
फाइल फोटो
राज्य सरकार ने मुख्यमंत्री नि:शुल्क निरोगी राजस्थान योजना (संपूर्ण कैशलेस) इलाज की संचालन प्रक्रिया में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। अब आउटडोर और इनडोर सभी मरीजों को जनाधार कार्ड लाना होगा। मरीज के पास कार्ड नहीं है तो उसे शीघ्र कार्ड बनवाने की हिदायत के साथ ही दवा दी जाएगी। इसके लिए मरीज से लिखित सहमति ली जाएगी। संबंधित अस्पताल के अधिकारी ऐसे मरीज के पहचान-पत्र की प्रति जिला कलक्टर को भेजेंगे। जहां से उनका आधार कार्ड बनवाने की कार्यवाही होगी।
नि:शुल्क दवा और जांच भी एक सीमा के बाद स्वीकृति के दायरे में रहेंगे। 10 हजार रुपए प्रतिमाह से अधिक कीमत की दवा विभागाध्यक्ष और एक लाख से अधिक कीमत की दवा एसएमएस मेडिकल कॉलेज की कमेटी की अनुमति पर ही दी जाएगी। इलाज करने वाला डॉक्टर अधिकतम 2 हजार रुपए लागत की दवा ही लिख सकेगा। 2 से 5 हजार रुपए तक की जांच मेडिकल कॉलेज में यूनिट हैड और जिला अस्पताल में प्रमुख चिकित्सा अधिकारी की सिफारिश पर लिखी जाएगी। पांच हजार से अधिक की जांच पर विभागाध्यक्ष, अधीक्षक व चिकित्सकों की कमेटी की अनुमति देगी। चिकित्सा शिक्षा विभाग के प्रमुख शासन सचिव वैभव गालरिया और चिकित्सा विभाग के शासन सचिव डॉ.पृथ्वी ने संयुक्त गाइडलाइन जारी की है।
लगाने होंगे चक्कर, इलाज शुरू होने में होगी देर!
इन बदलावों के बाद अब मरीजों को इलाज शुरू होने में अधिक समय लगने की आशंका है। अधिक दवा और महंगी जांच लिखे जाने के बाद मरीजों को उनकी स्वीकृति के लिए संबंधित वरिष्ठ चिकित्सकों के पास जाना होगा। इससे लंबा समय लग सकता है।
संपूर्ण कैशलेस इलाज की संचालन प्रक्रिया में महत्वपूर्ण बदलाव
- 10 हजार रुपए प्रतिमाह से अधिक की दवा पर विभागाध्यक्ष और एक लाख से अधिक की दवा पर कमेटी देगी अनुमति
- डॉक्टर लिख सकेंगे 2 हजार रुपए तक की ही जांच, इससे अधिक पर लेनी होगी स्वीकृति
ये निर्देश भी जारी
- आरएमएससीएल से दवा आपूर्ति नहीं मिलने पर सीएमएचओ और पीएमओ प्रधानमंत्री जन औषधि केन्द्र, सहकारी उपभोक्ता भंडार और राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम के अंतर्गत अधिकृत मेडिकल स्टोर से भी न्यूनतम दर पर दवा खरीद सकेंगे।
- सूची में शामिल दवा के अलावा अन्य की जरूरत होने पर प्राचार्य, सीएमएचओ और पीएमओ सरकार को प्रस्ताव भेजेंगे
- मेडिकल कॉलेज में विभागीय चिकित्सक चिकित्सक शिक्षक ही दवा का परामर्श देंगे
- बीमा योजना में वित्तीय वर्ष के दौरान 10 लाख तक का इलाज ही स्वीकृत है, इससे अधिक होने पर राज्य सरकार से स्वीकृति ली जाएगी
- हेयर ट्रांसप्लांट, लेजर से दाग हटाना, बॉडी हेयर रिमूवल नि:शुल्क नहीं होंगे
- अस्पताल में जांच उपलब्ध नहीं है तो एनएबीएल जांच केन्द्र से आरजीएचएस दर पर करवाई जा सकेगी, लेकिन अनुपलब्ध जांच शुरू करने का प्रस्ताव राज्य सरकार को एक माह में भेजना होगा
- उप जिला अस्पताल, सेटेलाइट सीएचसी पीएचसी पर उपलब्ध कराई जाने वाली जांच हब एंड स्पॉक मॉडल पर दी जाएगी, जिसकी प्रक्रिया शीघ्र शुरू की जाएगी
- शोध कार्य के लिए और अनावश्यक जांचें नहीं लिखी जाएंगी
Published on:
04 Jun 2022 06:06 pm
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