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AI से बन रही हैं ‘सुपर सेफ’ हाई-राइज इमारतें: अब न आग का डर, न पानी-बिजली की बर्बादी

AI Smart Buildings: अब इमारतें सिर्फ खड़ी नहीं, सोचती-समझती भी हैं। राजस्थान में भी इमारतों में हो रहा एआई का प्रयोग। स्कूल बिल्डिंग्स में हो रही AI-बेस्ड मॉनिटरिंग।

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जयपुर

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MOHIT SHARMA

Feb 26, 2026

Super Safe High-Rises: जयपुर. शहरों में ऊंची-ऊंची इमारतें अब पुरानी वाली नहीं रहीं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और स्मार्ट टेक्नोलॉजी की वजह से ये इमारतें 'जिंदा' हो गई हैं। AI इनकी हर गतिविधि पर नजर रखता है, खतरे को पहले ही भांप लेता है और संसाधनों की बर्बादी रोकता है। नतीजा? रहने वालों की टेंशन खत्म, सुरक्षा कई गुना बढ़ गई।AI कैसे बनाता है इमारतों को 'सुपर सेफ'?

AI पूरे बिल्डिंग में फैले सेंसरों के जाल से काम करता है। ये सेंसर लिफ्ट, पाइपलाइन, बिजली सिस्टम, पानी के टैंक और हवा की क्वालिटी तक हर चीज का डेटा भेजते रहते हैं। AI इस डेटा को एनालाइज करके छोटी-छोटी गड़बड़ियां पकड़ लेता है और अलर्ट भेजता है।

आग लगने का खतरा कम

AI तापमान, धुआं या असामान्य गतिविधि देखकर तुरंत एक्टिव हो जाता है। पहले ही खतरे को रोक देता है, जिससे आग जैसी बड़ी घटना होने से पहले ही बचाव हो जाता है।

लिफ्ट और बिजली की खराबी का पहले पता

लिफ्ट में खराबी आने से पहले सेंसर चेतावनी देते हैं। बिजली सप्लाई में छोटी सी गड़बड़ी भी AI पकड़ लेता है, ताकि बड़ा हादसा न हो।

पानी और बिजली की बचत में AI का जादू

लीकेज हो या ज्यादा इस्तेमाल AI तुरंत डिटेक्ट करता है और मैनेजर को मैसेज भेजता है। पानी की बर्बादी रुकती है, बिजली का बिल कम आता है। शहरों में जहां पानी-बिजली की किल्लत बढ़ रही है, वहां ये तकनीक बहुत काम की साबित हो रही है।

पार्किंग की टेंशन भी खत्म

जमीन में लगे सेंसर और कैमरे खाली पार्किंग स्पॉट ढूंढते हैं। AI इसे आपके स्मार्टफोन ऐप पर भेजता है – एक क्लिक में जगह बुक, रास्ता बताता है। समय बचेगा, ईंधन बचेगा, और झगड़े भी कम होंगे।

निर्माण में भी AI क्रांति ला रहा है

बिल्डिंग बनते वक्त AI पुराने डिजाइनों से सीखता है, मजबूत स्ट्रक्चर सुझाता है (प्रकृति से इंस्पायर्ड शेप्स जैसे), गलतियां पकड़ता है। इससे सामग्री की बर्बादी कम होती है, प्रोजेक्ट समय पर पूरा होता है और बजट में रहता है।

भविष्य में क्या होगा?

AI की मदद से इमारतें अब सिर्फ घर नहीं, बल्कि देखभाल करने वाली 'स्मार्ट फैमिली' बन रही हैं। आने वाले समय में ऐसी हाई-राइज इमारतें आम हो जाएंगी – मजबूत, सुरक्षित, इको-फ्रेंडली और संसाधनों का सही इस्तेमाल करने वाली। शहरों की शक्ल बदल रही है, और AI इसमें सबसे बड़ा प्लेयर है।

स्कूल बिल्डिंग्स में भी AI का इस्तेमाल

जुलाई 2025 में राजस्थान के झालावाड़ जिले के पीपलोदी गांव में सरकारी स्कूल की छत गिर गई, जिसमें 7 मासूम बच्चों की मौत हो गई और 20 से ज्यादा घायल हुए। यह घटना पूरे देश को झकझोर गई और स्कूल इंफ्रास्ट्रक्चर की खराब हालत पर सवाल खड़े कर दिए। झालावाड़ ट्रेजडी के बाद राजस्थान सरकार ने तुरंत बड़ा फैसला लिया। 2,699 असुरक्षित इमारतें आइडेंटिफाई की गईं। इन्हें सील या डिमोलिश करने की प्रक्रिया शुरू।

GIS मैपिंग शुरू हुई

सभी कमजोर इमारतों को मैप किया गया। Shala Darpan प्लेटफॉर्म से लिंक किया।AI-बेस्ड मॉनिटरिंग इंटीग्रेट के माध्यम से स्ट्रक्चरल सेफ्टी का रियल-टाइम चेक किया। अब AI से खतरे पहले ही पकड़े जाएंगे। साथ ही बजट अलोकेशन बेहतर होगा, और रिपेयर्स को प्रायोरिटी मिलेगी।