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राजस्थान को भी ‘उड़ता पंजाब’ बना देता नारकोटिक्स विभाग, अधिकारी ही कर रहे हैं तस्करी

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राजस्थान को भी उड़ता पंजाब बना देता नारकोटिक्स विभाग, अधिकारी ही कर रहे हैं तस्करी

मुकेश शर्मा / जयपुर। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने इस बार चित्तौडगढ़़ नारकोटिक्स विभाग में चल रहे नशे के अवैध कारोबार की जड़ पर वार किया है। एसीबी जांच में सामने आया है कि अवैध नशे के धंधे में नारकोटिक्स, पुलिस के कई अधिकारी और कर्मचारियों की मिलीभगत से काश्तकार और तस्कर इसको देशभर में फैला रहे हैं। पुलिस की आंखों के नीचे से तस्कर अफीम और डोडा पोस्त को प्रदेश के अन्य जिले और देश के अन्य राज्यों में पहुंचाते हैं। लेकिन पुलिस उनकी धरपकड़ नाममात्र की कर इतिश्री कर रही है। अफीम पैदावार में अवैध बेचान के लिए मादक पदार्थ को किस तरह बढ़ाया जाता है और सरकारी खरीद को कैसे कम किया जाता है, इसकी भी जानकारी सामने आई है। एसीबी ने अफीम की पैदावार को बाजार में अवैध तरीके से कैसे पहुंचाते हैं, इसकी जानकारी इस तरह दी।

1. तयशुदा बुबाई क्षेत्र की बजाय अधिक भूमि पर पैदावार

सबसे पहले अफीम की पैदावार के लिए काश्तकारों को नारकोटिक्स विभाग की ओर से लाइसेंस दिए जाते हैं। उदाहरण के तौर पर लाइसेंस एक बीघा के लिए दिया गया, लेकिन मौके पर काश्तकार के पास दो बीघा जमीन है। काश्तगार विभाग के अधिकारी और कर्मचारी की मिलीभगत से एक बीघा लाइसेंस में पैदावार करने की बजाय दो बीघा जमीन पर अफीम की खेती करेगा, बिना लाइसेंस की भूमि में अफीम उगाने पर काश्तकार से रकम वसूली जाती है।

2. पौधारोपण में घूस

अफीम पट्टा लाइसेंस में पौधों के बीच की दूरी और उनकी एक लाइन से दूसरी लाइन की दूरी में कितनी होगी, इसका भी पहले से तय होता है। लेकिन काश्तकारों से कम दूरी पर अधिक पौधे लगवाकर अवैध अफीम की पैदावार करवाई जाती है, इससे अवैध अफीम सरकारी रेट से बीस गुना अधिक दरों पर तस्करों द्वारा बेची जाती है।

3. अफीम का दूध निकाल लेते और फिर...

पौधे में अफीम का फूल आता है, तब चीरा लगाकर उससे नशीला पदार्थ निकाल लिया जाता है, लेकिन बारिश के मौसम में हल्की बारिश में भी तेज बारिश होने और सर्दियों में तेज सर्दी से पाला पडऩे पर फसल नष्ट होना बताया जाता है, नारकोटिक्स अधिकारी अपनी रिपोर्ट में दोनों ही तरह से फसल नष्ट होने का हवाला दे पैदावर कम होना बताया जाता है

4. फसल चौपट होने का हवाला दे कटौती

अवैध तरीके से बुवाई की गई अफीम अलग से एकत्र की जाती है। जबकि लाइसेंसशुदा अफीम की पैदावार में कई तरीकों से फसल चौपट होने का हवाला दे उसकी कटौती कर दी जाती है।

56 किलोग्राम प्रति हैक्टेयर

सूत्रों के मुताबिक, वर्ष 2016 में केन्द्र सरकार के राजस्व विभाग ने अफीम की खेती के लिए राजस्थान और मध्यप्रदेश में 56 किलोग्राम प्रति हैक्टेयर और उत्तर प्रदेश में 52 किलोग्राम प्रति हैक्टेयर पैदावर का टारगेट रखा था। सरकारी उतनी ही पैदावार करवाती है, जितनी खरीद करनी होती है, लेकिन उससे दोगुनी अधिक अफीम की पैदावार करवाई जा रही है।


बर्बाद हो गया पंजाब और श्रीगंगानगर

एसीबी सूत्रों के मुताबिक, मादक पदार्थों के चलते पंजाब में टास्क फोर्स का गठन किया गया है। पंजाब के कई जिलों में घर-घर में लोगों को नशा की लत लगा दी गई है। नशा के अवैध कारोबार को रोकने और तस्करों को पकडऩे के लिए एक एडीजी स्तर के अधिकारी की अगुवाई में यह टास्क फोर्स काम कर रही है। राजस्थान के श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़ में भी अधिकांश लोग को नशे की लत लगा दी गई है। लेकिन अब यह नशे की लत देश के अन्य राज्यों और राजस्थान के अन्य जिलों को अपनी चपेट में ले रही है।

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