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नन्हे शेफ, मीठे सपने: बच्चों की प्यारी रसोई की कहानियां

Kids Corner: चित्र देखो कहानी लिखो 79 .... बच्चों की लिखी रोचक कहानियां, परिवार परिशिष्ट (20 मई 2026) के पेज 4 पर किड्स कॉर्नर में चित्र देखो कहानी लिखो 79 में भेजी गई सराहनीय कहानियां दी जा रही हैं।

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जयपुर

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Tasneem Khan

May 21, 2026

Kids Cooking Stories

किड्स कॉर्नर: चित्र देखो कहानी लिखो 79

नन्ही शेफ पिंकी

प्रत्यक्षा पारीक, उम्र- 10 वर्ष
पिंकी को रसोई में नए प्रयोग करना बहुत पसंद था। एक दिन उसने अपनी शेफ वाली टोपी पहनी और मां की मदद के लिए रसोई में पहुंच गई। ताजी हवा और हरी पत्तियों के बीच उसने अपनी जादुई रेसिपी बनाना शुरू किया। चूल्हे पर बर्तन गरम हो रहे थे और पिंकी बड़े ध्यान से सब मिला रही थी। मां ने अपनी नन्ही परी को इतनी लगन से खाना बनाते देखा, तो उसे प्यार से गले लगा लिया। मां के गले लगते ही पिंकी की खुशी का कोई ठिकाना नहीं रहा।
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नन्हे किकू का जादुई सूप

आर्यन मतवाला, उम्र- 13 वर्ष
एक जादुई जंगल के बीच नन्हा किकू अपनी निराली रसोई में रहता था। उसे खाना पकाने का बहुत शौक था। एक सुबह उसने दोस्तों के लिए अपनी जादुई कड़ाही में ताजे फूलों का रस और मीठे फलों का अर्क मिलाकर एक सूप बनाया। सूप गहरे गुलाबी रंग का और बहुत स्वादिष्ट था। तभी एक चिड़िया आई और सूप की खुशबू का आनंद लेने लगी। शाम को सभी दोस्तों ने किकू की मेहनत की जमकर तारीफ की। यह देखकर किकू समझ गया कि प्यार से बनाया खाना सबसे मीठा होता है।
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मां की मदद

युक्तांश ताम्रकार, उम्र- 13 वर्ष
एक बच्ची थी जिसका नाम गुड़िया था। एक दिन जब उसकी मां बाजार गई, तो गुड़िया ने खुद खाना बनाने की सोची। उसने अपनी छोटी रसोई में आटा और सब्जियां निकालीं और प्यार से खाना बनाना शुरू किया। काम करते समय वह गाना भी गा रही थी। मां घर लौटी तो रसोई साफ देखकर बहुत खुश हुई और उसे गले लगा लिया। उस दिन से गुड़िया रोज अपनी मां की मदद करने लगी। इससे उनके घर में हमेशा खुशियों का माहौल रहने लगा।
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नन्हे शेफ टीटू की रसोई

जिज्ञासा, उम्र- 12 वर्ष
परीकथा नगरी में टीटू नाम का होनहार शेफ रहता था। उसने एक दिन चेक वाला एप्रन पहना और नीले कटोरे में जादुई फूलों का मीठा रस और गुलाबी खुशियां मिलाईं। जैसे ही उसने चम्मच हिलाया, पूरी रसोई में मीठी खुशबू फैल गई। खुशबू सूंघकर उसके कई नन्हे दोस्त खिड़की पर इकट्ठा हो गए। टीटू ने मुस्कुराते हुए अपनी पिंक मैजिक पुडिंग सभी दोस्तों में बांट दी। सबने मिलकर वह पुडिंग बड़े मजे से खाई। टीटू ने जाना कि असली स्वाद दोस्तों के साथ मिलकर खाने में ही है।
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चीकू का जादुई सूप

