
प्रदेश में खनन माफिया अवैध खनन में ही नहीं, अवैध खनन पर लगने वाली पेनल्टी में भी राज्य सरकार के पसीने छुड़ा रहा है। सरकारी सख्ती पर कार्रवाई कर पेनल्टी (जुर्माना) भी लगाई जाती है और पेनल्टी को लेकर वाहवाही भी खूब लूटी जाती है, लेकिन इसकी वसूली को लेकर खान विभाग चुप है। सरकार सख्ती कर अवैध खनन माफिया पर बकाया चल रहे सैकड़ों करोड़ रुपए वसूली कराए तो प्रदेश के विकास में बड़ी मदद मिल सकती है। खान विभाग का जितना सालाना राजस्व है, उसकी करीब 20 फीसदी पेनल्टी तो अवैध खनन माफिया पर ही बकाया चल रही है। सरकार को खनन से सालाना करीब 7600 करोड़ रुपए आय होती है, लेकिन इसका करीब 20 फीसदी 1457 करोड़ तो खनन माफिया पर पेनल्टी का बकाया है। हाल ही मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के निर्देश पर चलाए गए पन्द्रह दिवसीय विशेष अभियान में लगाई गई 368 करोड़ की पेनल्टी में से भी मात्र 33 करोड़ ही वसूले जा सके हैं।
प्रदेश में अवैध खनन के 102491 मामले लंबित चल रहे हैं। इनमें 2234.13 करोड़ की पेनल्टी लगाई गई हैं। इसमें से 776.25 करोड़ की वसूली हो चुकी है और अभी तक 1457.88 करोड़ रुपए बकाया है। बड़ी बात यह है कि जो माफिया पर कार्रवाई हुई है, वह 80 फीसदी मामले बजरी के अवैध खनन से संबंधित हैं।
यों बकाया चल रही पेनल्टी
खान विभाग ने बकाया पेनल्टी को तीन भागों में बांटा हुआ है। एक हिस्सा वह है जो बरसों से पेनल्टी का अवैध खनन माफिया पर बकाया चल रहा है। वह पेनल्टी करीब 636 करोड़ बकाया है। इसके अलावा वर्तमान पेनल्टी भी 485 करोड़ नहीं वसूली जा सकी है। इसके अलावा 335 करोड़ बकाया पेनल्टी मुख्यमंत्री भजनलाल के सत्ता संभालते ही चलाए गए पन्द्रह दिवसीय अभियान की है।
वर्तमान पेनल्टी बकाया
9553 मामले दर्ज
582.82 करोड़ पेनल्टी लगाई
97.03 करोड़ पेनल्टी वसूली
458.79 करोड़ रुपए बकाया पेनल्टी
खान विभाग की अब तक बकाया
102491 मामले दर्ज
2234.13 करोड़ पेनल्टी लगाई
776.25 करोड़ पेनल्टी वसूली
1457.88 करोड़ बकाया पेनल्टी
पुरानी बकाया पेनल्टी
90688 मामले दर्ज
1282.78 करोड़ मामले दर्ज
646.10 करोड़ रुपए पेनल्टी वसूली
636.68 करोड़ रुपए बकाया पेनल्टी
सरकार सख्ती दिखाए तो ही वसूली
1457 करोड़ की वसूली को लेकर राज्य सरकार के स्तर पर कार्रवाई को लेकर रणनीति बने तब ही माफिया से वसूली संभव है। इसकी वजह यह भी है कि इस कारोबार में ऊंची पहुंच वाले ज्यादा लोग हैं।
Published on:
12 May 2024 03:48 pm
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