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आत्मरक्षा के लिए लाठी चलाने का प्रशिक्षण ले रहीं मां-बेटियां

गर्मी की छुट्टियों में एक ओर जहां बच्चे अभिरूचि शिविर में नई - नई कलाएं सीख रहे हैं। वहीं दूसरी ओर कई बच्चे, किशोर और किशोरियां आत्मरक्षा प्रशिक्षण शिविर में खुद को सक्षम बना रहे हैं।

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आत्मरक्षा के लिए लाठी चलाने का प्रशिक्षण ले रहीं मां-बेटियां
जयपुर . गर्मी की छुट्टियों में एक ओर जहां बच्चे अभिरूचि शिविर में नई - नई कलाएं सीख रहे हैं। वहीं दूसरी ओर कई बच्चे, किशोर और किशोरियां आत्मरक्षा प्रशिक्षण शिविर में खुद को सक्षम बना रहे हैं। मुरलीपुरा के एक गार्डन में चल रहे नौ दिवसीय आत्म रक्षा प्रशिक्षण शिविर में बच्चियोंं के साथ महिलाएं भी प्रशिक्षण ले रही है। डॉ. मीनाक्षी शर्मा ने बताया कि नारी अबला नहीं सबला है। वह कमजोर नहीं शक्ति स्वरूपा है। इसी आत्मगौरव का भाव जगाने के लिए यह शिविर शुरू किया गया है। इसमें इन्हें कराटे के साथ लाठी चलाने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। बड़ी संख्या में महिलाएं, युवतियां और बच्चियां आत्मरक्षा का प्रशिक्षण ले रही हैं। इनमें कई मां और बेटी भी साथ में लाठी चलाने का प्रशिक्षण प्राप्त कर रही है। सात डिग्री बेल्ट प्राप्त कालूराम बुनकर जहां कराटे का प्रशिक्षण दे रहे हैं। वहीं बलवंत व्यायामशाला के प्रशिक्षक लीलाधर महावर लाठी चलाने का प्रशिक्षण दे रहे हैं।

रोजाना दो घंटे चल रहा प्रशिक्षण
किशोरियों और महिलाओं को हर दिन शाम को दो घटें प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रशिक्षकों के अनुसार बहुत ही कम समय में बेटियां कराटे, लाठी चलाना एवं निशाना लगाना सीख लेगी। आत्मसुरक्षा के लिए आयोजित इस प्रशिक्षण में महिलाएं काफी उत्साहित हैं।


प्राचीनतम कला को स्कूलों में किया जा रहा शामिल
प्रशिक्षक कालू राम बुनकर ने बताया कि लाठी चलाना भारत की प्राचीनतम कला है। लाठी चलाने को भारत सरकार ने स्कूलों में होने वाले खेलों में भी शामिल किया हुआ है। इसका प्रशिक्षण स्कूलों में बच्चों को दिया जाने लगा है, जिससे बच्चे आत्मरक्षा करना सीख रहे हैं। हमारी इस प्राचीनतम कला को छात्रों के बीच जीवित रखना जरूरी है।