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PHED लैब में चहेतों के डेप्यूटेशन का चल रहा ऐसा खेल, जनता पी रही दूषित पानी, अफसर कर रहे मौज

जिला लेबोरेट्री में पद रिक्त होने से पानी सैंपलों की जांच हो रही है प्रभावित

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जयपुर

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Vijay ram

Oct 27, 2017

Department of Public Health Engineering

जयपुर . जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग की वाटर टेस्टिंग लेबोरेट्री में इन दिनों डेप्युटेशन का खेल खुलेआम चल रहा है। विभाग के अफसरों से सांठ-गांठ कर लेबोरेट्री कर्मचारी राजधानी से बाहर तैनात होने के बावजूद डेप्युटेशन पर जयपुर स्थित लेबोरेट्री में सेवाएं दे रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ जिला स्तरीय लेबोरेट्री में पानी सैंपलों की जांच का फिलहाल कोई धणी धोरी नहीं होने के कारण संबंधित इलाकों की जनता को दूषित पेयजल का उपयोग करने पर मजबूर होना पड़ रहा है।

मिली जानकारी के अनुसार जयपुर स्थित स्टेट रेफरल सेंटर लेबोरेट्री का इस साल एनएबीएल सर्टिफिकेट भी हासिल हो चुका है। पानी गुणवत्ता जांच को लेकर विभाग की ओर से भी बढ़-चढ़ कर दावे किए जा रहे हैं, जबकि हकीकत इसके ठीक उलट है। प्रदेश की करीब आधा दर्जन जिला स्तरीय वाटर टेस्टिंग लेबोरेट्री में पदस्थ लैब स्टाफ विभाग के आला अफसरों की सरपरस्ती हासिल कर जिला स्तरीय लेबोरेट्री की बजाय राजधानी में ही अपने पैर जमाकर बैठे हैं।

लेबोरेट्री स्टाफ को डेप्युटेशन पर लगाने के बारे में विभाग के मुख्य अभियंता प्रशासन ने मुख्य अभियंता ग्रामीण तक से कोई मशवरा नहीं किया है। इसके चलते जहां जिला स्तर वाली लेबारेट्री में या तो स्टाफ कम है या फिर लेबारेट्री पर ही ताले लगे हुए हैं। ऐसे में जनता को शुद्ध पीने का पानी उपलब्ध कराने का दावा करने वाले जलदाय अफसर भी मौन साधे बैठे हैं और जनता दूषित पानी का सेवन करने पर विवश है।

चीफ केमिस्ट भी हुए एपीओ
मालूम हो बीते दिनों गांधीनगर स्थित जलदाय कार्यालय परिसर में हुई शराब पार्टी मामले में विभाग के प्रमुख शासन सचिव रजत कुमार मिश्र ने स्टेट रेफरल सेंटर लेबोरेट्री चीफ केमिस्ट राकेश माथुर को एपीओ कर दिया था। इसके बाद से लेकर अब तक स्टेट सेंटर लेबोरेट्री में चीफ केमिस्ट का पद रिक्त पड़ा है और अब तक किसी अन्य को उनका कार्यभार नहीं दिया गया है। ऐसे में राज्य व जिला स्तरीय लेबारेट्री में पानी सैंपलों की जांच का काम भी प्रभावित हो रहा है वहीं डेप्युटेशन पर तैनात कर्मचारी भी राजधानी में अंगद के पैर की तरह जमकर बैठे हैं।