आरव मीना, उम्र- 11 वर्ष
एक जंगल में चीकू नाम का नन्हा बौना रहता था। एक दिन उसने अपने पशु-पक्षी दोस्तों के लिए बड़ी सफेद टोपी पहनी और गुलाबी जादुई सूप तैयार करने लगा। इस सूप की शानदार खुशबू सूंघकर सभी जानवर उसके किचन के बाहर आ गए। चीकू ने सूप चखा तो वह बेहद स्वादिष्ट बना था। इस सूप को पीकर बीमार जानवर भी तुरंत ठीक और खुश हो जाते थे। चीकू सबको प्यार से सूप पिलाकर बहुत आनंदित था। अब चीकू हर रविवार अपने दोस्तों के लिए यह खास सूप बनाता है।
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मिनी का मदर्स डे का तोहफा

अनुराग जोशी, उम्र- 13 वर्ष
एक गांव में मिनी नाम की नन्ही परी रहती थी। उसे नए पकवान बनाना बहुत पसंद था। मदर्स डे के दिन मिनी की मां गहरी नींद में सो रही थी। मिनी ने अपनी मां को तोहफा देने की सोची। उसने अपनी मां के लिए एक बहुत ही बढ़िया और स्वादिष्ट डिश बनाई। जब मां ने वह डिश खाई तो वह बहुत खुश हुई। मिनी और उसकी मां ने मिलकर मदर्स डे मनाया। मिनी ने तय किया कि वह हमेशा अपनी मां को ऐसे ही प्यारे सरप्राइज देती रहेगी।
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गुड़िया की स्वादिष्ट खीर

कौस्तुभ चौहान, उम्र- 09 वर्ष
एक गांव में गुड़िया नाम की लड़की रहती थी, जिसे खाना बनाना बहुत पसंद था। एक दिन गांव के मेले में स्वादिष्ट भोजन प्रतियोगिता हुई। गुड़िया ने बड़े मन से दूध, चीनी, इलायची और मेवे डालकर खीर बनाई। प्रतियोगिता में निर्णायक मंडल ने जब गुड़िया की खीर खाई, तो वे बहुत खुश हुए। खीर का स्वाद सबसे अलग था, इसलिए गुड़िया को प्रथम पुरस्कार मिला। उसने अपनी सफलता का श्रेय अपनी मां को दिया। गांव वाले आज भी गुड़िया की उस स्वादिष्ट खीर की तारीफ करते हैं।
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छोटू शेफ का कमाल

आरव रैसवाल, उम्र- 08 वर्ष,
छोटू फूल गांव का सबसे छोटा शेफ था। एक दिन उसके दोस्तों का जन्मदिन था, पर केक नहीं था। छोटू ने अपनी टोपी पहनी और तुरंत गुलाबी हलवा बनाया। उसने उसमें दोस्ती की चीनी, खुशी का दूध और एक चुटकी प्यार मिलाया। हलवा बना तो पूरी रसोई खुशबू से भर गई। दोस्तों ने खुश होकर कहा कि यह तो केक से भी ज्यादा मीठा है। छोटू समझ गया कि प्यार से बनी चीज सबसे बड़ी खुशी देती है। अब छोटू हर जन्मदिन पर यही खास हलवा बनाता है।
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लिली की जादुई छुट्टियां

सुरभि कारखानीस, उम्र- 13 वर्ष
परियों के राज्य में लिली नाम की परी रहती थी। छुट्टियों में वह बोर हो रही थी। एक दिन मां ने उसे उदास देखकर अपने साथ बेकिंग करने को कहा। यह सुनते ही लिली खुशी से तैयार हो गई। उस दिन के बाद लिली रोज अपनी मां के साथ स्वादिष्ट केक और कुकीज बनाने लगी। धीरे-धीरे उसे समझ आया कि असली खुशी परिवार के साथ समय बिताने में है। उसकी वे छुट्टियां हमेशा के लिए सबसे यादगार और मजेदार बन गई।
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राधिका की मेहनत

नमन चारण, उम्र- 12 वर्ष
एक शहर में राधिका रहती थी। बहुत सालों बाद उसके फौजी पिताजी घर आ रहे थे। राधिका ने उनके लिए स्ट्रॉबेरी मिल्कशेक, पनीर की सब्जी और तंदूरी रोटी बनाने की सोची। उसे यह सब बनाना नहीं आता था, पर उसने हार नहीं मानी और अपनी मेहनत से सब तैयार कर लिया। जब पिताजी घर आए तो दोनों ने मिलकर खाना खाया। पिताजी ने राधिका की बहुत तारीफ की। राधिका को समझ आ गया कि कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती है।
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गुड़िया की मीठी खीर

