
जयपुर। नागौर की एक महिला जीवनदान की उम्मीद लिए अपने पति नरपत सिंह को इलाज के लिए जयपुर लाई है। पति की दोनों किडनी खराब हैं लेकिन पत्नी के पास इलाज तो दूर, पेट भरने और धर्मशाला का किराया चुकाने के भी पैसे नहीं हैं।
एसएमएस अस्पताल के सामने सोमवार को धर्मशाला के बाहर फुटपाथ पर वह घंटों तक इस उम्मीद में बैठी रही कि शायद भगवान कोई राह निकालेंगे। उनतीस साल का नरपत सिंह नागौर जिले के खींवसर स्थित भावंडा गांव का रहने वाला है। फुटपाथ पर बैठी नरपत की पत्नी सरोज ने बताया, 6 साल पहले गुर्दे में पथरी की शिकायत हुई तो ऑपरेशन करा लिया। लेकिन बाद में धीरे-धीरे दिक्कत महसूस होने लगी। दवा ली मगर कोई फायदा नहीं हुआ। इस बीच 4 साल पहले नरपत के पिता की मौत हो गई और परिवार की जिम्मेदारी पूरी तरह परपत पर आ गई। ढाई साल पहले दिक्कत बढ़ी तो इलाज के लिए सरोज उसे जोधपुर ले गई।
महंगी दवा और डायलिसिस के लिए सरोज को अपने गहने बेचने पड़े। उम्मीद बंधी ही थी कि पहाड़ टूट पड़ा। जोधपुर में डॉक्टर ने कहा, नरपत की दोनों किडनी खराब हैं। डॉक्टर ने जयपुर ले जाने की सलाह दी तो सरोज को इसके लिए खेत गिरवी रखना पड़ा।
मां किडनी देने को तैयार, मगर पैसे नहीं
नरपत की मां किडनी देने को तैयार है लेकिन सरोज के पास ट्रांसप्लांट तो दूर, खाना खाने के भी पैसे नहीं हैं। उसे फुटपाथ पर रोते देख एक डेयरी संचालक ने नरपत को दूध पिलाया। नम आंखों से पति-पत्नी ने बताया, अब सिर्फ भगवान से आस है। भगवान चाहेगा तो जीवन बचेगा, अन्यथा ढाई साल का बेटा और 7 साल की बेटी अनाथ हो जाएंगे। नरपत ने बताया कि वह चैन्नई में बिजली मैकेनिक का काम करता था लेकिन बीमारी के कारण छोडऩा पड़ा। गांव में उसके हिससे में एक कच्चा कमरा ही है इसलिए उसे कोई उधार भी नहीं देता। नौ साल पहले उसकी शादी हुई थी लेकिन ससुराल पक्ष भी आर्थिक रूप से कमजोर है। अपने दोनों बच्चों को सरोज ने अपने मायके मंूडवा के समीप खुडख़ुड़ा (नागौर) में छोड़ रखा है। ससुराल पक्ष ने ही खाने-पीने का कुछ सामान ***** के साथ जयपुर भेजा है, जिससे दोनों दिन गुजार रहे हैं।
Updated on:
10 Jul 2018 09:26 am
Published on:
10 Jul 2018 09:25 am
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