
कनिष्ठ भू.भौतिकविद्, भू.जल वैज्ञानिक की काउंसलिंग 5 अप्रेल को,
श्रीगंगानगर/पत्रिका न्यूज नेटवर्क. अस्पतालों में पहुंचने वाले मरीजों में 65 फीसदी महिलाएं पीड़ित है। इसके पीछे जागरुकता, साफ-सफाई का अभाव खान-पान बदलने से लोग अपने दांतों की चमक खो रहे हैं। दंतरोग विशेषज्ञों ने बताया कि अकेले राजकीय चिकित्सालय के आउटडोर में ही करीब ढाई हजार मरीज हर दांतों की समस्याएं लेकर आ रहे हैं। इसके अलावा जिले में निजी चिकित्सालयों, दंत रोग के चिकित्सकों के यहां भी मरीजों की संख्या कम नहीं है। जिले में सैंकड़ों की संख्या चिकित्सक दांतों के रोगों का इलाज कर रहे हैं। इसके बाद भी दांत के मरीजों की संख्या कम होने का नाम नहीं ले रही है। ऐसे मरीजों में 65 महिलाओं की संख्या है।
चिकित्सकों का कहना है कि दांतों को स्वस्थ रखने के लिए इनकी नियमित साफ-सफाई जरूरी है। लोग एक बार ब्रश करते हैं। जबकि कम से कम दो बार ब्रश जरूर करनी चाहिए। दांतों में कुछ फंसने पर उसको साफ करना जरूरी है। लोग दांतों में खराबी आने पर लंबे समय तक इलाज नहीं कराते, जिससे दांत और ज्यादा समस्या पैदा करते हैं। ग्रामीण इलाके से तो ऐसे-ऐसे मरीज आते हैं, जिनके दांत गल तक चुके होते हैं।
अकेले श्रीगंगानगर में 7600 बच्चों के दांत मुश्किल में:
अतिरिक्त मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मुकेश मेहता ने बताया कि जिला कलक्टर के निर्देश पर जिले में स्कूली बच्चों के दांतों की जांच के लिए मुस्कान अभियान चलाया जा रहा है। इसके तहत 1.90 लाख बच्चों की स्क्रीनिंग की गई थी। जिसमें 7600 बच्चों में संभावित बीमारी पाई गई। इनमें से 4474 बच्चों का इलाज किया गया।
65 फीसदी महिलाएं पीड़ित:
अस्पताल में हर माह करीब ढाई हजार मरीज दांतों की समस्याएं लेकर आते हैं। जिनमें महिलाएं 65 फीसदी है। जागरुकता, साफ-सफाई का अभाव, खान पान का बदलाव आदि कारण से दांतों की समस्याएं बढ़ रही है। जिले में दंत रोग से संबंधित काफी संख्या में चिकित्सक है। जहां लोग पहुंचते हैं।- डॉ. सुभाष राजपूत, दंतरोग विशेषज्ञ राजकीय चिकित्सालय
Published on:
24 Feb 2023 12:44 pm
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