
फिरोज सैफी/जयपुर।
प्रदेश में 40 विधानसभा क्षेत्र ऐसे हैं, जहां पर अल्पसंख्यक खासतौर पर मुस्लिम मतदाता निर्णायक भूमिका में है। बावजूद इसके, कांग्रेस और बीजेपी मुस्लिम समाज को टिकट देने में कंजूसी बरतते रहे हैं। हालांकि इन सीटों पर मुस्लिम मतदाताओं की संख्या 40 हजार से लेकर 1 लाख तक है।
दोनों ही प्रमुख दलों की ओर से कुछ ही सीटों पर मुस्लिम मतदाताओं को टिकट देकर इतिश्री कर ली जाती है और शेष सीटों पर अन्य उम्मीदवारों को चुनाव मैदान में उतार दिया जाता है। वहीं अब दोनों ही प्रमुख दलों से जुड़े मुस्लिम नेताओं ने आबादी के हिसाब से टिकट देने की मांग जोर-शोर से उठाना शुरू कर दिया है, और इसे लेकर बीजेपी और कांग्रेस के शीर्ष नेताओं तक भी बात पहुंचाई गई है।
भाजपा के मुकाबले कांग्रेस देती आई है एक दर्जन से ज्यादा दिकट
भाजपा के मुकाबले कांग्रेस बीते तीन विधानसभा चुनावों से एक दर्जन से ज्यादा मुस्लिम नेताओं को टिकट देकर चुनाव मैदान में उतारती रही है। साल 2018 में हुए विधानसभा चुनाव में जहां कांग्रेस ने 14 मुस्लिम उम्मीदवार को टिकट देकर चुनाव मैदान में उतारा था तो वहीं भाजपा ने केवल एक सीट पर मुस्लिम उम्मीदवार को टिकट दिया था।
बीते तीन विधानसभा चुनाव में कांग्रेस-भाजपा मुस्लिम प्रत्याशियों की संख्या
कांग्रेस--------------------भाजपा
साल 2008- 17--------------3
2013- 16-------------4
2018- 14--------------1
ये हैं मुस्लिम बाहुल्य सीटें
आदर्श नगर, किशनपोल, हवामहल, सिविल लाइंस, टोंक, सवाई माधोपुर, धौलपुर, पुष्कर, मसूदा, अजमेर शहर, अलवर ग्रामीण, तिजारा, लक्ष्मणगढ़, रामगढ़, कामां, नगर, बीकानेर पूर्व, सरदार शहर, सूरसागर, शिव,चौहटन, पोकरण, कोटा उत्तर, लाडपुरा, गंगापुर सिटी, मकराना, चूरू, फतेहपुर, धौलपुर, नागौर, मकराना, डीडवाना, मंडावा, नवलगढ़, नागौर, झंझुनूं, सीकर, दातारामगढ़ जैसे विधानसभा क्षेत्र हैं।
इनका कहना है
-पार्टी को जो फैसला होगा वो स्वीकार्य है, मुस्लिम बाहुल्य सीटों पर ज्यादा प्रतिनिधित्व देने की मांग केंद्रीय नेताओं के सामने रख चुके हैं।
एम. सादिक खान, पूर्व प्रदेशाध्यक्ष, भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा
- मुस्लिम बाहुल्य सीटों पर समाज के नेताओं को अधिक से अधिक प्रतिनिधित्व पार्टी को देना चाहिए।
अय्यूब खान, सचिव, प्रदेश कांग्रेस
Published on:
15 Oct 2023 09:34 pm
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