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ऐसा क्या है इस टाइगर में, जो राज्य और केंद्र दोनों में हो रहा हैं आपस में टकराव

मुकुन्दरा में बाघ टी-91 शिफ्ट करने को लेकर एनटीसीए और राज्य सरकार आमने-सामने

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jaipur

शादाब अहमद / जयपुर . मुकुन्दरा टाइगर हिल्स में बाघ टी-91 को लेकर बवाल बढ़ता जा रहा है। जहां हाइकोर्ट ने केन्द्र व राज्य सरकार से इस मामले में जवाब मांगा है, वहीं राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) और राज्य सरकार इस मामले में आमने-सामने हैं। एनटीसीए ने बाघ शिफ्टिंग को नियम विरुद्ध बताकर मुख्य सचिव को पत्र लिखकर दोषी अफसरों पर कार्रवाई के लिए कहा तो मुख्य सचिव ने एनटीसीए दो टूक कह दिया कि यह राज्य के क्षेत्राधिकार का मामला है।


वन विभाग ने गत दिनों टी-91 को मुकुंदरा हिल्स में शिफ्ट किया है। एनटीसीए के अतिरिक्त निदेशक जनरल (प्रोजेक्ट टाइगर) और सदस्य सचिव (एनटीसीए) ने इसे वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम 1972 का उल्लंघन माना और मुख्य सचिव एन.सी.गोयल को पत्र लिखकर अफसरों की जिम्मेदारी तय करते हुए उन पर कार्रवाई करने के बाद एक रिपोर्ट भेजने के लिए कहा। इसका मुख्य सचिव की ओर से एनटीसीए को जवाब भेज दिया गया है। इसमें उन्होंने दो टूक कहा कि बाघ टी-91 टाइगर रिजर्व को छोड़ चुका था। ऐसी स्थिति में उसे रामगढ़ के जंगल से पकड़ कर मुकुंदरा में छोडऩा राज्य के क्षेत्राधिकार में आता है। यह निर्णय राज्य मुख्य वन्य जीव प्रतिपालक खुद कर सकते हैं। ऐसे में नियम का किसी भी तरह का उल्लंघन नहीं हुआ है।

विवाद 'सरकार' को खुश करने से बढ़ा

वन विभाग ने एनटीसीए से रणथंभौर के तीन बाघों को मुकुंदरा हिल्स के बोरावास रेंज के सेल्जर क्षेत्र में शिफ्ट करने की मंजूरी ली थी। बाद में अचानक वन विभाग ने बाघों को झालावाड़ जिले के मशालपुरा इलाके में शिफ्टिंग करने की तैयारी कर ली। इसके लिए जंगल में बड़ा एनक्लोजर तैयार कर लिया गया। इसकी जानकारी लगने पर एनटीसीए ने बाघों की शिफ्टिंग पर रोक लगा दी। इसके बावजूद वन विभाग ने गत दिनों टी-91 को मुकुंदरा में शिफ्ट कर दिया। गौरतलब है कि मुकुंदरा में जिस इलाके में बाघ को छोड़ा गया है, उसका एक छोर झालावाड़ जिले के गागरोन क्षेत्र को छूता है। जहां इस नेशनल पार्क का गेट बनाने का प्रस्ताव भी है। झालावाड़ में बाघ शिफ्टिंग चुनावी मुद्दा भी रह चुका है। जबकि वन विभाग का कहना है कि बोरबास-सेल्जर में गांव अधिक होने से लोग काम नहीं करने दे रहे थे।