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Navratri 2018: इस शुभ मुहूर्त और विधि-विधान के साथ करें मां दुर्गा की आराधना, जानें क्या है चैत्र नवरात्रि पर्व का महत्व

Navratri 2018: मां दुर्गा के नौ रूपों की आराधना का पावन पर्व शुरू हो चुका है। नवरात्री में इन नौ देवियों की शुभ मुहूर्त में करें पूजा, मिलेगा विशेष फल

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जयपुर

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Rajesh

Mar 22, 2018

Navratri 2018 date time puja vidhi or Shubh muhurat

Navratri 2018: आदि शक्ति दुर्गा की अराधना का पर्व चैत्र नवरात्र 18 मार्च से शुरू हो चुके है। इसी दिन से हिंदू कैलेंडर का नववर्ष भी प्रारंभ होता है। हिंदू धर्म में नवरात्रि की पूजा बहुत महत्व होता है। नवरात्रि के नौ दिनों को सबसे पवित्र दिन माना जाता है। नवरात्र के पहले दिन कलश स्थापना का विधान है। इस दिन कलश स्थापित कर श्रद्धालु नौ दिनों के व्रत की शुरुआत करते हैं। आपको बता दें कि साल में चार नवरात्र होते हैं, जिनमें से दो गुप्त नवरात्र होते हैं। आमतौर पर लोग दो नवरात्रों के बारे में जानते हैं- चैत्र या वासंतिक नवरात्र और आश्विन या शारदीय नवरात्र। इसके अलावा दो और नवरात्र भी हैं, जिनमें विशेष कामनाओं की सिद्धि की जाती है लेकिन चैत्र और आश्विन माह के नवरात्र ही ज्यादा लोकप्रिय हैं। चैत्र के महिने में नवरात्रि पड़ने से इसे चैत्र नवरात्रि पर्व कहते है और इस साल यह पर्व आठ दिन को होगा।

मां दुर्गा के नौ रूपों की आराधना का पावन पर्व शुरू हो चुका है। चैत्र नवरात्र का खास महत्व है क्योंकि इस महीने से शुभता और ऊर्जा का आरम्भ होता है। ऐसे समय में देवी की पूजा कर उनसे सुख-समृद्धि की कामना करना बहुत शुभ माना गया है। माना जाता है नवरात्र के दिनों में दुर्गा मां कैलाश छोड़कर धरती पर अपने भक्तों के साथ रहती हैं। वर्ष 2018 में चैत्र नवरात्र 18 मार्च से शुरू हो चुके हैं। 18 मार्च से शुरू हुए नवरात्र 25 मार्च तक रहेंगे।

घट स्थापना शुभ मुहूर्त-

इस साल 18 मार्च शाम से ही प्रतिपदा तिथि लग रही है इसलिए 18 मार्च से ही नवरात्रि के कलश स्थापना हो चुकी है। घट स्थापना का शुभ मुहूर्त 18 मार्च सुबह 6 बजकर 31 मिनट से लेकर 7 बजकर 46 मिनट तक था। 25 को अंतिम नवरात्र होगा। साथ ही इस दिन रामनवमी भी मनाई जाएगी। नवरात्र व्रत के पारण की तिथि 26 मार्च को दशमी के दिन है।

नवरात्री में इन नौ देवियों की करें पूजा -

नवरात्र‍ि के पहले दिन शैलपुत्री की पूजा होती है। शैलराज हिमालय की कन्या होने के कारण इन्हें शैलपुत्री कहा गया है। मां शैलपुत्री दाएं हाथ में त्रिशूल और बाएं हाथ में कमल का पुष्प लिए हुए हैं। इनका वाहन वृषभ है। नवदुर्गाओं में मां शैलपुत्री का महत्व और शक्तियां अनन्त हैं।

दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाती है। तीसरे दिन मां चंद्रघंटा जिसका अर्थ है चांद की तरह चमकने वाली, चौथे दिन मां कुष्मांडा जिसका अर्थ है पूरा जगत उनके पैर में है, तो पांचवे दिन स्कंदमाता जो कि कार्तिक स्वामी की माता है की पूजा होती है। छठे दिन कात्यायन आश्रम में जन्मी मां कात्यायनी एवं सातवें दिनमां कालरात्रि जो कि काल का नाश करती है की पूजा की जाती है। आठवें दिन सफेद रंग वाली मां महागौरी तो नौवें दिन सर्व सिद्धि देने वाली मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है।