
Mokshada Ekadashi Mokshadayini Ekadashi Vaikuntha Ekadashi 2020 Date
जयपुर. साल 2020 की आखिरी एकादशी 25 दिसंबर को आएगी। मार्गशीर्ष यानि अगहन माह के शुक्लपक्ष की इस एकादशी को मोक्षदा एकादशी, मोक्षदायिनी एकादशी या वैकुंठ एकादशी भी कहते हैं। इस एकादशी का व्रत कर भगवान विष्णु की पूजा से मोक्ष की प्राप्ति होती है। व्रत रखनेवालों को व्रत कथा जरूर सुननी चाहिए।
ज्योतिषाचार्य पंडित सोमेश परसाई बताते हैं कि श्रीकृष्ण ने अर्जुन को श्रीमद्भगवतगीता का उपदेश इसी तिथि पर दिया था। यही कारण है कि इस दिन गीता जयंती भी मनाई जाती है। इस दिन भगवान विष्णु, श्रीकृष्ण की पूजा करने के साथ ही श्रीमद्भागवत गीता का पाठ भी करना चाहिए। याद रखिए कि विष्णुजी की विधि-विधान से पूजा करने पर ही उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है।
इस दिन सुबह स्नानकर सूर्यदेव को जल अर्पित कर विष्णुजी का ध्यान करते हुए व्रत व पूजा का संकल्प लें। इसके बाद दुर्गाजी, शिवजी, विष्णुजी, लक्ष्मीजी, श्रीकृष्ण, गणेशजी की पूजा करें। रोली, चंदन, अक्षत चढ़ाएं और घी के दीपक से आरती उतारें। भोग के रूप में मिष्ठान्न अर्पित करें। विष्णुजी को तुलसी, गणेशजी को दूर्वा और शिवजी को बिल्व पत्र जरूर चढ़ाएं।
इस दिन पुरुषसूक्त व विष्णुसहस्रनाम का पाठ बहुत फलदायी होता है। मोक्षदा एकादशी पितरों को प्रसन्न करने का भी दिन है। इस दिन व्रत रखकर दोपहर में पितरों के निमित्त तर्पण और दान करने से जीवन के सभी अवरोध खत्म होते हैं। मान्यता है कि मोक्षदा एकादशी व्रत करने पर पितरों को भी पुण्य मिलता है। पितरों की प्रसन्नता से ही सभी सुख प्राप्त होते हैं।
मोक्षदा एकादशी, मोक्षदायिनी एकादशी या वैकुंठ एकादशी पूजा मुहूर्त
एकादशी तिथि प्रारंभ होगी 24 दिसंबर की रात 11.17 बजे से
एकादशी तिथि समाप्त होगी 25 दिसंबर को रात में 1.54 बजे।
एकादशी व्रत और पूजन 25 दिसंबर शुक्रवार को दिनभर कर सकेंगे।
Published on:
24 Dec 2020 08:32 am
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