
Mool Nakshatra Ke Upay , Mool Shanti Kaise Karaye , GandMool Nakshatra
जयपुर. ज्योतिष में हमेशा नक्षत्रों पर ही सबसे ज्यादा विचार किया जाता है। भविष्य की सटीक व्याख्या या भविष्यफल के लिए नक्षत्रों का विश्लेषण जरूरी होता है। हर नक्षत्र के अलग अलग फल होते हैं। जहां कुछ नक्षत्र शुभ होते हैं वहीं कुछ बहुत उग्र होते हैं। उग्र और कठोर स्वभाव वाले नक्षत्रों को मूल नक्षत्र , सतैसा या गंडात कहा जाता है।
ज्योतिषाचार्य पंडित सोमेश परसाई बताते हैं कि इन नक्षत्रों में जन्म लेनेवाले जातकों में विशेष तरह के प्रभाव देखे जाते हैं। बच्चे के स्वभाव और स्वास्थ्य पर नक्षत्रों की तीक्ष्णता या कठोरता का सीधा असर पड़ता है। कुल 27 नक्षत्रों में से 6 मूल नक्षत्र माने जाते हैं- अश्विनी, आश्लेषा, मघा, ज्येष्ठा, मघा और रेवती।
इनमें मूल ,ज्येष्ठा और आश्लेषा नक्षत्र मुख्य मूल नक्षत्र हैं और अश्विनी,रेवती और मघा सहायक मूल नक्षत्र कहे जाते हैं। मूल नक्षत्र के कारण बच्चे को स्वास्थ्य का संकट बना रहता है. यदि इसका दुष्प्रभाव दिखाई दे रहा हो तो जन्म के सत्तास दिन बाद वही नक्षत्र आने पर नक्षत्र की पूजा कराएं जिसे मूल शांति कहा जाता है।
आठ वर्ष तक माता-पिता रोज ॐ नमः शिवाय का जाप करें। 8 वर्ष के बाद मूल नक्षत्र का विशेष प्रभाव नहीं रहता है। मूल नक्षत्र के कारण बच्चे का स्वास्थ्य कमजोर रहता हो तो बच्चे की माता को पूर्णिमा का उपवास रखना चाहिए। अगर बच्चे का बृहस्पति और चन्द्रमा मजबूत है तो बच्चे के स्वास्थ्य का संकट समाप्त हो जाता है।
Published on:
03 Oct 2020 06:52 pm
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