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70 साल बाद आए चीतों को चीतल परोसने पर विवाद, विश्नोई समाज ने पीएम मोदी को लिखा पत्र

पीएम नरेंद्र मोदी ने अपने जन्मदिन पर 17 सितंबर को मध्य प्रदेश के कूनो राष्ट्रीय उद्यान में आठ चीतों को छोड़ा है। हालांकि इन चीतों के भोजन के लिए राजगढ़ से चीतल व हरिण भेजने का मामला गर्मा गया है।

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जयपुर

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Umesh Sharma

Sep 19, 2022

70 साल बाद आए चीतों को चीतल परोसने पर विवाद, विश्नोई समाज ने पीएम मोदी को लिखा पत्र

70 साल बाद आए चीतों को चीतल परोसने पर विवाद, विश्नोई समाज ने पीएम मोदी को लिखा पत्र

पीएम नरेंद्र मोदी ने अपने जन्मदिन पर 17 सितंबर को मध्य प्रदेश के कूनो राष्ट्रीय उद्यान में आठ चीतों को छोड़ा है। इनमें पांच मादा और तीन नर हैं। नामीबिया से 'प्रोजेक्ट चीता' के हिस्से के रूप में इन्हें भारत लाया गया है, लेकिन इन चीतों के भोजन के लिए राजगढ़ से चीतल व हरिण भेजने का मामला गर्मा गया है। इस संबंध में अखिल भारतीय विश्नोई महासभा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है।

मोदी को लिखे पत्र में समाज ने लिखा है कि चीतों के भोजन के लिए चीतल, हरिण सीमित दायरे में छोड़े गए हैं, इससे समाज बहुत आहत है। विश्नोई समाज 5 शताब्दियों से पर्यावरण, प्रकृति और वन्यजीवों की रक्षा के लिए गुरु जम्भेश्वर के दिए सिद्धांतों पर चल रहा है। वृक्ष और वन्यजीवों की रक्षा के लिए 363 का बलिदान सबके सामने है। लेकिन चीतल और हरिण को छोड़ने की खबर से पूरा समाज दुखी है। समाज की सभी संस्थाएं, संत, जीवरक्षा सभा एवं महासभा आहत है। वैज्ञानिक दृष्टि से भी यह कोई स्थापित तथ्य नहीं है कि चीता प्रकृति के लिए अपरिहार्य है और चीतल नहीं। इसलिए इस निर्णय पर पुनर्विचार कर इसे वापस लिया जाए।


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हरिण की प्रजाति विलुप्त होने के कगार पर

महासभा के अध्यक्ष देवेंद्र बूडिया ने लिखा कि हरिण की प्रजाति विलुप्त होने के कगार पर है। जबकि हमारा समाज जीवों की रक्षा के लिए आहूति देता आया है। इसलिए 'जीव दया पालणी, रूंख लिलो नहीं घावे' के गुरू जम्भोजी के सिद्धांत को सदृढ़ता प्रदान करते हुए चीतों को चीतल परोसने के इस अवैज्ञानिक और संवेदनहीन आदेश को निरस्त किया जाए।