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Kadaknath Farming: राजस्थान में ‘कड़कनाथ’ मुर्गा पालन से किसान मालामाल, कीमत जानकर रह जाएंगे हैरान

Kadaknath Poultry Farming: राजस्थान में कड़कनाथ मुर्गा पालन किसानों के लिए कमाई का नया और स्थाई तरीका बन रहा है। कड़कनाथ प्रजाति के मुर्गा पालन से किसानों की आर्थिक समृद्धि में भी बढ़ोतरी हो रही है। दरअसल यह देसी नस्ल है और इसके लिए महंगे पोल्ट्री फार्म की भी जरूरत नहीं है। इस मुर्गे के पंख चोंच,जीभ, मांस, हड्डियां और खून काला होता है।

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जयपुर

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Anand Prakash Yadav

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किशन शर्मा

May 21, 2026

Rajasthan poultry farming

कड़कनाथ मुर्गा पालन बना किसानों के लिए फायदे का सौदा,पत्रिका फोटो

Kadaknath Poultry Farming: राजस्थान में कड़कनाथ मुर्गा पालन किसानों के लिए कमाई का नया और स्थाई तरीका बन रहा है। कड़कनाथ प्रजाति के मुर्गा पालन से किसानों की आर्थिक समृद्धि में भी बढ़ोतरी हो रही है। दरअसल यह देसी नस्ल है और इसके लिए महंगे पोल्ट्री फार्म की भी जरूरत नहीं है। इस मुर्गे के पंख चोंच,जीभ, मांस, हड्डियां और खून काला होता है।

ऐसा इसमें मौजूद 'मेलानिन' नाम के प्राकृतिक पिगमेंट की अत्यधिक मात्रा के कारण होता है। इस प्रजाति की मुर्गी के अंडे हल्के भूरे, सुनहरे रंग के होते है और इन्हें पौष्टिक माना जाता है। जिससे इनकी बाजार में भारी डिमांड हर मौसम में बनी रहती है।

बाजार में हमेशा रहती है मांग

कड़कनाथ में 24 से 27 प्रतिशत तक प्रोटीन और फैट की मात्र 0.73 से 1.03 फीसदी होता है। इसमें कोलेस्ट्रॉल आम मुर्गे के मुकाबले कम होता है। सामान्य मुर्गों की तुलना में इसमें 10 गुना ज्यादा आयरन पाया जाता है। इसमें विटामिन बी-1, बी-2, बी-6, बी-12, सी, और ई के साथ नियासिन, अमीनो एसिड पाए जाते हैं। विशेषज्ञों की मानें तो इसकी तासीर अत्यधिक गर्म होती है।

यह भी रखें ध्यान

शेड को हमेशा सूखा-हवादार रखें। बिछावन के लिए इस्तेमाल होने वाले लकड़ी के बुरादे भूसी को पलटते रहें। समय पर टीकाकरण करवाएं। रोड के बाहर-अंदर नियमित रूप से चूने और ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव करें। बाहरी जानवरों से रक्षा करें।

पालना है आसान

इसके लिए महंगे पोल्ट्री फार्म की जरूरत नहीं है। यह एक 'देसी' नस्ल है, जिसे खुले खेत्, आंगन या बाड़े में आसानी से पाल सकते हैं। यह हरे पत्ते, बरसीम, कीड़े-मकोड़े और घर का बचा हुआ अनाज खाकर भी पल जाता है। किसान मक्का, बाजारा, गेहूं का दलिया भी दे सकते हैं। बाड़े में हमेशा साफ-ताजे पानी की व्यवस्था रखें। गर्मियों में पानी में इलेक्ट्रोलाइट्स या विटामिन-सी मिलाना फायदेमंद होता है। यह 40 डिग्री धूप से लेकर कड़ाके की ठंड को भी सह लेता है।

इनका कहना है-

कड़कनाथ मुर्गा पालन के लिए किसान 15 दिन के स्वस्थ चूजे खरीद सकते हैं। इन्हें पूरी तरह से तैयार होने में बॉयलर के मुकाबले थोड़ा ज्यादा समय लगता है। अच्छी खुराक देने पर लगभग 107 से 115 दिनों में या 6 महीने तक की आयु में इसका वजन डेढ़ से दो किलो तक हो जाता है। इसकी बाजार में अच्छी मांग होने के कारण किसान भाइयों को बढ़िया दाम मिलते हैं। अच्छा मुनाफा होता है।
-डॉ. गगन चावला, शोधार्थी, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद्, राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान, करनाल