अश्विक जैन, उम्र- 07 वर्ष
एक गांव में गुड़िया को अपनी मां की तरह खाना बनाना पसंद था। एक सुबह उसने परिवार के लिए मीठी खीर बनाने की सोची। उसने टोपी पहनी और दूध, चीनी व चावल मिलाकर गाना गाते हुए खीर बनाई। मां ने गुड़िया को मेहनत करते देख उसकी खूब तारीफ की। खीर तैयार होने पर पूरे घर में खुशबू फैल गई। दादी ने भी खीर खाकर उसे बहुत स्वादिष्ट बताया। गुड़िया ने सीखा कि प्यार से किया काम सबको खुशियां देता है। उसकी खीर खाकर पूरा परिवार आनंद से भर गया।
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समझदार गुड़िया

विनायक शर्मा, उम्र- 13 वर्ष
गुड़िया एक समझदार लड़की थी। एक दिन मां बाजार गई तो गुड़िया खुशी-खुशी रसोई में गई। उसने एप्रन पहना और कटोरे में आटा घोलने लगी। खिड़की से ठंडी हवा आ रही थी। गुड़िया ने बड़े ध्यान से रोटी और हलवा बनाया। जब मां घर लौटी तो रसोई साफ देखकर बहुत खुश हुई। उसने खाना चखा और गुड़िया की बहुत प्रशंसा की। इस तरह गुड़िया ने अपनी मां की मदद करके उनका दिल जीत लिया। हमें भी अपने माता-पिता की हमेशा ऐसे ही सहायता करनी चाहिए।
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मेहनती गुड़िया

कनिका चौधरी, उम्र- 10 वर्ष
एक गांव में गुड़िया नाम की बच्ची रहती थी। एक दिन उसकी मां बाजार गई थी। गुड़िया ने अपनी मां के लिए स्वादिष्ट खाना बनाने की सोची। उसने सब्जियां काटीं, आटा गूंथा और हलवा बनाया। रसोई में बर्तन चमक रहे थे और खुशबू फैल रही थी। उसकी छोटी बहन ने भी खुशबू की तारीफ की। जब मां लौटी तो साफ रसोई और स्वादिष्ट भोजन देखकर बहुत प्रसन्न हुई। मां ने गुड़िया को गले लगा लिया। उस दिन पूरे परिवार ने एक साथ बैठकर हंसी-खुशी से खाना खाया।
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छोटी रसोइया

गायु वर्मा, उम्र- 09 वर्ष
एक छोटी लड़की अपनी रसोई में खाना बना रही थी। उसने एप्रन पहना और सिर पर फूलों का मुकुट लगाया। वह बड़े प्यार से कटोरे में मिठाई घोल रही थी। लड़की अपनी मां की मदद करना चाहती थी। थोड़ी देर बाद स्वादिष्ट पकवान तैयार हो गया। मां ने खाना चखा और खुश होकर बोली, वाह! तुमने तो बहुत अच्छा बनाया है। लड़की यह सुनकर मुस्कुरा दी। उसने सीखा कि लगन से किया काम हमेशा अच्छा होता है। अब वह हर छुट्टी के दिन रसोई में मां का हाथ बंटाती है।
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पिंकी की बेकरी

सिद्धार्थ झोरड़, उम्र- 08 वर्ष
पिंकी को केक बनाना पसंद था। उसने माता-पिता से बेकरी खोलने को कहा, पर उनके पास पैसे नहीं थे। तब मां ने घर की रसोई को ही बेकरी बनाने का उपाय सोचा। पिंकी बहुत खुश हुई और पूरी मेहनत से केक बनाने लगी। उसकी मां घर-घर जाकर केक बांट आती थी। ऐसे ही करते-करते उनके पास इतने पैसे हो गए कि उन्होंने एक नई बेकरी खरीद ली। पिंकी का सपना अपनी मेहनत और मां के साथ से आखिरकार पूरा हो गया।
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समझदार रोहन और मां की मदद

