की कोशिश की लेकिन लंबाई कम होने के कारण इन्हें टीम में जगह नहीं मिली। लेकिन वे निराश नहीं हुए और स्कूल की जूनियर बास्केटबॉल टीम का हिस्सा बनें। यहां इन्होंने खेलों में बहुत ही शानदार प्रदर्शन किया। हालांकि बचपन में वे कई तरह के खेलों में रुचि रखते थे लेकिन स्कूल में दिनों में इन्होंने बास्केटबॉल का ही चुनाव किया और इस खेल के प्रति खुद को समर्पित कर दिया। इस खेल का फायदा यह हुआ कि अगले साल उनकी लंबाई चार इंच तक बढ़ गई और जूनियर टीम में उनके प्रदर्शन को देखते हुए स्कूल की वर्सिटी बास्केटबॉल टीम में उनका चुनाव हो गया।
ओलंपिक में कमाया देश का नाम
अपने कॅरियर में दो बार अमरीकी बास्केटबॉल टीम की तरफ से ओलंपिक में हिस्सा लिया और दोनों बार गोल्ड मैडल जीतकर इतिहास रचा। 1984 और 1994 में उन्होंने दो बार अपनी टीम को गोल्ड मैडल जिताया। 1992 ओलंपिक में ऐसे पहले बास्केटबॉल खिलाड़ी थे, जिन्होंने अपनी टीम के लिए लगातार 8 मैचों में हिस्सा लिया। यह व्यक्ति कोई और नहीं बल्कि विश्वभर में अपने खेलों के लिए प्रसिद्ध अमरीकी बास्केटबॉल खिलाड़ी माइकल जॉर्डन है। इनके कॅरियर में एक समय ऐसा भी आया था, जब बास्केटबॉल में उनकी रुचि कम हो गई थी और इन्होंने बेसबॉल की ओर ध्यान लगाया। लेकिन कुछ समय के बाद उन्हें अहसास हुआ कि बास्केटबॉल की उनका पैशन हैं और फिर उन्होंने बास्केटबॉल को व्यावसायिक खेल के तौर पर आगे बढ़ाया। वर्ष 2003 में माइकल ने खेलों को हमेशा के लिए अलविदा कहा। माइकल बास्केटबॉल के पहले ऐसे खिलाड़ी है, जिनके नाम 40 वर्ष की उम्र में खेलते हुए 40 पॉइंट, जितने रिकॉर्ड दर्ज हैं।
Published on:
19 Apr 2020 04:51 pm
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