जयपुर। राजधानी में एक दिन पहले आई बारिश ने शहर के ड्रेनेज सिस्टम के साथ इंजीनियरिंग की सच्चाई सामने ला दी। अफसरों की लापरवाही ने एक बच्चे की जान ले ली, वहीं बारिश के 24 घंटे बाद भी शहर में जगह—जगह जलभराव की स्थिति बनी हुई है। हकीकत शहर में जलभराव की निकासी में नगर निगम अफसर व कार्मिक रात तक जुटे रहे। ग्रेटर नगर निगम क्षेत्र में ही डेढ़ सौ अधिक जगहों पर जलभराव की शिकायतें आ गई। हैरिटेज नगर निगम में भी 100 से अधिक जगहों पर जलभराव की शिकायतें आई।
शहर में मेघ जमकर बरसे तो ड्रेनेज सिस्टम फेल साबित नजर आया। सीकर रोड, पांच्यावाला, सांगानेर, जौहरी बाजार, चांदी की टकसाल, एमआई रोड, खजाने वालों का रास्ता दरिया बन गए। अन्य बाजारों में पानी भर गया। चारदीवारी के बाहरी बाजारों में भी जलभराव की स्थिति बन गई। ड्रेनेज सिस्टम और नाला सफाई ऐसी की, बारिश के 24 घंटे बाद भी शहर में जगह—जगह जलभराव की स्थिति बनी हुई है। मुख्य सड़कों के किनारे पानी भरा हुआ है।
संसाधन पड़ गए कम
नगर निगम अफसरों की मानें तो शहर में ढाई सौ अधिक जगहों पर पानी भरने की शिकायतें आई, वहां मडपंप लगाकर रात तक पानी निकासी की गई। पानी निकासी के लिए निगम के संसाधन कम पड़ गए। रात एक बजे तक कार्मिक पानी निकासी में जुटे रहे।
दिनभर बंद रहा अंडरपास
बारिश से शहर के अंडरपासों में पानी भर गया। इससे आवागमन बंद होने से लोग दिनभर परेशान होते रहे। ट्रांसपोर्ट नगर अंडरपास में पानी भरने से बेरिकेड्स लगाकर आवागमन रोकना पड़ा। जेडीए के अफसरों ने देरशाम इसकी सुध ली और रात तक पानी निकासी की गई।
ड्रेनेज विकसित, पानी सड़क पर और जेएलएन मार्ग जाम
जेडीए की ओर से करीब 90 लाख रुपए खर्च कर वीवीआईपी रोड जेएलएन मार्ग पर ड्रेनेज सिस्टम मजबूत किया जा रहा है, लेकिन तेज बारिश आई तो त्रिमूर्ति सर्किल से रामनिवास बाग तक जेएलएन मार्ग जाम हो गया। ड्रेनेज के दोनों ओर पानी सड़क पर भर गया, जो बारिश में 4 से 5 घंटे तक भरा रहा।
नाला सफाई की खुली पोल
राजधानी के दोनों नगर निगम ने शहर के 1300 से अधिक नालों की सफाई पर करोड़ों रुपए खर्च कर दिए, लेकिन तय समय पर नालों की सफाई नहीं हुई। शहर में तेज बारिश हुई तो पानी सड़कों पर बह निकला, सड़कें दरिया बन गई। नाला सफाई की सच्चाई सामने आ गई।