इविशा लुणावत, उम्र- 07 वर्ष
रोहन सात साल का जिम्मेदार बच्चा था। रविवार को उसने थकी हुई मां की मदद करने की सोची। उसने रसोई में जाकर शेफ टोपी और एप्रन पहना। रोहन ने मां के लिए स्ट्रॉबेरी योगर्ट शेक बनाया। उसने दही में स्ट्रॉबेरी और चीनी मिलाकर उसे अच्छे से फेंटा। जब उसने यह सुंदर गिलास मां को दिया तो वह पीकर बहुत खुश हुई और उसकी थकान दूर हो गई। रोहन को समझ आ गया कि मां की मदद करने से बहुत खुशी मिलती है। अब वह अक्सर अपनी मां के लिए ऐसे मीठे शेक बनाता है।
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परी का स्वादिष्ट केक

शिवांश उपाध्याय, उम्र- 11 वर्ष
परी अपनी रसोई में मीठा गुलाबी घोल तैयार कर रही थी। वह दोस्तों के लिए एक खास केक बना रही थी। ओवन से बहुत ही लाजवाब खुशबू आ रही थी। परी को लालच आ गया कि वह छोटा सा केक अकेले ही खा ले। तभी उसके दोस्त दरवाजे पर ताजे फूल और फल लेकर आ गए। दोस्तों का प्यार देखकर परी को शर्मिंदगी हुई। उसने केक के तीन टुकड़े किए और सबके साथ मिलकर खाया। उसे समझ आ गया कि सबके साथ बांटकर खाने में ही असली मजा है।
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गुड़िया की प्यारी रसोई

विहान अग्रवाल, उम्र- 07 वर्ष
एक बार छोटी गुड़िया अपनी मम्मी की रसोई में खेल रही थी। उसने फूलों वाली टोपी पहनी और सबके लिए स्वादिष्ट खीर बनाने लगी। गुड़िया ने दूध मिलाया और प्यार से चम्मच चलाने लगी। तभी खिड़की से एक भूखी चिड़िया अंदर झांकने लगी। गुड़िया ने मुस्कुराकर अपनी खीर का थोड़ा हिस्सा उसे भी दे दिया। चिड़िया ने खुशी से कहा कि जो बांटकर खाता है, उसके घर हमेशा खुशियां आती हैं। गुड़िया ने जाना कि प्यार और बांटने से हर काम मीठा बन जाता है। वह रोज उस नन्ही चिड़िया के लिए कुछ न कुछ बचाकर रखती थी।
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टोनी का स्वादिष्ट जैम

आराध्य जांगिड़, उम्र- 07 वर्ष
एक दिन टोनी की मां की तबीयत खराब हो गई। मां ने कहा कि आज तुम खुद कुछ बना लो। टोनी ने सोचा कि मां को जैम पसंद है, तो आज वही बनाता हुं। उसने अच्छे से तैयार होकर मां के लिए जैम बनाया। जब वह जैम लेकर मां के पास गया और उन्होंने चखा, तो वे बहुत खुश हुई। मां ने कहा कि तुमने बहुत अच्छा जैम बनाया है, अब से मैं तुमसे ही बनवाया करूंगी। टोनी यह सुनकर बहुत खुश हुआ और उसने मां को कसकर गले लगा लिया।
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श्री जी की मैजिक रसोई

गर्विष्ठ अधाना गुर्जर, उम्र- 07 वर्ष
श्री जी को ख्याल आया कि अपनी प्यारी लाडो बुआ को जन्मदिन का सरप्राइज दिया जाए। उसने शेफ की टोपी पहनी और बड़े कटोरे में केक का गुलाबी मिश्रण तैयार करने लगी। गैस पर कुछ पक रहा था और चाय भी तैयार थी। इस सरप्राइज में उसके भाई त्रियक्ष और गर्विष्ठ भी शामिल थे। रसोई की मीठी खुशबू सूंघकर दोनों वहां पहुंचे और केक देखकर खुशी से उछल पड़े। तीनों बच्चे मिलकर बुआ का इंतजार करने लगे। बुआ ने जब यह शानदार सरप्राइज देखा तो वे खुशी से रो पड़ीं।
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छोटी गुड़िया की समझदारी

