
खाद्य विभाग के पोर्टल पर शिकायत
विकास जैन
जयपुर। मिलावट रोकथाम कानून को मजबूत करने के लिए चार साल में कई वादे कर चुकी राज्य सरकार तीन साल पहले विधानसभा में पारित मिलावट कानून को अब तक भी लागू नहीं करवा पाई है। अब दिवाली का त्योंहार नजदीक है और एक बार फिर खाद्य सुरक्षा अधिकारी कमजोर कानून के सहारे ही बाजार में निकलेंगे और मिलावटखोरों को आंख दिखाकर लौटने के अलावा ज्यादा कुछ नहीं कर पाएंगे। यह हालात तो तब है जबकि सरकार मिलावट रोकने के लिए तंत्र में बदलाव कर खाद्य सुरक्षा निदेशालय की स्थापना कर चुकी है। लेकिन वह भी यह कानून लागू करवा पाने में अब तक नाकामयाब ही रहा है। जबकि मिलावट के खिलाफ कार्यवाहियां सरकार की प्राथमिकता में है और यह फ्लैगशिप योजना की तरह मानी गई है।
मिलावटखारों के हौंसले बुलंद होने का मुख्य कारण कमजोर कानून और कमजोर कार्यवाहियां रही हैं। ऐसी स्थितियों को देखते हुए राज्य सरकार ने विधानसभा में भी मिलावट को गैर जमानती अपराध घोषित कर देश भर में नजीर पेश करने का दावा किया था, लेकिन ना कानून मजबूत हुआ और ना ही मिलावट को गैर जमानती अपराध घोषित किया गया है। राजस्थान की खाद्य सामग्रियों में करीब 18 प्रतिशत मिलावटी और इनमें भी करीब 15 प्रतिशत जानलेवा हैं। पिछले सालों के दौरान लिए गए सैंपलों की रिपोर्ट में यह तथ्य सामने आया है।
विभागीय कमाई के प्रावधान ज्यादा मजबूत
विभाग की टीमे नमूने लेती है। मिलावट पाए जाने वाले मामले न्यायालय में पेश किए जाते हैं। अब तक भी फास्ट ट्रेक कोर्ट नहीं होने से ये मामले लंबे समय तक चलते हैं और उसके बाद भी सजा के प्रावधान बेहद कमजोर हैं। पैनल्टी से विभाग को तो कमाई हो रही है, लेकिन मिलावटखोरो की सेहत पर कोई असर नहीं पड़ रहा।
नए कानून के प्रावधान
- आईपीसी की धारा 272 से 276
- अपराध गैर जमानती, अनसेफ श्रेणी के नमूनों वाले मिलावटखोरों को आजीवन कारावास तक की सजा
- अमानक दवाइयां भी शामिल
- नए प्रावधान लागू होने पर पुलिस भी अपने स्तर पर मिलावट के मामलों में प्रसंज्ञान ले सकेगी।
- सातों संभागीय मुख्यालयों पर मिलावट के मामलों की सुनवाई के लिए फास्ट ट्रेक अदालते, इससे समय पर मामलों का निस्तारण होगा और मिलावटखोरों पर त्वरित कार्यवाही हो सकेगी।
Published on:
05 Oct 2022 12:43 pm
बड़ी खबरें
View Allजयपुर
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
