
राजस्थान में पांच हजार परिवार गरीब अब कर सकेंगे 'गृह प्रवेश'
भवनेश गुप्ता
जयपुर। गरीबों (ईडब्ल्यूएस, एलआईजी) के पांच हजार से अधिक आवास पर लटकी तलवार को सरकार ने हटा लिया है। इनमें मुख्यमंत्री जन आवास योजना और अफोर्डेबल हाउसिंग पॉलिसी के तहत स्वीकृत आवास हैं। ऐसे बहुमंजिला आवास प्रोजेक्ट इमारत के सेटबैक के पेच के कारण कई साल से अटके हुए थे। अब सरकार ने फैसला किया है कि 31 मई 2017 के बाद और 17 जुलाई 2018 से पहले जो भी प्रकरण स्वीकृत किए गए हैं, उन्हें दोबारा निकाय से अनुमोदन की जरूरत नहीं होगी। 40 मीटर तक की ऊंचाई की इमारत में साइड और बैक सेटबैक 6 मीटर रखा गया है। ऐसे प्रकरणों को स्वीकृति के लिए राज्य सरकार को भेजने की जरूरत नहीं होगी। इसी तरह इस अवधि में विकास न्यास स्तर पर 30 मीटर और प्राधिकरण स्तर पर 40 मीटर से अधिक ऊंचाई के भवनों के अनुमोदित मानचित्र सरकार की स्वीकृति के लिए नहीं भेजे जाएंगे। नगरीय विकास विभाग ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिया है।
यह भी रियायत
-पहले की तरह ही इन प्रकरणों में अधिवास और पूर्णता प्रमाण पत्र पंजीकृत आर्किटेक्ट जारी कर सकेंगे।
-किसी निकाय क्षेत्र में मॉडल बिल्डिंग बायलॉज लागू होने की अधिसूचना जारी होने से पहले के मुख्यमंत्री जन आवास योजना के वे सभी प्रकरण मान्य होंगे।
यह है मामला
- नगरीय विकास विभाग में 31 मई 2017 को एक आदेश जारी किया था। इस आदेश के तहत शहरी निकायों और राज्य सरकार की ओर से पंजीकृत आर्किटेक्ट्स को अधिकार दिए गए थे।
- इसके तहत निजी भूमि पर गरीबों के लिए मकान बनाने के मुख्यमंत्री जन आवास योजना में बहुमंजिला आवासों की ऊंचाई निर्धारण का पूरा अधिकार निकाय व आर्किटेक्ट को दिया गया।
- नगरीय विकास विभाग ने 17 जुलाई 2018 को दोबारा आदेश जारी किया और यह प्रावधान किया कि विकास न्यास 30 मीटर तक और प्राधिकरण 40 मीटर तक ऊंचाई की इमारतों के मामले में ही स्वीकृति दे सकेंगे। इससे अधिक ऊंचाई के प्रकरण राज्य सरकार को स्वीकृति के लिए भेजे जाएंगे।
-अफॉर्डेबल हाउसिंग पॉलिसी और मुख्यमंत्री जन आवास योजना में यह प्रावधान था कि 45 मीटर ऊंचाई तक के प्रकरणों में साइड और बैक सेटबैक 6 मीटर रखने का प्रावधान था।
-16 अक्टूबर 2020 को लागू मॉडल बिल्डिंग बायलॉज में 40 मीटर से अधिक ऊंचाई के प्रकरणों में यह सेट बैक बायलॉज के अनुसार रखने का प्रावधान किया गया।
-इस तरह के दो आदेश के कारण कई बहुमंजिला आवासीय प्रोजेक्ट के अधिवास प्रमाण पत्र अटक गए। इसका साइड इफेक्ट रहा कि गरीबों को उनके मकान का कब्जा नहीं मिल पाया।
इस तरह बढ़ा कन्फ्यूजन
तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने अफोर्डेबल हाउसिंग योजना और बाद में भाजपा सरकार के समय लाई गई मुख्यमंत्री जन आवास योजना के तहत बिल्डरों की निजी भूमि पर गरीबों के लिए मकान बनाने का प्रावधान है। ऐसे मामलों में बहुमंजिला आवास बनाने पर सेट बैक कम रखा गया था। साथ ही मुख्यमंत्री जन आवास योजना के मामलों में इमारतों की ऊंचाई की स्वीकृति देने को लेकर निकायों को पूरी छूट दी गई थी। बाद में यह छूट भी वापस ले ली और बाद में जारी हुए मॉडल बिल्डिंग बायलॉज में सेटबैक के प्रावधान बढ़ा दिए गए। इसके चलते पूर्व में स्वीकृत इन मामलों को लेकर निकाय अधिकारियों के लिए असमंजस की स्थिति हो गई थी। निकाय अधिकारी कंफ्यूज थे कि क्या ऐसे मामलों में नए प्रावधानों के तहत कार्यवाही की जाए या फिर राज्य सरकार से मंजूरी ली जाए।
Published on:
24 Jan 2022 11:59 pm
