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National Doctors Day: फ्रंटलाइन कोरोना वारियर्स को सलाम, धरती पर भगवान से कम नहीं

National Doctors Day : जयपुर . एक जुलाई को National Doctors Day है। ऐसे में Frontline Corona Warriors को सलामी देनी बनती है। धरती के ‘भगवान’ कहे जाने वाले Doctor जी-जान से दूसरों की सेवा में लगे हैं। खुद और परिवार की चिंता के बगैर दिन-रात काम कर रहे हैं।

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National Doctors Day : जयपुर . एक जुलाई को नेशनल डॉक्टर्स डे ( National Doctors Day ) है। ऐसे में फ्रंटलाइन कोरोना वारियर्स ( Frontline Corona Warriors ) को सलामी देनी बनती है। धरती के ‘भगवान’ कहे जाने वाले डॉक्टर ( Doctor ) जी-जान से दूसरों की सेवा में लगे हैं। खुद और परिवार की चिंता के बगैर दिन-रात काम कर रहे हैं। नेशनल डॉक्टर्स डे पर आइए आपको दिखाते हैं एक खास रिपोर्ट ।

हमारे समाज में डॉक्टर्स को भगवान का दर्जा दिया गया है। गंभीर परिस्थियों में डॉक्टर्स लोगों की जान बचाकर उनके भगवान बन जाते हैं। डॉक्टर्स ना सिर्फ लोगों का इलाज करते हैं, बल्कि उनकी जान बचाने के लिए समर्पित होकर उनकी सेवा करते हैं। समाज में अपना महत्वपूर्ण योगदान देने के साथ ही लगातार परिवर्तन लाने की कोशिश भी कर रहे हैं।

इसलिए मनाया जाता है डॉक्टर्स डे
एक जुलाई को भारत में ‘डॉक्टर्स डे’ सेलिब्रेट किया जाता है। भारत के मशहूर चिकित्सक डॉ. बिधान चन्द्र रॉय को श्रद्धांजलि देने के लिए ‘डॉक्टर्स डे 2020’ मनाया जाता है। राष्ट्रीय चिकित्सीय दिवस के रुप में हर वर्ष एक जुलाई को मनाए जाने के लिए 1991 में केन्द्र सरकार ने डॉक्टर दिवस की स्थापना की थी। भारत के प्रसिद्ध चिकित्सक डॉ बिधान चन्द्र रॉय को श्रद्धांजलि और सम्मान देने के लिए हर वर्ष एक जुलाई को उनकी जयंती और पुण्यतिथि पर इसे मनाया जाता है। डॉ बिधान चन्द्र रॉय को 4 फरवरी 1961 में उन्हें भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से नवाजा गया।


डॉक्टर्स जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहे मरीजों का न सिर्फ इलाज करते हैं, बल्कि उन्हें एक नया जीवन भी देते हैं. इसलिए उन्हें धरती पर भगवान का रूप कहा जाता है। डॉक्टर्स कई लोगों को उनकी जिंदगी वापस लौटाते हैं। बदलते खान—पान और जीवन शैली के कारण कई नए रोगों ने जन्म ले लिया है। ऐसे में मरीजों का उपचार करना डॉक्टर्स के लिए किसी चुनौति से कम नहीं है। सरकारी क्षेत्र में संसाधनों की अभी भी काफी कमी बनी हुई है। ऐसे में मरीजों का उपचार करते समय डॉक्टरों को और भी परेशानी उठानी पड़ती है।

इन दिनों दुनियाभर में कोरोना वासरस का खोफ है। इसके बावजूद खुद की चिंता किए बगैर मरीजों की सेवा ही लक्ष्य है। मरीजों की सेवा करते वक्त कुछ डॉक्टर व स्टाफ भी कोरोना वायरस से संक्रमित हो गए, फिर भी जनता की सेवा का जज्बा कम नहीं हुआ है। इस बार डॉक्टर्स का डॉक्टर्स डे कोरोना मरीजों की देखभाल करते हुए निकलेगा।

देश में सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेजों की संख्या में इजाफा हुआ है उसके बावजूद भी देश की जनसंख्या के हिसाब से डॉक्टरों की काफी कमी है। यही कारण है कि हर मरीज को उसका मनचाहा उपचार नहीं मिल पाता है। कई बार मरीजों को आउटडोर में लंबी लाइन लगाकर खड़े रहना पड़ता है तो कभी आॅपरेशन के लिए भी लंबी वेटिंग का इंतजार करना पड़ता है।

डॉक्टर्स डे पर डॉक्टरों ने भी यहीं संदेश दिया है कि वे हर संभव तरीके से उपचार कर मरीजों का निराश नहीं होने देंगे। इसी प्रकार मरीजों और उनके परिजनों को भी अपने व्यवहार से डॉक्टरों का दिल जीतना जरूरी है। सही मायने में तभी डॉक्टर्स और मरीजों के रिश्तों को मजबूती मिलेगी।
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इस वर्ष बहुत बड़ी महामारी का सामना कर रहे हैं। राजस्थान के डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ व पैरा मेडिकल स्टाफ को जाता है। आने वाले महीनों में भी सभी आम जनता को स्वास्थ्य लाभ देने के लिए इसी तरह कंधे से कंधा मिलाकर कार्य करते रहेंगे। इस दौर में मरीजों को डॉक्टरों के रहते हुए घबराने की जरूरत नहीं है।
— डॉ अजीत सिंह शक्तावत, एसएमएस अस्पताल
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वैश्वीक महामारी में आज मरीज डॉक्टर के पास जाने में डर रहा है, ऐसे में बीमारियों को लेकर सजक रहना जरूरी है। डॉक्टर्स अपनी जिम्मेदारी से अपनी भूमिका निभा रहे हैं। इस वर्ष डॉक्टर्स डे पर यह वचन लें कि जल्द से जल्द कोरोना पर जीत हासिल कर देश को बचाएंगे। डॉक्टर्स और मरीजों के बीच आपसी तालमेर से काफी सारी परेशानियां खत्म हो जाती है

डॉ एस एस अग्रवाल, पूर्व अध्यक्ष, आईएमए

महिलाओं को अपने घरों में मास्क, सैनिटाइजर से हाथ धोना आदि सावधानियों को अपनी दिनचर्या की आदत में शुमार करना होगा। हमने अस्पताल में आई संक्रमित महिलाओं में से 99 प्रतिशत महिलाओं को ठीक किया है, इसलिए किसी को डरने की जरूरत नहीं। प्रेग्नेंट महिलाओं को थोड़ी अधिक सावधानी रखने की आवश्यकता है।
— डॉ शालिनी राठौड, इंचार्ज कोविट वार्ड, महिला चिकित्सालय