
वेतन विसंगति परीक्षण समिति से वार्ता सम्पन्न
वार्ता में तथ्यों के साथ रखा शिक्षकों का पक्ष
जयपुर। वेतन विसंगति परीक्षण के लिए राज्य सरकार की ओर से गठित समिति के अध्यक्ष खेमराज चौधरी से राजस्थान शिक्षक संघ (राष्ट्रीय) की वार्ता हुई। वार्ता में संगठन के महामंत्री अरविंद व्यास, संगठन मंत्री प्रहलाद शर्मा, महिला मंत्री डॉ. अरुणा शर्मा, माध्यमिक सचिव रमेशचन्द्र पुष्करणा और प्राथमिक सचिव चन्द्रप्रकाश शर्मा शामिल रहे।
संगठन के प्रदेश महामंत्री अरविंद व्यास ने बताया की संगठन ने वेतन विसंगति परीक्षण समिति के समक्ष छठे वेतन वेतनमान के तहत अध्यापक, वरिष्ठ अध्यापक, शारीरिक शिक्षकों, प्रबोधकों तथा व्याख्याताओं व प्रधानाचार्य पदों पर कार्यरत कार्मिकों के वेतन विसंगतियों पर चर्चा कर समाधान की मांग की।
संगठन के प्रदेश संगठन मंत्री प्रहलाद शर्मा ने बताया कि संगठन ने औचित्य सहित प्रेषित प्रतिवेदन में 2007-08 के नियुक्त अध्यापकों व प्रबोधकों के मूल वेतन 12900 के स्थान पर 11170 रुपए होने की हुई वेतन विसंगति को संशोधित करने, वरिष्ठ अध्यापको की वेतन विसंगति दूर कर प्रारम्भिक मूल वेतन 16290 करने, केंद्र सरकार ने कर्मचारियों का न्यूनतम वेतन 18000 किया है जबकी राज्य सरकार ने 17700 रुपए ऐसे में राज्य के शिक्षकों सहित समस्त कर्मचारियों का भी न्यूनतम वेतन केंद्र के समान 18000 रुपए किए जाने की मांग की।
संगठन की प्रदेश महिला मंत्री डॉ. अरूणा शर्मा ने कहा कि राजपत्रित अधिकारियों को 10, 20, 30 वर्षीय एसीपी के स्थान पर 9, 18, 27 वर्षीय एसीपी देकर वरिष्ठतम को कनिष्ठतम से कम वेतन मिलने की विसंगति को दूर करने, प्रथम नियुक्ति तिथि से ही नियमित नियुक्त मानकर मूल वेतन व वेतन श्रृंखला प्रदान करने, व्याख्याताओं के मूल वेतन 16290 के स्थान पर 18750 करने की मांग की।
प्रदेश सचिव माध्यमिक शिक्षा रमेशचन्द्र पुष्करणा ने बताया कि प्रयोगशाला सहायक और प्रयोगशाला सहायक से पदोन्नत शिक्षकों की वेतन विसंगति दूर कर 4500 से 7000 का वेतनमान प्रदान कर तदनुरूप वेतन स्थिरीकरण कर एसीपी का लाभ प्रदान करने, केंद्र के समान पे लेवल संख्या 18 करने, राज्य कर्मचारी की पेंशन प्राप्त करने की अर्हता केंद्र के समान करने, मृतक आश्रित कर्मचारी को केंद्र के समान पेंशन देने की मांग की।
Published on:
07 Dec 2021 09:44 pm
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