आरोही गर्ग, उम्र- 12 वर्ष
एक गांव में गुड़िया नाम की बच्ची रहती थी। एक दिन उसकी मां बीमार हो गई। गुड़िया ने हिम्मत दिखाई और खुद खाना बनाने रसोई में गई। उसने एप्रन पहनकर दाल बनाई, रोटियां सेंकीं और मीठी खीर भी तैयार की। जब परिवार ने खाना खाया, तो सब बहुत खुश हुए। पिताजी ने कहा कि हमारी गुड़िया बहुत अच्छी रसोइया बन गई है। मां ने उसे गले लगाया और कहा कि मेहनत से सब आसान हो जाता है। गुड़िया की इस समझदारी से पूरे घर का माहौल खुशनुमा हो गया।

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हॉबी और गलती

भव्या गहलोत, उम्र- 11 वर्ष
रिया की हॉबी कुकिंग थी। एक दिन उसने मम्मी-पापा के लिए केक बनाने की सोची। उसने मैदा, अंडा और फूड कलर मिलाकर ओवन में रख दिया। रिया ने सोचा कि केक आधे घंटे में बनेगा, तो वह आराम करने चली गई। पर केक तो दस मिनट में ही बन गया था। जब जलते केक की खुशबू आई तो वह दौड़कर गई। रिया को अपनी गलती का अहसास हुआ। उसने ठान लिया कि कुकिंग करते समय वह कभी आराम नहीं करेगी। इसके बाद उसने अपनी मां की मदद से एक नया और बहुत ही स्वादिष्ट केक तैयार किया।
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खरगोश की हैरानी

इवांशी वैष्णव, उम्र- 08 वर्ष
बारिश के मौसम में एक खरगोश झाड़ियों से निकलकर खुले मैदान में आ गया। वहां उसने दो बड़े रंग-बिरंगे अंडे देखे। जैसे ही उसने एक अंडे को छुआ, वह लुढ़क गया। यह देखकर खरगोश डर गया और शोर मचाकर अपने साथियों को बुलाने लगा। उसकी आवाज सुनकर पक्षी, तितली और दूसरे जानवर भी वहां आ गए। सबने मिलकर समझाया कि हमें अनजान चीजों को कभी हाथ नहीं लगाना चाहिए। अब खरगोश कोई भी नई चीज देखने पर सबसे पहले अपने दोस्तों को बुला लेता है।
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रसोईघर की नन्ही परी

आराध्या कलानी, उम्र- 13 वर्ष
एक खुशहाल गांव में पिंकी नाम की चुलबुली लड़की रहती थी। उसे पकवान बनाना पसंद था। एक दिन उसने फूलों का मुकुट पहना और खुद को परी समझकर रसोई में गई। उसने अपनी मां को सरप्राइज देने के लिए ताजे फलों का रस, दूध और शहद मिलाकर गुलाबी सूप बनाया। सूप चखने पर वह बहुत स्वादिष्ट और खुशबूदार लगा। पिंकी ने सोचा कि प्यार से बना खाना ही असली जादू होता है। वह गर्व से मुस्कुराते हुए अपनी मां को उपहार देने गई। मां ने पिंकी को इस प्यारे से तोहफे के लिए ढेरों आशीर्वाद दिए।
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खरगोश और रंग-बिरंगे अंडे

प्रिशा सांकलेचा, उम्र- 07 वर्ष
बगीचे में एक प्यारा खरगोश रहता था। एक दिन उसे घास में दो रंग-बिरंगे अंडे दिखाई दिए। तभी एक तितली आई और बोली कि ये खास अंडे हैं, इन्हें संभालकर रखना। खरगोश रोज उनकी देखभाल करता। कुछ दिनों बाद अंडों से दो छोटे-छोटे चूजे बाहर निकले। खरगोश बहुत खुश हुआ और उसने तितली को धन्यवाद दिया। वह समझ गया कि प्यार और देखभाल से ही खुशियां जन्म लेती हैं। अब वह उन दोनों चूजों के साथ बगीचे में रोज खूब खेलता है।