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राजस्थान में सोमवार से नहीं चलेंगे ट्रक! परिवहन विभाग और ट्रांसपोर्टर आमने-सामने, जानें क्या है VLTD विवाद?

VLTD Dispute : वीएलटीडी को लेकर राजस्थान में सोमवार से ट्रक नहीं चलेंगे! ट्रांसपोर्टरों ने चक्का जाम का ऐलान किया है। जानें वीएलटीडी क्या है?
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Rajasthan Trucks will not run in Monday transporters angery what is VLTD dispute know

Rajasthan : फोटो - AI

VLTD Dispute : राजस्थान में सोमवार से ट्रक नहीं चलेंगे। ट्रांसपोर्टरों ने चक्का जाम का ऐलान किया है। ट्रकों के इस चक्का जाम की वजह से राजधानी जयपुर बुरी तरह से प्रभावित होगा। चक्का जाम से सप्लाई चेन थम सकती है। आमजन पर इसका गहरा असर पड़ेगा। ट्रक संगठनों का दावा है कि हड़ताल के पहले दिन ही बड़ी संख्या में ट्रक नहीं चलेंगे। जयपुर से प्रतिदिन करीब 3 हजार ट्रक विभिन्न राज्यों में सामान भेजते हैं और उतनी ही संख्या में आवश्यक वस्तुएं जयपुर आती है। लंबी हड़ताल से फल-सब्जियां, किराना, दूध उत्पाद, दवाइयां, ऑटोमोबाइल पार्ट्स, औद्योगिक कच्चा माल और निर्माण सामग्री की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। आखिर वीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस (वीएलटीडी) विवाद क्या है? जिसको लेकर परिवहन विभाग और ट्रांसपोर्टरों आमने सामने आ गए हैं।

क्या है वीएलटीडी?

VLTD यानि व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस) नवीनतम GPS आधारित ट्रैकिंग सिस्टम है। इसे वाहनों में लगना अनिवार्य है। ताकि वाहन की गति, वास्तविक समय की स्थिति, मार्ग और आवागमन की निगरानी की जा सके। इसे AIS 140 के सभी मानकों का पालन करते हुए डिज़ाइन किया गया है। AIS 140 का अर्थ है ऑटोमोटिव उद्योग मानक 140, जिसे सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) के तहत ARAI (ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया) ने जन सुरक्षा और वाहन ट्रैकिंग के लिए लागू किया था। VLTD में कई तकनीकों का उपयोग किया जाता है।

1- जीएसएम/जीपीआरएस कनेक्टिविटी।
2- ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम (जीपीएस)।
3- आपातकालीन चेतावनी प्रणाली।
4- फ्लीट मॉनिटरिंग सॉफ्टवेयर।
5- वास्तविक समय डेटा प्रसारण।

एक सामान्य GPS ट्रैकर और VLTD के बीच अंतर

विशेषता - सामान्य जीपीएस ट्रैकर - वाहन स्थान ट्रैकिंग उपकरण (VLTD)
उद्देश्य - बुनियादी वाहन स्थान ट्रैकिंग - अनुपालन और सुरक्षा सुविधाओं के साथ वाहन ट्रैकिंग।
एआईएस 140 प्रमाणन- प्रमाणित नहीं - एआईएस 140 प्रमाणित।
पैनिक बटन एकीकरण- आमतौर पर अनुपलब्ध - मानकों के अनुसार एकीकृत।
NavIC/IRNSS समर्थन- आमतौर पर समर्थित नहीं - समर्थन किया।
सरकारी अनुपालन- अनिवार्य परिवहन नियमों का पालन नहीं - सरकारी आवश्यकताओं का पूर्णतः अनुपालन।
आपातकालीन चेतावनी कार्यक्षमता- सीमित या अनुपलब्ध - वास्तविक समय आपातकालीन चेतावनी प्रणाली।
हार्डवेयर मानक- निर्माता पर निर्भर - अनुमोदित और मानकीकृत हार्डवेयर।
परिवहन विभाग की स्वीकृति- नियामक अनुपालन के लिए स्वीकार नहीं किया गया - अनिवार्य उपयोग के लिए अनुमोदित।

यह कैसे काम करता है?

लाइव ट्रैकिंग : यह डिवाइस रियल-टाइम में वाहन की सटीक लोकेशन और गतिविधि की जानकारी देता है।
पैनिक बटन : आपातकालीन स्थिति (जैसे दुर्घटना या महिला सुरक्षा) में यात्री या ड्राइवर इस बटन को दबाकर पुलिस और नियंत्रण कक्ष को तुरंत अलर्ट भेज सकते हैं।
स्पीड अलर्ट : वाहन की गति पर लगातार नज़र रखी जाती है, और तय सीमा से अधिक होने पर चेतावनी मिलती हैं।

महंगी डिवाइस भी विवाद का कारण

रामावतार मोर और उपेंद्र मित्तल ने आरोप लगाया कि वीएलटीडी लगाने के लिए केवल कुछ कंपनियों को अधिकृत किया गया है। ये कंपनियां एक डिवाइस के करीब 30 हजार रुपए तक वसूल रही हैं, जबकि दूसरे राज्यों में यही डिवाइस करीब 3 हजार रुपए में उपलब्ध हैं। उन्होंने अधिक कंपनियों को अधिकृत करने और एसओपी तत्काल जारी करने की मांग की।

"व्यवस्था सुधरे, तब तक कार्रवाई रोकी जाए"

राजस्थान ट्रक ट्रांसपोर्ट संघर्ष समिति के प्रवक्ता सुरेश पूनिया ने कहा कि प्रमाणित वीएलटीडी डिवाइस पर्याप्त संख्या में उपलब्ध नहीं हैं। विभागीय पोर्टल में तकनीकी समस्याओं के कारण परमिट और फिटनेस से जुड़े कार्य प्रभावित हो रहे हैं। उनका कहना है कि जब तक व्यवस्था सुचारु नहीं हो जाती, तब तक ट्रांसपोर्टरों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई नहीं होनी चाहिए।

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