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environmental protection: खनन क्षेत्र का दौरा, वृक्षारोपण पर दिया जोर

प्रदेश के माइंस पट्टाधारकों से खान ( Mining) सुरक्षा मानकों की शत-प्रतिशत पालना सुनिश्चित हो, खान मालिक खनन ( mines ) क्षेत्र में अधिक से अधिक वृक्षारोपण ( tree plantation ) और पौधारोपण करें, ताकि पर्यावरण संरक्षण ( environmental protection ) में भागीदारी निभाई जा सके।

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environmental protection: खनन क्षेत्र का दौरा, वृक्षारोपण पर दिया जोर

environmental protection: खनन क्षेत्र का दौरा, वृक्षारोपण पर दिया जोर

जयपुर। अतिरिक्त मुख्य सचिव माइंस, पेट्रोलियम व ऊर्जा डॉ. सुबोध अग्रवाल ने प्रदेश के माइंस पट्टाधारकों से खान सुरक्षा मानकों की शत-प्रतिशत पालना सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि खान मालिक खनन क्षेत्र में अधिक से अधिक वृक्षारोपण और पौधारोपण करें, ताकि पर्यावरण संरक्षण में भागीदारी निभाई जा सके।
एसीएस डॉ. सुबोध अग्रवाल शुक्रवार को जोधपुर के सूरसागर के पास फिदूसर सेंडस्टोन क्वारी खनन क्षेत्र का निरीक्षण कर रहे थे। उन्होंने निरीक्षण के दौरान सेंडस्टोन खनन कार्य, पत्थर का उपयोग, ऑवर वर्डन का निस्तारण, बाजार में मांग और आपूर्ति की स्थिति, श्रमिकों के लिए सुरक्षा मानकों का उपयोग, स्वास्थ्य सुविधा, परिवहन, तुलाई सहित सभी बिन्दुओं पर विस्तार से जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों से भी खनन क्षेत्रों का निरीक्षण करने, सुरक्षा मानकों की पालना सुनिश्चित कराने और वृक्षारोपण व पौधारोपण कार्य करवाने को कहा।
डॉ. अग्रवाल ने बताया कि फिदूसर के सेंडस्टोन का उपयोग उम्मेद पैलेस, उच्च न्यायालय सहित महत्वपूर्ण बिल्डिंगों में किया गया है और इसी कारण से इसकी देश-दुनिया में पहचान व मांग है। उन्होंने बताया कि इस पत्थर का एलिवेशन में प्रमुखता से उपयोग किया जाता है। उन्होंने खनन प्रक्रिया व इससे संबंधित आवश्यक बारीकियों को समझा। खनन पट्टाधारी हेमंत सांखला व सुभाष गहलोत ने बताया कि सेंड स्टोन के खनन में गैर-विस्फोटक क्रेकिंग पाउडर के उपयोग, वायर शा मशीन व अन्य आधुनिकतम तकनीक मशीनों की जानकारी दी। गौरतलब है कि एसीएस माइंस डॉ. सुबोध अग्रवाल ने पिछले दिनों बीकानेर संभागीय बैठक के बाद भी वहां के पास के खनन क्षेत्रों का दौरा कर बारीकी से जानकारी ली और अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने अवैध खनन, परिवहन और भण्डारण पर सख्ती से कार्यवाही करने के निर्देश देने के साथ ही अधिकारियों को फील्ड में सक्रिय रहने पर जोर दिया।