
पत्रिका फाइल फोटो
Irregularities exposed in Energy Department: जयपुर। करोड़ों रुपए के घोटाले और गड़बड़ियां सामने आने के बावजूद ऊर्जा महकमे में दोषियों पर कार्रवाई का इंतजार है। कुछ मामलों में तो दोषियों को चिह्नित ही नहीं किया गया और जहां जिम्मेदारों का खुलासा हुआ वहां भी कार्रवाई के बजाय उन्हें बचाने के प्रयास हो रहे हैं। इन मामलों में ऊर्जा मंत्री के आदेश तक को नजरअंदाज कर दिया गया। ऊर्जा विकास निगम, अक्षय ऊर्जा निगम और ऊर्जा विभाग के ये मामले इसलिए भी चर्चा में हैं क्योंकि दोषियों को बचाने के लिए जांच कमेटियों की रिपोर्ट्स सार्वजनिक नहीं की जा रही।
सरकारी इमारतों पर सोलर पैनल लगाने के लिए निकाले गए 456 करोड़ रुपए के टेंडर में फर्जी बैंक गारंटी के आधार पर 46 करोड़ रुपए का एडवांस उठा लिया गया। मामला उजागर हुआ तो विभागीय जांच कमेटी बनाई गई, लेकिन रिपोर्ट में एक भी अधिकारी दोषी नहीं ठहराया गया। पूरी जिम्मेदारी केवल संबंधित कंपनी पर डालकर सिस्टम ने खुद को साफ साबित कर दिया। सवाल यह है कि बिना अफसरों की जानकारी के फर्जी बैंक गारंटी कैसे स्वीकार कर ली गई? फौरी रिपोर्ट देखकर ऊर्जा मंत्री तक हैरान हैं और अब उसी रिपोर्ट की दोबारा जांच के निर्देश दिए गए हैं। कंपनी को ब्लैकलिस्ट कर दिया गया और मामला सीबीआइ तक पहुंच चुका है।
जवाबदेही: ऊर्जा विभाग एवं अक्षय ऊर्जा निगम
राजस्थान ऊर्जा विकास निगम ने सोलर एनर्जी कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (सेकी) से 25 साल के लिए 4.98 रुपए प्रति यूनिट की दर से 630 मेगावाट बिजली खरीदने की डील कर ली। यह दर न सिर्फ महंगी थी, बल्कि यह प्रस्ताव मूल रूप से दिल्ली की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया था। जैसे ही मामला सामने आया, हल्ला हुआ तो निगम के बोर्ड ने अपने ही फैसले को पलटते हुए डील रद्द कर दी। गड़बड़ी मान ली गई, फैसला गलत मान लिया गया, लेकिन गलती करने वाले अफसरों के नाम सामने नहीं आए। इस डील में दो वरिष्ठ आइएएस अधिकारियों सहित निगम के शीर्ष अफसरों की अहम भूमिका बताई जा रही है, लेकिन वे बच निकले।
जवाबदेही: राजस्थान ऊर्जा विकास निगम
ऊर्जा विभाग के अधीन विद्युत निरीक्षणालय में अनुबंधित कंपनियों को नियमों के विपरीत फायदा पहुंचाने का मामला सामने आया। विभागीय जांच में गड़बड़ी की पुष्टि होने के बाद ऊर्जा मंत्री ने वरिष्ठ विद्युत निरीक्षक गौरीशंकर जीनगर को तत्काल निलंबित करने की फाइल पर स्वीकृति दे दी। फाइल एक टेबल से दूसरी टेबल घूमती रही और कार्रवाई लटक गई। अब मामला कार्मिक विभाग को भेजा है। मामला ब्लैकलिस्टेड और डीबार कंपनियों को नियमों के खिलाफ बहाल करने से जुड़ा है।
जवाबदेही: ऊर्जा विभाग
हर बार कहता रहा हूं कि गड़बड़ी, घोटाला किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं करेंगे। फर्जी बैंक गारंटी मामले में दोबारा जांच कराई जा रही है। विद्युत निरीक्षणालय में कंपनियों को फायदा पहुंचाने वाले जिम्मेदार अधिकारियों के निलंबन की स्वीकृति दे चुके हैं। बाकी अन्य मामलों में भी दोषियों पर एक्शन सुनिश्चित कर रहे हैं।
-हीरालाल नागर, ऊर्जा मंत्री
Published on:
09 Jan 2026 08:43 am
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