
11 घंटे और 38 मिनट में फतह की माउंट कनामो पीक, बनाया वर्ल्ड रेकॉर्ड
जयपुर। युवाओं में हाइकिंग, माउंटेनीयरिंग, साइक्लोथॉन, आयरनमैन और रॉक क्लाइम्बिंग जैसे एडवेंचरस और फिजिकल-मेंटल चैलेंज देने वाले गेम्स में रुझान बढ़ रहा है। इन खेलों में उन्हें न केवल 'किक' मिल रही है, बल्कि वे इसे अपना कॅरियर भी बना रहे हैं। नंदपुरी निवासी 19 वर्षीय पार्थ सोमानी ने हिमाचल प्रदेश के स्पीती पहाड़ी क्षेत्र की सबसे ऊंची बर्फीली चोटी माउंट कनामो पीक पर सबसे कम समय में पहुंचने और वापस लोटने का नया वर्ल्ड रेकॉर्ड कायम किया है। पांच लोगों की टीम में पार्थ सबसे छोटे थे। टीम के साथ वह टीम के साथ एक ही दिन में 19,723 फीट की ऊंचाई पर 11 घंटे 38 मिनट में पहुंचे और वापस लौटे। आइकन ए्बैसेडर बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड्स (यूके) ने उनके इस कारनामे को अपनी रेकॉर्ड बुक में जगह दी है। पार्थ ने बताया कि मौसम खराब होने की वजह से टीम ने 6 जून को सुबह 6 बजे चोटी पर चढ़ना शुरू किया। करीब 6 हजार मीटर ऊंची माउंट कनामो पीक के बेस कैंप से चोटी तक पहुंचने में टीम को साढ़े आठ घंटे का समय लगा। बर्फीली हवाओं में चोटी तक पहुंचने और वापस आने में टीम को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। पार्थ ने बताया कि ऊंचाई पर ऑक्सीजन लंग्स तक नहीं पहुंच पा रही थी।
माइनस 18 डिग्री से ज्यादा जमा देने वाली सर्दी
पार्थ ने बताया कि उन्होंने टीम के साथ हरियाणा के सोनीपत जिले से अपना सफर किया। टीम में नेवी से रिटायर्ड मनीष झा सबसे सीनियर मेंबर थे। मौसम खराब होने की वजह से उन्होंने 6 जून को सुबह 6 बजे चोटी पर चढऩा शुरू किया। हिमाचली भाषा में माउंट कनामो का मतलब 'व्हाइट लेडी' होता है। यह नाम इसकी सारा साल बर्फ से ढकी चाोटियों और माइनस 18 डिग्री से भी ज्यादा जमा देने वाली सर्दी के कारण पड़ा है। पार्थ ने बताया कि 19,723 फीट (करीब 6000 मीटर) ऊंची माउंट कनामो चोटी पर हम लोग चूंकि वर्ल्ड रेकॉर्ड के लिए गए थे, इसलिए हम बेस कैम्प पहुंचने के बाद भी नहीं रुके। बेस कैम्प से चोटी तक पहुंचने में टीम को साढ़े आठ घंटे का समय लगा। बर्फीली हवाओं में चोटी तक पहुंचने और वापस आने में टीम को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा।
पिछला रेकॉर्ड 18 घंटे का
पार्थ ने बताया कि उनसे पहले इस चोटी को फतह करने का स्थानीय रेकॉर्ड 18 घंटे का है। हालांकि, यह रेकॉर्डेड नहीं है, बस स्थानीय गाइड और एक्सपीडिशन लीड करने वाले ग्रुप्स के बीच पॉपुलर है। टीम ने 11 घंटे 38 मिनट में एक नया कीर्तिमान बनाकर लोगों को एक नई चुनौती दे दी है। पार्थ ने बताया कि ऊपर हवा बहुत पतली होती है और ऑक्सीजन लंग्स तक नहीं पहुंचने से चढ़ाई आसान नहीं होती।
एक साल में चौथी चोटी की फतह
शुरू से ही वर्ल्ड रेकॉर्ड बनाने का सपना देखने वाले पार्थ ट्रैकिंग,साइक्लोथॉन में भी हिस्सा ले चुके हैं। पार्थ को पहाड़ों की चोटियों पर कदम रखते हुए महज एक साल ही हुआ है। एक साल में वह देश की चार चोटियों पर चढ़ चके हैं। पार्थ पिता और परिवार को अपनी प्रेरणा मानते हैं। बीबीए ऑनर्स के छात्र पार्थ बीते एक साल में माउंट फ्रेंडशिप पीक (17,346 फीट, मनाली), नाग टिब्बा ट्रेक (9,915 फीट, उत्तराखंड) और ब्यास कुंड ट्रेक (12,772 फीट, सोलंग वैली, हिमाचल प्रदेश) पर भी कदम रख चुके हैं।
Published on:
03 Jul 2023 05:14 pm
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